रेनलिक्स ने लॉन्च की देश की पहली स्मार्ट हेमोडायलिसिस मशीन आरएक्सटी 21

एआई और क्लाउड से युक्त क्रांतिकारी मशीन आरएक्सटी21

मुंबई, गुर्दे की देखभाल के क्षेत्र में काम कर रही रेनलिक्स हेल्थ सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड ने दुनिया की पहली पूरी तरह स्वदेशी और एआई आधारित स्मार्ट हेमोडायलिसिस मशीन रेनालिक्स – आरएक्सटी 21 लॉन्च की। यह मशीन रीयल टाइम रिमोट मॉनिटरिंग और क्लिनिकल कनेक्टिविटी जैसी आधुनिक सुविधाओं से युक्त है। इसकी शुरुआती कीमत 6.70 लाख रुपये रखी गई है, जो विदेशी मशीनों की तुलना में काफी सस्ती है।

यह मशीन भारत में ही पूरी तरह से डिजाइन और तैयार की गई है और इसका उपयोग खासकर उन मरीजों के लिए फायदेमंद होगा जिन्हें अंतिम चरण की किडनी बीमारी (ईएसआरडी), हृदय या फेफड़ों से जुड़ी दिक्कतें या अचानक किडनी फेल जैसी समस्याएं होती हैं।रेनलिक्स यह मशीन बनाकर भारत की पहली और दुनिया की छठी कंपनी बन गई है, जिसे ईयू सीई सर्टिफिकेशन मिला है।

कंपनी इस मशीन का उत्पादन बढ़ाने के लिए अगले 4 साल में 800 करोड़ रुपये का निवेश करेगी और 2027-28 तक हर साल 6,500 मशीनों का निर्माण करने की योजना है। कंपनी बैंगलोर, मैसूर और मुंबई में अपने प्लांट्स के जरिए उत्पादन करेगी।कंपनी ने बताया कि वह इस मशीन को महाराष्ट्र और कर्नाटक में सबसे पहले स्थापित करेगी और फिर पूरे भारत में फैलाएगी। दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका और यूरोप से भी कंपनी को ऑर्डर मिले हैं।

रेनलिक्स के संस्थापक और निदेशक डॉ. श्याम वासुदेव राव ने बताया, हमारी यह स्मार्ट मशीन डायलिसिस को आसान, सस्ता और पहुंच योग्य सुलभ बनाएगी। इससे मरीजों को घर के पास ही इलाज मिल सकेगा और उनका खर्च भी कम होगा।और कहा कि ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ के तहत भारत में बनी यह मशीन दुनियाभर के देशों में भेजी जाए। ताकि भारत दुनिया में सबसे बड़ा डायलिसिस मशीन बनाने वाला देश बन जाए।

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आरएक्सटी21: एआई और क्लाउड आधारित स्मार्ट डायलिसिस मशीन से स्वास्थ्य सेवाओं में नई क्रांति

आरएक्सटी में कई आधुनिक तकनीकें हैं जैसे –क्लाउड पर आधारित नेफ्रोलॉजी सिस्टम, एआई तकनीक से मरीज की स्थिति पर नजर, इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड्स, दूर से मशीन की निगरानी और अलर्ट, इमेज प्रोसेसिंग और मेडिकल डिवाइस नेटवर्किंग।

रेनलिक्स इस मशीन को सरकारी अस्पतालों, प्राइवेट क्लीनिकों और स्वास्थ्य केंद्रों में लगाएगी। इसके लिए कंपनी ने टेक्नीशियनों की ट्रेनिंग और सर्विस टीम्स की भी व्यवस्था की है।इसके अलावा रेनलिक्स ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बईएल) को आरएक्सटी 17 नामक एक अन्य मशीन के 6,000 यूनिट बनाने का लाइसेंस दिया है।

यह मशीन भी डायलिसिस के लिए उपयोग की जाती है और स्टैंडर्ड फीचर्स से लैस है।भारत में हर साल 2.2 लाख लोग ईएसआरडी से पीड़ित होते हैं और 3.4 करोड़ डायलिसिस सत्रों की जरूरत होती है। ऐसे में आरएक्सटी21 जैसे उपकरण देश के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में इलाज की बड़ी जरूरत को पूरा करेंगे।

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