एआई के लिए ज़रूरी है जिम्मेदार नियमन : वित्त मंत्री
नई दिल्ली, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि तकनीकी नवाचार को जिम्मेदारी से बढ़ावा देने के लिए नियमन की आवश्यकता है, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में, न कि इसे रोकने के लिए। उन्होंने यह बात नीति आयोग द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट ‘विकसित भारत के लिए एआई: तेज आर्थिक विकास का अवसर’ को जारी करते हुए कही।
सीतारमण ने कहा कि सरकार न केवल एआई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में इनका जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करने के लिए भी तत्पर है। उन्होंने कहा कि हम ऐसा नियमन नहीं चाहते जो तकनीक को ही समाप्त कर दे। हम नियमन चाहते हैं क्योंकि हम जिम्मेदार अनुप्रयोग चाहते हैं।
सीतारमण ने कहा कि एआई एक तेजी से विकसित हो रही, रीयल टाइम, और गतिशील चीज है, और इसलिए हम सभी को इस बात के प्रति सजग रहना होगा कि नैतिक पहलुओं पर सुस्ती न बरतें, क्योंकि एआई की अपनी चुनौतियां भी हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि चुनौतियां केवल नौकरियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इन तकनीकों का दुरुपयोग भी समाज पर गंभीर असर डाल सकता है।
एआई से नौकरियों में बदलाव, भारत को दोहरी रणनीति की जरूरत
रिपोर्ट के अनुसार, अनुमानों से पता चलता है कि एआई जहां कई नई भूमिकाएं पैदा करेगा, वहीं यह मौजूदा कई नौकरियों को भी विस्थापित करेगा, खासकर लिपिकीय, नियमित और कम कौशल वाली श्रेणियों में। भारत के लिए यह चुनौती दोहरी होगी एक तरफ नई संभावनाओं को पकड़ने के लिए उन्नत डिजिटल और एआई कौशल वाली कार्यबल तैयार करना, वहीं दूसरी ओर विस्थापित लोगों को पुनः कौशल प्रशिक्षण, पुनर्नियोजन या अर्थव्यवस्था के अन्य विकासशील क्षेत्रों में समायोजित कर लाभकारी रोजगार देना।
रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्पादकता में वृद्धि और नवाचार को बाजार निर्माण के साथ मेल खाना चाहिए ताकि यह आर्थिक विकास में तब्दील हो सके। इसमें यह भी जोड़ा गया है कि भारत को घरेलू मांग को गहराने और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में मजबूत भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता होगी।
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इसके लिए औद्योगिक और व्यापार नीतियों का उस दिशा में संरेखण आवश्यक होगा, विशेषकर जब वैश्विक नियम तेजी से बदल रहे हैं। उदाहरण के लिए, रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोपीय संघ का एआई अधिनियम सामान्य प्रयोजन और उच्च जोखिम वाली एआई प्रणालियों के लिए दायित्वों को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा, और कार्बन सीमा समायोजन जैसे नए जलवायु-सम्बंधी व्यापार उपाय बाजार की पहुंच की स्थितियों को आकार देने वाले हैं। (भाषा)
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