जीवन की सरलता में ही ठहरता है धर्म : साध्वी जयश्रीजी

हैदराबाद, तीर्थंकरों की वाणी को जन जन तक पहुंचाने का कार्य संत करते हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के धर्म बोध देते हैं। वे भाग्यशाली आत्माएं होती हैं, जो जिनवाणी श्रवण कर अपना जीवन बदल देती हैं। जब तक जीवन में सरलता नहीं आयेगी, तब तक जीवन में त्याग, संयम व धर्म नहीं ठहर पाता है। इसी कारण सलर व सहज जीवन जीने को धर्म मय जीवन कहा गया है।

उक्त उद्गार श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ ग्रेटर हैदराबाद के तत्वावधान में काचीगुड़ा स्थित श्री पूनमचंद गांधी जैन स्थानक में चातुर्मासिक धर्म सभा को संबोधित करते हुए श्रमण संघीय राजस्थान वीरांगना साध्वी जयश्रीजी म.सा आदि ठाणा-3 ने व्यक्त किये। संघ के मंत्री धर्मेंद्र नाहर द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, साध्वी जयश्री म.सा ने कहा कि मनुष्य जीवन का लक्ष्य वासना नहीं, बल्कि संयम तप साधना है।

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43वें जैन शिक्षण शिविर में नवपद ओली और वाचन

वासना मनुष्य को पशु से भी बदतर बना देती है। संयम तप साधना मानव को महामानव, नर से नारायण, पशु से परमेश्वर बना देती है। वासना मृत्यु है, जहर व रोग है। साध्वी राजश्री म.सा ने अपने संबोधन में कहा कि माया मीता मीतागी नासेई अर्थात माया से मित्रता का संबंध, प्रेम, प्यार व स्नेह का संबंध सब कुछ समाप्त हो जाता है। जिसके जीवन में माया होती है वह मृत्यु को पाकर तिर्यंच योनि में चला जाता है। माया छल कपट से जीवात्मा नरक आयु का बंध कर लेती है।

धर्मसभा का संचालन करते हुए मंजू श्रीश्रीमाल ने चातुर्मास व संघ की गतिविधियों का ब्यौरा पेश किया। आज से प्रारम्भ हुए 43वें जैन धार्मिक शिक्षण संस्कार शिविर में लगभग 115 बालक बालिकाओं ने भाग लिया। शिविर संबंधित सारी जानकारी प्रदान की गई।

श्री शाश्वत नवपद आसोज मास ओलीजी के तहत साध्वी श्री जयश्री म.सा के सानिध्य में आगामी 29 सितंबर से 7 अक्तूबर तक प्रतिदिन सुबह 9.15 से 10.15 बजे तक श्रीपाल चारित्र का वाचन रहेगा। नवपद ओली के लाभार्थी परिवार मुल्तानमल प्रकाशचंद पद्मा देवी बरमेचा ईसामिया बाजार हैं। नवपद ओली करने वाले तपस्वियों को प्रभावना किशनलाल धन्नीबाई चमनलाल अनिल मुथा परिवार द्वारा दी जाएगी।

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