अघाड़ी से सपा का संबंध विच्छेद!

हैदराबाद, समाजवादी पार्टी (सपा) का महाराष्ट्र में महा विकास अघाड़ी (एमवीए) से अलग होने का फैसला राज्य की राजनीति में अहम मोड़ साबित हो सकता है। यह निर्णय बाबरी मस्जिद विध्वंस के मुद्दे पर उठे विवाद के बाद आया है, जिसमें सपा ने एमवीए के घटक दलों को अस्वीकार्य बताया है।
एमवीए गठबंधन में शिवसेना (यूबीटी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी)
सपा के इस फैसले के पीछे के कारणों को समझने के लिए, राज्य की राजनीतिक गतिविधियों और सपा की राजनीतिक रणनीति को गहराई से देखना होगा। महाराष्ट्र में राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि राज्य में विभिन्न दलों के बीच गठबंधन और समझौते होते रहते हैं। एमवीए गठबंधन में शिवसेना (यूबीटी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और कांग्रेस शामिल हैं। सपा के इस गठबंधन से अलग होने के फैसले से यह स्पष्ट है कि पार्टी अपनी राजनीतिक रणनीति में बदलाव लाना चाहती है।
दरअसल, सपा ने अपने मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए यह रास्ता चुना है, क्योंकि महा विकास अघाड़ी में उसे अपनी पहचान खोने का डर सता रहा था। सपा के नेता अखिलेश यादव ने पहले भी अपनी पार्टी की राजनीतिक रणनीति में बदलाव लाने की बात कही है। बाबरी मस्जिद विध्वंस पर उद्धव ठाकरे के एक करीबी सहयोगी की विवादास्पद टिप्पणी ने उन्हें इसके लिए सटीक बहाना मुहैया करा दिया। हुआ कुछ यों कि बाबरी मस्जिद विध्वंस की 32वीं बरसी पर शिवसेना (यूबीटी) के नेता मिलिंद नार्वेकर ने मस्जिद की एक तस्वीर पोस्ट की। साथ में शिवसेना संरक्षक बाला साहेब ठाकरे का यह कथन भी उद्धृत किया कि मुझे उन लोगों पर गर्व है, जिन्होंने ऐसा किया। नार्वेकर की पोस्ट में उद्धव ठाकरे, आदित्य ठाकरे और खुद उनकी तस्वीरें भी थीं। इससे सपा का भड़कना और बिदकना कतई अस्वाभाविक नहीं है।
इसलिए सपा के महाराष्ट्र अध्यक्ष अबू आजमी ने नार्वेकर की पोस्ट को गठबंधन के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के विपरीत बताया और पार्टी ने तुरंत अपने लक्ष्य वोट बैंक को ध्यान में रखते हुए, महा विकास अघाड़ी से नाता तोड़ने की घोषणा कर दी। अचरज नहीं होना चाहिए अगर पार्टी अपने इस बलिदान को सोशल मीडिया के माध्यम से अपने मतदाताओं को आकर्षित करने और अपनी राजनीतिक रणनीति को चमकाने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में उपयोग करती दिखाई दे।
कहना न होगा कि सपा के इस कदम से एमवीए गठबंधन को ज़ोर का झटका लगा है। इस फैसले के कई अहम नतीजे हो सकते हैं। सबसे पहले, यह एमवीए गठबंधन की एकता को कमजोर कर सकता है, जो पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। दूसरा, यह सपा के लिए नई राजनीतिक रणनीति की शुरूआत का आधार बन सकता है, जिसमें वह मुस्लिम मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार दिख सकती है।
लेकिन चूँकि राजनीति के गणित में दो और दो सदा चार नहीं होते, इसलिए असंभव नहीं कि यह फैसला सपा के लिए जोखिमभरा भी साबित हो! महाराष्ट्र में उसका आधार बहुत मजबूत नहीं है, और इस फैसले से वह अपने समर्थकों को खो सकती है। इसके अलावा, यह फैसला सपा के राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जिसे पहले से ही कई राज्यों में अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है।
अंतत त्वरित तलाक का सपा का यह फैसला एमवीए के वैचारिक और रणनीतिक संकट का संकेत है। एमवीए की धर्मनिरपेक्ष छवि को चोट पहुँचाने वाले इस कांड ने, सीधे-सीधे इंडिया गठबंधन की एकता के किले में पलीता लगाने का काम किया है।

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



