तप बिना जीवन का उद्धार संभव नहीं : भाग्यचंद्रविजयजी म.सा.
हैदराबाद, तपस्या वीरों का काम होता है। तपस्या कमजोर लोग नहीं कर पाते। भगवान की वाणी के प्रभाव के साथ मनुष्य के मनोबल से तपस्या होती है। उक्त उद्गार गोशामहल स्थित शंखेश्वर भवन में श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ जैन संघ के तत्वावधान में आयोजित प्रवचन सभा में भाग्यचंद्रविजयजी म.सा. ने व्यक्त किये। पूज्यश्री ने कहा कि तपस्या का जैन धर्म में विशेष महत्व होता है। तप को कर्मों की निर्जरा के लिए आवश्यक है।
तप बिना जीवन का उद्धार संभव नहीं। म.सा. ने कहा कि कर्मों को काटने का मुख्य रास्ता तपस्या होती है। जैसे दीपावली आते ही महिलाएँ घर की साफ सफाई करती हैं, वैसे ही आज का दिन तपस्या का है। आयंबिल से बहुत सारी समस्याओं का समाधान निकलता है। तप करने वाला मानव अपने जीवन को चमका सकता है। जीवन को सुंदर बनाना है, तो तप के माध्यम से ही बनाया जा सकता है। जो मनुष्य स्वाद को बस में कर लेता है, वही आयंबिल और तपस्या कर सकता है।
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जीभ के अनुसार चलने वाला कभी तप नहीं कर सकता। तपस्या के लिए स्वाद पर नियंत्रण जरूरी है। जब तक स्वाद जीवन से नहीं निकलेगा, तब तक तप तपस्या करना संभव नहीं। स्वाद जीतने वाला महान होता है। जीभ के प्रति कमजोर व्यक्ति कभी तपस्या नहीं कर सकता। यह दिवस कर्म काटने का दिन है। तपस्या ही जीवन को बदल सकती है। तपस्या से मानव जीवन सुधर सकता है। प्रचार संयोजक जसराज देवड़ा धोका ने बताया कि आज प्रवचन में प्रभावना नरसिगंमल वागमल कंकू चोपड़ा की ओर से दी गई।
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