भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए खोजबीन जारी

पार्टी विद डिफरेंस का दावा करने वाली भाजपा इस समय एक अजीब से उधेड़बुन का शिकार हो रही है। यहां हम बात कर रहे हैं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन का। यह निर्वाचन अब बीरबल की खिचड़ी बन गया है। कोई न कोई बहाना बताकर इसे लगातार आगे से आगे खिसकाया जा रहा है। दस करोड़ सदस्यों वाली पार्टी के पास वर्तमान में 335 से अधिक सांसद, 1400 विधायक तथा 16 राज्यों में खुद के बुते अथवा सहयोगियों के साथ सरकार हैं।

इसके बावजूद एक अदद अध्यक्ष की तलाश पूरी नहीं हो रही है। राज्यों में भी तदर्थ अध्यक्ष पार्टी चला रहे हैं। पार्टी का संगठनात्मक ढांचा डांवाडोल की स्थिति में है। वर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल जनवरी 2023 में खत्म हो चुका है। इसके बाद लगातार नये अध्यक्ष की खोज की जा रही है मगर यह खोज ढाई साल बाद भी ख़त्म नहीं हुई है। एक व्यक्ति, एक पद का सिद्धांत भाजपा में लागू होता है। मगर दो पदों पर काम कर रहे वर्तमान अध्यक्ष को इससे छूट दे रखी है।

भाजपा अध्यक्ष पद के लिए रणनीति और अटकलें

लोग तरह तरह की टीका-टिप्पणियां कर रहे हैं। कुछ लोग इसे भाजपा संघ के मध्य मन-मुटाव से भी जोड़कर देख रहे हैं। बताया जा रहा है संघ ने शीर्ष नेतृत्व को अपने रूख से अवगत करा दिया है, अब फैसला पार्टी को करना है कि वह संघ के बताये रास्ते पर चलेगी अथवा अपना स्वतंत्र मार्ग अख्तियार करेगी। संघ के विश्वसनीय सूत्र बता रहे हैं वह आगामी लोकसभा चुनावों की रणनीति पर काम कर रही है जिसमें अध्यक्ष के साथ प्रधान मंत्री पद का फैसला अहम बन गया है। इसी बीच एक बार फिर भाजपा के सूत्र कह रहे हैं पार्टी के नए अध्यक्ष का चुनाव जून माह में हो सकता है।

बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने इस चुनाव को लेकर तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी अध्यक्ष का यह चुनाव जून के तीसरे सप्ताह में हो सकता है। भाजपा और संघ के जानकारों का कहना है मोदी के मन की थाह लगाना मुश्किल है। भाजपा में कई फैसले ऐसे लिए गए हैं जो बेहद चौंकाने वाले थे। खट्टर से लेकर भजन लाल तक के नाम इसमें शुमार किये जा सकते है, जिनकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।

मोदी को ऐसा अध्यक्ष चाहिए जो उनका विश्वस्त तो हो ही साथ में उसमें अगला चुनाव जिताने की भरपूर क्षमता और सम्भावना हो। बिहार और बंगाल सहित अनेक विधान सभाओं के चुनाव नये अध्यक्ष के कार्यकाल में संपन्न होंगे इसीलिए फूंक-फूंक कर कदम उठाये जा रहे हैं। दक्षिण भारत और उत्तर भारत की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं। अनेक बड़े और दमदार नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं, जो पार्टी के इस महत्वपूर्ण पद के लिए दावेदार हैं।

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भाजपा अध्यक्ष पद के लिए नए चेहरे की तलाश

इसी बीच मीडिया में प्रमुखता से एक दर्ज़न नामों की चर्चा सुनी जा रही है। इनमें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, शिवराज सिंह चौहान, धर्मेंद्र प्रधान, देवेंद्र फडणवीस, मनोहर लाल खट्टर, समृति ईरानी, रघुवर दास सहित जी किशन रेड्डी, बंडी संजय कुमार और प्रह्लाद जोशी, राम माधव और संजय जोशी के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे है। रोज कुछ नाम इस सूची में कुछ नाम जुड़ रहे है। किसी महिला को राष्ट्रीय अध्यक्ष का दारोमदार सौंपने की चर्चाएं भी है।

संघ के पसंद-नापसंद की चर्चाएं भी छाई हुई है। निवर्तमान अध्यक्ष नड्डा, मोदी और शाह के विश्वसनीय है। खुद का कोई विशेष जनाधार नहीं है। अपने गृह राज्य हिमाचल के विधान सभा चुनाव में वह पार्टी को विजयश्री नहीं दिला पाए। वहीं यह कहने वालों की कमी भी नहीं है कि मोदी, पार्टी और देश को एक बार फिर चौंका सकते है। भाजपा के लिए नया अध्यक्ष बेहद महत्वपूर्ण होगा।

-बाल मुकुन्द ओझा
-बाल मुकुन्द ओझा

प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी ने जो रणनीतियां बनाई हैं, उनके साथ नए अध्यक्ष को तालमेल बैठाना होगा। उसे पार्टी के संगठन को नई दिशा देने के साथ-साथ युवाओं को जोड़ने और आगामी चुनावों की तैयारियों में सािढय भूमिका के साथ एनडीए के साथी संगठनों से बेहतर समन्वय स्थापित करना होगा। इसलिए पार्टी को एक ऐसे चेहरे की तलाश है जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से जुड़ा हो और संगठनात्मक दृष्टि से मजबूत हो। साथ ही मोदी और शाह के भरोसे का हो। अब देखना यह है कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह आखिर किसे इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी सौंपते हैं और कब भाजपा को नया अध्यक्ष मिलता है।

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