‘रिजिल्यंट माइंड्स-थ्राइविंग बिजनेसेज’ कार्यक्रम आयोजित

व्यावसायिक सफलता में मानसिक दृढ़ता की अहम भूमिका : डॉ. भानुशाली

हैदराबाद, फेडरेशन ऑफ तेलंगाना चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफटीसीसीआई) द्वारा आज रेड हिल्स स्थित फेडरेशन हाउस में ‘रिजिल्यंट माइंड्स-थ्राइविंग बिजनेसेज’ विषयक कार्यक्रम आयोजित किया गया। उद्यमियों, व्यापारिक नेताओं, स्वास्थ्य पेशेवरों आदि को व्यावहारिक मनोवैज्ञानिक अंतर्दृष्टि प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार कार्यक्रम का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करना, आत्म-जागरूकता बढ़ाना, लचीलापन विकसित करना और चुनौतीपूर्ण पेशेवर वातावरण में भावनात्मक दबावों से निपटने पर चर्चा करना था।

इंडियन मेडिकल असोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिलीप पी. भानुशाली ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मानसिक दृढ़ता की व्यावसायिक सफलता में अहम भूमिका है। यह व्यवसाय को बना या बिगाड़ सकती है। मजबूत मन बाजार के उतार-चढ़ाव, व्यापार में होने वाले बदलाव, नियामक परिवर्तनों, जटिल टीम स्थितियों आदि से बचाता है।

एक स्वस्थ मन ही रचनात्मकता और दीर्घकालिक सफलता को बढ़ावा देता है। डॉ. भानुशाली ने कहा कि चिकित्सकों को भी न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं की तरह नैदानिक उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों से छूट मिलनी चाहिए। इस संबंध में पहले भी कई आवेदन दिए जा चुके हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान मरीजों की चिकित्सा सहायता करते हुए दो हजार से अधिक चिकित्सकों ने अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि चिकित्सक समाज की सेवा में अग्रणी भूमिका का निर्वाह करते हैं।

तनाव प्रबंधन और मानसिक संतुलन से ही मिलेगी असली सफलता

वह उचित कानूनी संरक्षण के पात्र हैं। इंडियन मेडिकल असोसिएशन, तेलंगाना के अध्यक्ष डॉ. पी. किशन ने मन को समझने और प्रबंधित करने के लिए व्यवस्थित मैनुअल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जीवन के हर महत्वपूर्ण पहलू के लिए एक मैनुअल होता है। यदि हम अपने मन की कार्यप्रणाली को बेहतर ढंग से समझेंगे, तभी हम उसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित और प्रबंधित कर पाएँगे।

एफटीसीसीआई के अध्यक्ष आर. रवि कुमार ने कहा कि जीवन तनावों से भरा है। इसे संभालने का तरीका ही व्यक्तित्व और व्यावसायिक सफलता को निर्धारित करता है। उन्होंने कहा कि व्यापार को आगे बढ़ाना और मन पर नियंत्रण रखना दोनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। व्यवसाय हो, परिवार हो या किसी भी संस्था का प्रबंधन, अंततः लोगों के प्रबंधन से जुड़ा है। लोगों का प्रबंधन करने के लिए पहले अपने मन का प्रबंधन करना होता है।

एफटीसीसीआई स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष शेखर अग्रवाल ने कहा कि मन ही हमारे भाग्य का निर्माता और नियंत्रक है। यह हमें भय में जकड़ सकता है या साहस से मुक्त कर सकता है। अन्य विषय विशेषज्ञों तथा वक्ताओं ने मानसिक स्वास्थ्य संकेतकों की शीघ्र पहचान, नेतृत्व की भूमिकाओं में तनाव प्रबंधन, संचार में सुधार और व्यावसायिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के लिए लचीलापन विकसित करने जैसे विषयों पर प्रकाश डाला।

अवसर पर आयोजित सत्रों में इस बात पर जोर दिया गया कि सच्ची व्यावसायिक सफलता न केवल रणनीति और क्रियान्वयन में निहित है, बल्कि भावनात्मक बुद्धिमत्ता, स्पष्ट सोच, तनाव एवं अनिश्चितता का सकारात्मक रूप से सामना करने की क्षमता में भी निहित है। कार्यक्रम में 200 से अधिक उद्यमियों, व्यापारिक नेताओं, स्वास्थ्य पेशेवरों और उद्योग जगत के हितधारकों ने भाग लिया।

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