जारी रहनी चाहिए प्राचीन नालंदा तथा बोधगया की विरासत : डॉ. विनीता सहाय

बिहार के नैरेटिव को बदलने में योगदान दे रहा है आईआईएम बोधगया

शिक्षा लोगों की सोच और नजरिया बदलने का प्राथमिक माध्यम है। शिक्षा ही संस्कृति तथा सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाते हुए, किसी भी समाज या स्थान की छवि को सुधारने का सशक्त जरिया है। इसी कड़ी में बिहार की छवि को बदलने में शिक्षा परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में उभरी है, जिसके चलते ऐतिहासिक रूप से नालंदा तथा बोधगया आदि स्थानों के लिए विश्वभर में प्रसिद्धि रखने वाला बिहार अपने अतीत तथा वर्तमान चुनौतियों को पार करके एक नई पहचान बनाने की ओर अग्रसर है।

इसमें विभिन्न सरकारी योजनाओं तथा नीतियों आदि के साथ यहां स्थापित उच्च शिक्षण संस्थानों की भी अहम भूमिका है। इन्हीं में एक नाम भारतीय प्रबंध संस्थान बोधगया (आईआईएम बोधगया) का भी है, जो बड़ी संख्या में देश-विदेश से छात्रों को आकर्षित करते हुए, बिहार के नैरेटिव को बदलने में अहम भूमिका का निर्वाह कर रहा है। हाल ही में पीआईबी हैदराबाद के तत्वावधान में पटना प्रेस टूर पर गए तेलंगाना पत्रकार प्रतिनिधिमंडल को आईआईएम बोधगया का भ्रमण करने का अवसर मिला।

2018 से 2025 तक छात्रों की संख्या बढ़ी 38 से 1,600 तक

भारतीय प्रबंध संस्थान बोधगया की निदेशक डॉ. विनीता एस.सहाय ने बातचीत के दौरान कहा कि प्राचीन समय में हमारे गौरव का प्रतीक रहे नालंदा तथा बोधगया की विरासत पीढ़ी-दर-पीढ़ी सतत रूप से जारी रहनी चाहिए। इस परिप्रेक्ष्य में आईआईएम बोधगया अपना योगदान देते हुए छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए बिहार का रुख करने हेतु प्रोत्साहित कर रहा है। यही कारण है कि यहां मिनी भारत की छवि देखी जा सकती है। पाली भाषा का वाक्य सब्बे भद्राणि पश्यन्तु (सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें) इस संस्थान का आदर्श वाक्य है।

यही सांस्कृतिक भावना आईआईएम बोधगया के शैक्षिक पाठ्पाम को बढ़ावा देती है, जिससे सामाजिक रूप से उत्तरदायी प्रबंधकों और भावनात्मक रूप से परिपक्व युवा पीढ़ी तैयार की जा रही है। आईआईएम बोधगया की विकास-यात्रा को साझा करते हुए, डॉ.विनीता सहाय ने कहा कि यहां छात्रों की संख्या 2018 में 38 से 2025 में बढ़कर 1,600 हो गई है। यहां संचालित पाठ्यक्रमों के संबंध में उन्होंने कहा कि मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (एमबीए), डिजिटल बिजनेस मैनेजमेंट (डीबीए), अस्पताल और स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन, प्रबंधन में पीएचडी कार्पाम तथा एकीकृत प्रबंधन कार्पाम के साथ इस संस्थान का एक अनूठा पाठ्पाम लोक-नीति और सुशासन में स्नातकोत्तर प्रमाण-पत्र है।

तीन सप्ताह प्रशिक्षण और दो वर्ष व्यावहारिक शासन अनुभव

यह कार्यक्रम बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग तथा आईआईएम बोधगया के बीच एक सहयोगात्मक पहल हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य बिहार के प्रतिभाशाली युवा पेशेवरों को प्रशिक्षित करते हुए शासन, नीति-निर्माण और कार्यान्वयन में सक्रिय योगदान दे सकें, जिससे प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि के साथ-साथ बिहार में विकास की गति तेज हो सके। आईआईएम बोधगया में तीन सप्ताह का प्रारंभिक प्रशिक्षण और उसके बाद प्रमुख प्रशासनिक कार्यालयों में तैनाती के माध्यम से दो वर्षों का व्यावहारिक शासन अनुभव शामिल है।

डॉ. विनीता ने कहा कि यहां शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ खेलों को भी विशेष रूप से प्राथमिकता दी जाती है, क्योंकि खेल ही प्रबंधन की नीति को सीखने का प्रभावी माध्यम हैं। अंतरराष्ट्रीय अनुभव और सांस्कृतिक विविधता लाने के लिए संस्थान ने विश्व के कई प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ सहयोग स्थापित किया है। आईआईएम बोधगया ने अपने कुछ बुनियादी मूल्य भी स्थापित किए हैं, जिनमें माइंडफुलनेस, नेतृत्व, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा स्थायी भविष्य हेतु स्थिरता एवं सचेतन आदि शामिल है।

बिहार-नालंदा की शैक्षिक विरासत और सतत प्रगति का लक्ष्य

इन मूल्यों के माध्यम से हमारा उद्देश्य स्पष्टता, करुणा और विचारशील क्रिया को बढ़ावा देना, प्रामाणिकता, सत्यनिष्ठा और पारदर्शिता के साथ नेतृत्व, नैतिक मानकों का पालन तथा सामुदायिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के साथ-साथ सामाजिक समानता और पर्यावरण संरक्षण आदि के लिए युवाओं को संवेदनशील बनाना है। परिसर के हृदय-स्थल पर स्थापित विशाल नंदी प्रतिमा का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि यह हमारे बुनियादी मूल्य सचेतन का प्रतीक है, जो आज के वैश्विक परिवेश में नेतृत्व से नितांत अपेक्षित है।

-श्रद्धा विजयलक्ष्मी

डॉ. विनीता ने कहा कि कुल मिलाकर बिहार में नैरेटिव परिवर्तन की आवश्यकता है। इस दिशा में हमारा लक्ष्य शिक्षा को विश्व परिवर्तन के साधन के रूप में उपयोग करते हुए, सतत प्रगति में योगदान देना है। अंतत: यह संस्थान बिहार-नालंदा की वह धरा है, जहां विश्वभर से विद्वानों ने आकर ज्ञान प्राप्ति किया था। समृद्ध शैक्षिक परंपरा, विरासत और इतिहास की धरोहर वाली इस धरा के अमूल्य गौरव को पुनर्स्थापित करने और उसे बनाए रखने का उत्तरदायित्व हम सब पर है।

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