ड्रापआउट विद्यार्थियों को दोबारा शिक्षा से जोड़ रहा है शाहीन ग्रुप
हैदराबाद, देश भर में शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय शाहीन ग्रुप के चेयरमैन डॉ. अब्दुल कादिर ने कहा कि तेलंगाना कर्नाटक और आध्र प्रदेश में संस्था उन बच्चों के लिए भी काम कर रही है, जिन्होंने अपनी शिक्षा आर्थिक परिस्थितियों के कारण अपनी शिक्षा स्कूल में ही अधूरी छोड़ दी है।
डॉ. अब्दुल क़ादिर ने आज मीडिया प्लस में आयोजित कार्यक्रम में शाहीन ग्रूप की विभिन्न संस्थाओं में अच्छा प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि केवल डॉक्टर या इंजीनियर होना ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि अच्छा इनसान बनने को प्राथमिकता देनी चाहिए।
डॉ. अब्दुल कादिर ने दी नैतिक शिक्षा पर जोर
उच्च शिक्षा के साथ-साथ उच्च नैतिकता, उच्च चरित्र और धार्मिक सहिष्णुता भी आवश्यक है। सांप्रदायिक एकता और भाईचारा समय की मांग है। इसके बिना न तो कोई राष्ट्र और न ही कोई देश विकसित हो सकता है।
डॉ. कादिर ने बताया कि शाहीन इंस्टीच्यूट हिंदू-मुस्लिम एकता का आदर्श केंद्र बन गया है, जहां से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास कर मेरिट के आधार पर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीट पाने वाले हिंदू और मुस्लिम छात्रों की संख्या बराबर है। यही कारण है कि कर्नाटक सरकार ने राज्य का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार राजीव उत्सव पुरस्कार शाहीन समूह को दिया है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन के प्रभाव के कारण नई पीढ़ी विनाश के कगार पर पहुंच गई है। एलकेजी से लेकर मैट्रिक तक अधिकांश शिक्षण संस्थान नई पीढ़ी को गलत संस्कृति से भ्रमित कर उनका भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। इन परिस्थितियों से बाहर निकालकर विद्यार्थियों को अच्छा माहौल देने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि शाहीन संस्थानों में 35,000 छात्र और छात्राएं अध्ययन कर रहे हैं। तेलंगाना में संस्थाओं ने असाधारण सफलता हासिल की। करीमनगर और निजामाबाद शाखाओं के छात्र और छात्राएं राज्य केसर्वेत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों में शामिल हैं। समारोह में निदेशक अब्दुल समद और अनिल पटेल एवं अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।
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