स्मिता सभरवाल ने उठाई समानता की बात
हैदराबाद, भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की वरिष्ठ अधिकारी स्मिता सभरवाल ने शनिवार को कहा कि उन्होंने हैदराबाद विश्वविद्यालय (यूओएच) के नजदीक 400 एकड़ भूमि की एआई-जनित तस्वीर को सोशल मीडिया पर फिर से साझा करने पर उन्हें जारी किए गए नोटिस पर पुलिस को एक विस्तृत बयान दिया है। उन्होंने सवाल किया कि क्या पोस्ट को फिर से साझा करने वाले 2,000 लोगों को भी नोटिस जारी किए गए हैं। सभरवाल को गवाह के रूप में नोटिस दिया गया था। तेलंगाना सरकार के प्रधान सचिव (युवा मामले, पर्यटन और संस्कृति) सभरवाल ने कहा कि यदि ऐसी ही कार्रवाई नहीं की जाती है, तो इससे चुनिंदा तरीके से निशाना बनाने की चिंता पैदा होती है। उन्होंने कहा कि इससे कानून के समक्ष नैसर्गिक न्याय और समानता के सिद्धांतों का उल्लंघन होता है।
सभरवाल ने एक्स पर जारी एक पोस्ट में कहा कि मैंने गाच्चीबावली पुलिस अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग किया है और आज कानून का पालन करने वाले नागरिक के रूप में बीएनएसएस अधिनियम के तहत अपना विस्तृत बयान दिया। इस पोस्ट को इस मंच पर 2000 व्यक्तियों द्वारा पुनः साझा किया गया। मैने इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा कि क्या सभी के लिए समान कार्रवाई शुरू की गई है।
आईएएस स्मिता सभरवाल को गवाह के रूप में मिला नोटिस
साइबराबाद पुलिस ने उक्त भूखंड के संबंध में भ्रामक सामग्री बनाने और सोशल मीडिया मंचों पर प्रसारित करने के मामले से जुड़ी जानकारी के वास्ते वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को नोटिस जारी किया था, क्योंकि उन्होंने भी एआई जनित तस्वीर साझा की थी। तेलंगाना सरकार इस 400 एकड़ भूमि पर आईटी अवसंरचना व अन्य विकास की योजना क्रियान्वित करना चाहती है। हैदराबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ, पेड़ों की कटाई और वन्यजीवों के लिए कथित खतरे को लेकर इसका विरोध कर रहा है। इस मामले की सुनवाई उच्चतम न्यायालय में भी हो रही है। सभरवाल ने 31 मार्च को एक तस्वीर साझा की, जिसमें मिट्टी खोदने वाली मशीनें, दो हिरण और एक मोर दिखाई दे रहे हैं। इस तस्वीर को मूल रूप से एक्स नामक एक अन्य सोशल मीडिया हैंडल द्वारा साझा किया गया था। एक पुलिस अधिकारी ने 16 अप्रैल को बताया था कि आईएएस अधिकारी को 12 अप्रैल को बीएनएसएस की धारा 179 के तहत नोटिस जारी किया गया था। यह एक गवाह के तौर पर कुछ जानकारी हासिल करने के लिए नोटिस है। पुलिस ने बताया कि सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें पोस्ट करने के मामले में पहले भी मामला दर्ज किया गया था। इस संबंध में यह पता लगाने के लिए नोटिस जारी किया गया कि आखिर उन्होंने क्या पोस्ट किया और उन्हें ये तस्वीरें कहाँ से मिलीं। पुलिस ने शिकायतें मिलने के बाद सोशल मीडिया मंच पर भ्रामक सामग्री तैयार कर पोस्ट करने और प्रसारित करने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सामग्री का उद्देश्य दुर्भावनापूर्ण तरीके से अशांति पैदा करना और छात्र समुदाय और आंदोलनकारी समूहों को भूमि से संबंधित उक्त तस्वीरों और वीडियो के जरिये लोक शांति भंग करने के लिए उकसाना था।
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