सत्तापक्ष फेल, विपक्ष पास : हरीश राव

हैदराबाद, भारास विधायक दल के उप नेता टी. हरीश राव ने मुख्य विपक्षी दल के तौर पर बीआरएस को सक्सेस और सत्तापक्ष के रूप में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी सरकार को विफल करार दिया। मीडिया के साथ औपचारिक बातचीत में टी. हरीश राव ने कहा कि हर विषय पर सरकार पर दबाव बनाने में बीआरएस सफल रही है।

विपक्षी पार्टी के तौर पर जिस विषय पर बोला या बताया गया, उसके बाद सरकार हरकत में आयी। उन्होंने कहा कि शारदा पीठम की भूमि पर सरकार बुल्डोजर चलाने के प्रयास में थी, जब उन्होंने (हरीश राव ने) स्थल का दौरा किया और सरकार को लताड़ा, तो तुरंत मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी हरकत में आए और निर्णय वापस लिया। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष के दबाव डालने पर प्रतिक्रिया दे रही है, वरना प्रशासन चलाने में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पूरी तरह से विफल साबित हो चुके हैं।

प्रशासन चलाने में विफलता का मुख्य कारण आईएएस व आईपीएस अधिकारियों के बार-बार तबादले किया जाना भी है। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के भ्रष्टाचार में कोई अधिकारी सहयोग नहीं देता है, तो तुरंत उसे हटाकर दूसरे अधिकारी को लाकर बैठाया जाता है। उन्होंने कहा कि एक कलेक्टर को कम से कम 2 साल तक एक स्थान पर कार्य करने दिया जाए, तो परिणाम हासिल होते हैं। बार-बार तबादले करने से अधिकारियों के नैतिक बल पर असर पड़ता है।

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रंगारेड्डी जिले में 4 कलेक्टर बदलने से प्रशासन प्रभावित

हरीश राव ने कहा कि 2 साल के शासन में अब तक सरकार ने 140 अधिकारियों के बार-बार तबादले किए हैं, इनमें करीब 20 जिला कलेक्टरों की त्वरित बदली कर दी। उन्होंने कहा कि रंगारेड्डी जिले में अब तक 4 कलेक्टर बदले गए, जबकि एक कलेक्टर को जिले की जानकारी हासिल करने करीब 6 माह लगते हैं। उन्होंने कहा कि रेवंत सरकार में सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) अधिकारियों की सेवाओं को विस्तार दिए जाने से भ्रष्टाचार को जगह मिल रही है और रिटार्यड अधिकारियों की सेवाओं को विस्तार देना आम हो चुका है।

अब तक करीब 1 दर्जन रिटायर्ड आईएएस व आईपीएस अधिकारियों की सेवाओं को विस्तार दिया गया। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग विभाग में रिटायर्ड अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होने के चलते विभाग में भ्रष्टाचार बढ़ा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रशासन को एक जोक बनाकर रख दिया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन में पारदर्शिता का घोर अभाव है। कोर्ट के निर्देशों का पालन तक नहीं किया जा रहा। उन्होंने कहा कि केवल 20 प्रतिशत सरकारी आदेश ही ऑनलाइन उपलब्ध हैं, जबकि शेष 80 प्रतिशत जीओ आफलाइन हैं।

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