आरओडीटीईपी लाभ निर्यातकों के लिए बढ़ाया गया : 30 सितंबर तक

नयी दिल्ली, सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक व्यापार में उत्पन्न व्यवधानों के मद्देनजर निर्यातकों के लिए आरओडीटीईपी योजना के तहत वित्तीय लाभ को छह महीने के लिए बढ़ाकर 30 सितंबर तक कर दिया है। निर्यातित उत्पादों पर शुल्क एवं कर की छूट (आरओडीटीईपी) योजना वर्ष 2021 में शुरू की गई थी।

इसके तहत निर्यातकों पर वस्तुओं के विनिर्माण एवं वितरण की प्रक्रिया में लगने वाले उन करों, शुल्कों एवं उपकरों को वापस किया जाता है जिनकी भरपाई केंद्र, राज्य या स्थानीय स्तर की किसी अन्य व्यवस्था के तहत नहीं होती।

इस योजना के तहत वापसी 0.3 प्रतिशत से 3.9 प्रतिशत के बीच होती है। यह योजना इस वर्ष 31 मार्च तक मान्य थी। विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने अधिसूचना में कहा, ‘‘ एक अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के दौरान किए जाने वाले पात्र निर्यात को 31 मार्च को लागू दरों एवं मूल्य सीमा के अनुसार आरओडीटीईपी लाभ मिलता रहेगा, बशर्ते योजना की मौजूदा शर्तें लागू हों।’’

निर्यात पर पश्चिम एशिया संकट का असर, बजट आवंटन कम

इस योजना के लिए 2025-26 बजट में 18,232 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। इसे 2026-27 में बढ़ाकर 21,709 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव था लेकिन आवंटित बजट 10,000 करोड़ रुपये रहा। निर्यातक समुदाय पहले अमेरिका के ऊंचे शुल्क से जूझ रहा था और अब पिछले महीने अमेरिका एवं इजराइल के ईरान पर संयुक्त हमले से उत्पन्न पश्चिम एशिया संकट से नई चुनौतियों का सामना कर रहा है।

इस संघर्ष के कारण समुद्री तथा हवाई मालभाड़ा दरें बढ़ गई हैं जबकि बीमा प्रीमियम भी बढ़ रहा है। देश का माल निर्यात फरवरी में सालाना आधार पर 0.81 प्रतिशत घटकर 36.61 अरब डॉलर रह गया जबकि व्यापार घाटा पिछले महीने की तुलना में घटकर 27.1 अरब डॉलर रह गया। पश्चिम एशिया संकट का प्रभाव मार्च के आंकड़ों में दिखाई देगा क्योंकि युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था। ये आंकड़े मई के मध्य तक जारी किए जाएंगे।

सरकार ने निर्यातकों के लिए राहत और मुक्त आयात नीति बढ़ाई

वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य बढ़े हुए मालभाड़ा खर्च और युद्ध से जुड़े व्यापारिक जोखिमों का सामना कर रहे भारतीय निर्यातकों को समय पर सहायता देना है जो खाड़ी एवं व्यापक पश्चिम एशिया समुद्री गलियारे में व्यवधान से उत्पन्न हुए हैं। सरकार ने पिछले सप्ताह निर्यातकों को राहत देने के लिए 487 करोड़ रुपये की ‘रिलीफ’ (निर्यात सुविधा के लिए मजबूती और लॉजिस्टिक पहल) योजना भी शुरू की थी।

डीजीएफटी ने एक अलग अधिसूचना में कहा कि तूर एवं उड़द के ‘मुक्त’ आयात की नीति को एक और वर्ष बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दिया गया है। इसके अलावा पीली मटर के आयात को भी न्यूनतम आयात नीति शर्त एवं बंदरगाह प्रतिबंध के बिना ‘मुक्त’ रखा गया है। बशर्ते कि सभी आयात खेपों के लिए ऑनलाइन आयात निगरानी प्रणाली में पंजीकरण किया गया हो और ‘बिल ऑफ लैडिंग’ (शिप्ड ऑन बोर्ड) 31 मार्च 2027 या उससे पहले जारी किया गया हो।

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‘बिल ऑफ लैडिंग’ एक प्रमुख कानूनी दस्तावेज है जो शिपिंग कंपनी द्वारा माल प्राप्त करने के बाद जारी किया जाता है। अधिसूचना में यह भी कहा गया कि ‘वर्जिन मल्टी-लेयर पेपर बोर्ड’ पर लागत, बीमा एवं मालभाड़ा मूल्य के आधार पर 67,220 रुपये प्रति टन का न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) एक महीने के लिए बढ़ाकर 30 अप्रैल तक कर दिया गया है। (भाषा)

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