स्वागत में बसंत के

स्वागत में बसंत के प्रकृति ने की है मनोरम तैयारी

आ गई ऋतु राज बसंत की ‘आनंद’ खुशनुमा सवारी

फिज़ाओं में घुली खुशबू कुसुमों के पल्लव पराग की

खिल गई बागों में नूतन नन्हीं कलियों की क्यारी

चहक रही है चिड़िया और पंछी कर रहे मधुरम गान

झूम रही हैं लताएं खुशी से छेड़ सप्त स्वरों की तान

बाँह खोल खड़ी हैं दिशाएं छटा बिखरी अनुराग की

खिले सुनहरे रंग में जगमग सारे-खलिहान ।

बह रही तन-मन को आनंदित सुगंधित बयार

तितलियाँ कर रही गुणगान भँवरे कर रहे गुंजार

संचार हुआ नवचेतना का घड़ी आई अवसाद त्याग की

फैला दशों-दिशाओं से धरा पर अनन्य प्रेम अपार ।

बसंत के आने से स्पंदित हुआ जीवन ढेरों खुशियाँ छायीं,

सूरज ने ऊर्जा भरी प्राणियों में सुनहरी किरणें मुस्कुराईं,

श्वासों में बढ़ा सुख सुंदर व चमकी चेतना भू-भाग की


मोनिका डागा आनंद

मोह कर सभी को बसंत ने की अंतस में रोशनाई।

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