टाइप वन डायबिटीज पर आरएसएसडीआई और सनोफी इंडिया का सामाजिक प्रभाव कार्यक्रम

हैदराबाद– रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया (आरएसएसडीआई) और सनोफी इंडिया लिमिटेड (एसआईएल) द्वारा संयुक्त रूप से कहा गया कि टाइप 1 डायबिटीज (टी1डी) पर उनका सामाजिक प्रभाव कार्यक्रम हाइपोग्लाइसीमिया और हाइपरग्लाइसीमिया को कम करने की दिशा में सकारात्मक और सहायक सिद्ध हो रहा है। देशभर में टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित 1,400 से अधिक बच्चों में से इस सामाजिक प्रभाव कार्यक्रम में नामांकित 72 बच्चे तेलंगाना से हैं।
होटल ताज डेकन में आयोजित एक कार्यक्रम में जानकारी देते हुए बताया मधुमेह के लिए भारत के अग्रणी राष्ट्रीय संगठन आरएसएसडीआई और सनोफी इंडिया ने जनवरी 2021 में एक सामाजिक प्रभाव कार्यक्रम तैयार करने के लिए हाथ मिलाया था। जो बच्चों और युवा वयस्कों में समय पर और बेहतर मधुमेह प्रबंधन के लिए एक मानक-देखभाल बनाने में मदद करता है। इस सामाजिक प्रभाव कार्यक्रम के लिए पीपल-टू-पीपल हेल्थ फाउंडेशन को कार्यान्वयन भागीदार के रूप में नियुक्त किया गया था। आरएसएसडीआई तथा एसआईएल ने अपने योगदान द्वारा मानक दिशा-निर्देशों के अनुसार बाल चिकित्सा आबादी और युवा वयस्कों को प्रभावित करने वाली इस ऑटो-इम्यून पुरानी स्थिति के निदान और प्रबंधन की अनुमति देने के लिए एक सार्वभौमिक मानकीकृत देखभाल उपलब्ध कराने मदद की है। यह कार्यक्रम रोगियों, देखभाल करने वालों तथा स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को टी1डी प्रबंधन पर शिक्षा प्रदान करता है। साथ ही इस स्थिति से प्रभावित 1,400 से अधिक वंचित बच्चों को निशुल्क इंसुलिन, सीरिंज, लैंसेट और ग्लूकोज स्टि्रप्स के लिए आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराता है। जानकारी देते हुए बताया गया इस कार्यक्रम ने हाइपोग्लाइसीमिया (प्रति सप्ताह 1 से 4 बार) का अनुभव करने वाले बच्चों की संख्या में 46 प्रतिशत (70 प्रतिशत की तुलना में) तथा हाइपरग्लाइसीमिया (प्रति सप्ताह 1 से 4 बार) का अनुभव करने वाले बच्चों की संख्या में 25 प्रतिशत (52 प्रतिशत की तुलना में) की कमी आई है।
भारत में टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित लोगों और उनके देखभाल करने वालों को मधुमेह प्रबंधन में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसका कारण टी1डी के उपचार और प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित चिकित्सकों, शिक्षकों, पोषण विशेषज्ञों और अन्य सहायक कर्मचारियों के साथ बहुत कम समर्पित केंद्रों का होना है। साथ ही लोगों में इसके प्रति जागरूकता की कमी तथा सामाजिक-आर्थिक कारण भी शामिल हैं। जिसके कारण यह स्वास्थ्य समस्या और जटिल हो जाती है। इस कड़ी में आरएसएसडीआई तथा एसआईएल के सामाजिक प्रभाव कार्यक्रम का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच जागरूकता का प्रसार करना है। ताकि टी1डी का निदान करते हुए प्रभावितों के स्वस्थ जीवन को बहाल करने में मदद की जा सके।
अवसर पर सनोफी इंडिया की वरिष्ठ निदेशक (कॉर्पोरेट संचार और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) अपर्णा थॉमस तथा एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ.बिपिन सेठी सहित अन्य ने कहा हम विभिन्न मंचों पर टाइप 1 डायबिटीज पर चर्चा करके और तेलंगाना में जन-जागरूकता का प्रसार करते हुए प्रभावित लोगों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव लाने का प्रयास करेंगे।
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