जीव से शिव बनाते हैं गुरु : सद्गुरु रमेशजी
हैदराबाद, ‘ज्ञानं काले पचयति’। गुरु का ज्ञान, सानिध्य, सत्संग और कृपा समय आने पर आत्मसात होते हैं। उक्त उद्गार सद्गुरु रमेशजी ने शिवरात्रि की पूर्व संध्या पर देश-विदेश से आए साधकों के लिए आयोजित विशेष आध्यात्मिक चर्चा में पूर्णानंद केंद्र जनवाड़ा में अभिव्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार समय आने पर फल पक जाते हैं उसी प्रकार गुरु का ज्ञान भी यदि हम दैनिक व्यवहार में उतरते जाते हैं तो हमें हर परिस्थिति में दिशा देता है।
संसार में धन कमाने के साथ-साथ हमें समय भी अर्जित करना चाहिए। समय अर्जित करने का मतलब है कि हम किसी भी आत्मज्ञानी गुरु, संत या भगवान को समर्पित रहकर कार्य करें और जो भी समय हमारे पास है उसका सदुपयोग अपने कल्याण के लिए करें। कभी-कभी अज्ञानता वश हम अपनी तर्क शक्ति और बुद्धि का उपयोग दूसरों को दिशा देने के लिए करते हैं जबकि वास्तव में हमें ही दिशा की जरूरत होती है।
गुरु संग सत्संग से जीव से शिव की ओर कदम
जब हम किसी गुरु को समर्पित हो जाते हैं तो हमारी दशा और दिशा दोनों बेहतर होने लगती है। सद्गुरु ने आगे कहा कि जीव से शिव की यात्रा ही मानव जीवन का एकमात्र लक्ष्य है लेकिन बिना गुरु के सानिध्य और सत्संग के केवल पुरुषार्थ के बल पर यह यात्रा संभव नहीं है। यथार्थ यह है कि प्रत्येक जीव ही शिव है लेकिन इसकी अनुभूति हमें इसलिए नहीं हो पाती है क्योंकि जन्म-जन्मांतरों के संस्कारों के आवरण के कारण हम अपने शिव स्वरूप को पहचान नहीं पाते हैं।
गुरु केवल हमारे अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या, दुश्मनी, नकारात्मकता के शिवरात्रि की पूर्व संध्या पर पूर्णानंद केंद्र जनवाड़ा में आयोजित विशेष आध्यात्मिक चर्चा में साधकों को सम्बोधित करते सद्गुरु रमेशजी। साथ में गुरु माँ। आवरण हटाते हैं और सहज रूप से हम कब जीव से शिव भाव में स्थित हो जाते हैं, इसका हमें भी आभास नहीं हो पाता है।
अवसर पर गुरु माँ ने वेलेंटाइन डे का सार बताते हुए कहा कि हमें सब जड़-चेतन से निस्वार्थ प्रेम करना चाहिए क्योंकि प्रेम जगत का सार है। और प्रेम का अर्थ है पैंपर करना, प्रशंसा करना, गलतियों को बिना जताए क्षमा करना, किसी की सहायता करके एहसान का भाव न रखना, आभार प्रकट करना, हर व्यक्ति और परिस्थिति को परमात्मा का प्रसाद समझकर स्वीकार करना। शिवरात्रि जीव से शिव की यात्रा प्रारंभ करने का सर्वश्रेष्ठ अवसर है। यदि आप इस मार्ग पर हैं तो इस दिन गुरु का सानिध्य, सत्संग और दर्शन प्राप्त करके आप बहुत तेज गति से अपने शिव स्वरूप में स्थित हो सकते हैं।
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