शी मार्ट : महिला सशक्तिकरण की तरफ एक कदम

जब भी किसी बाज़ार की बात होती है, हमारी आंखों के सामने बड़ी दुकानों, चमकदार ब्रांडों और भारी पूंजी की तस्वीर उभरती है। लेकिन अब इसी तस्वीर को बदलने एक नया नाम सामने आया है शी मार्ट। यह कोई सामान्य दुकान या मॉल नहीं, बल्कि महिलाओं की मेहनत, हुनर और आत्मसम्मान से सजा हुआ बाज़ार है। शी मार्ट दरअसल, एक ऐसा विशेष मंच है जहां केवल महिलाएं अपने बनाए उत्पादों और सेवाओं को बेचती हैं और अपने दम पर अपनी पहचान बनाती हैं।

शी मार्ट का अर्थ केवल ‘महिलाओं का बाज़ार’ नहीं है, बल्कि यह उस सोच का नाम है जो – कहती है कि स्त्री केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि सशक्त उत्पादक भी है। यहां बिकने वाली हर वस्तु चाहे वह हथकरघा का कपड़ा हो या हस्तशिल्प का सामान, घर में बना अचार-पापड़, जैविक खाद्य-पदार्थ, देसी – सौंदर्य उत्पाद या सजावटी वस्तुएँ, किसी-न-किसी महिला की कहानी कहती है। यह कहानी संघर्ष की है, आत्मनिर्भर बनने की है और अपने पैरों पर खड़े होने की है। शी मार्ट कई रूपों में मौजूद है।

डिजिटल युग में घर बैठे कारोबार का मौका

कई शहरों में शी मार्ट स्थायी दुकानों या हाट के रूप में मिल जाता है, तो कई जगह यह विशेष मेलों, प्रदर्शनियों और महिला बाज़ारों के रूप में आयोजित किया जाता है। इसके अलावा, डिजिटल युग में शी मार्ट ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के रूप में भी उपलब्ध है, जहां महिलाएँ अपने उत्पादों को इंटरनेट के माध्यम से देशभर के ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं। यानी अब इस बाज़ार तक पहुंचने के लिए किसी बड़े शहर में होना ज़रूरी नहीं, एक मोबाइल और थोड़े से आत्मविश्वास से भी रास्ता खुल जाता है।

सरकारी और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से कई राज्यों में शी मार्ट की अवधारणा को बढ़ावा दिया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमियों और स्टार्टअप्स को इस मंच से जोड़ा जा रहा है, ताकि उन्हें सीधा बाज़ार मिले और बिचौलियों पर निर्भरता कम हो। कई नगरपालिकाओं, औद्योगिक संगठनों और महिला आयोगों द्वारा भी शी मार्ट जैसे बाज़ारों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे स्थानीय महिलाओं को अपने ही शहर में पहचान मिल सके। शी मार्ट का सबसे बड़ा प्रभाव यह है कि यह महिलाओं के मन से डर निकाल देता है।

‘शी मार्ट’ से महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर

जो महिलाएँ कभी सोचती थीं कि ‘बाज़ार हमारे लिए नहीं है’, वही आज ग्राहक से बात कर रही हैं, दाम तय कर रही हैं और अपने भविष्य की योजना बना रही हैं। इस मंच से जुड़कर महिलाएँ केवल विक्रेता नहीं बनतीं, वे सीखती हैं कि कैसे अपने उत्पाद को बेहतर बनाया जाए, कैसे पैकेजिंग और प्रस्तुति की जाए और कैसे ग्राहकों का भरोसा जीता जाए। धीरे-धीरे यह बाज़ार उन्हें उद्यमी बना देता है। यही वजह है कि शी मार्ट को एक दुकान नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण का जीवंत उदाहरण कहा जा सकता है।

डॉ. अनुराधा जाजू

आज ज़रूरत है कि हम केवल इस बारे में पढ़ें ही नहीं, बल्कि इसका हिस्सा भी बनें। जब भी मौका मिले, शी मार्ट से खरीदारी करें, स्थानीय महिला महिला बाज़ारों बाज़ारों का समर्थन करें और महिलाओं के बनाए उत्पादों को प्राथमिकता दें। शी मार्ट हमें यह याद दिलाता है कि असली विकास वही है जिसमें आधी आबादी बराबरी से आगे बढ़े। यह बाज़ार नहीं, एक संदेश है कि अगर स्त्री को मंच मिल जाए, तो वह केवल अपना नहीं, पूरे समाज का भविष्य बदल सकती है।

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