हैदराबाद में विश्व स्ट्रोक दिवस पर लॉन्च हुआ अत्याधुनिक रिकवरी लैब
हैदराबाद, विश्व स्ट्रोक दिवस के अवसर पर एचसीएएच सुवितास रिहैबिलिटेशन सेंटर, हैदराबाद ने “सेंटर फॉर एडवांस्ड रोबोटिक्स एंड रिकवरी” का शुभारंभ किया। यह केंद्र एचसीएएच के उस मिशन का प्रतीक है, जिसके तहत रोबोटिक्स, एआई और विज्ञान, डेटा तथा मानव सेवा के संयोजन के माध्यम से भारत में सबसे तेज रिकवरी प्रदान की जा सके।
एआई और रोबोटिक्स से तेज़ रिकवरी की दिशा में अग्रसर एचसीएएच
तेलंगाना में स्ट्रोक के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिसमें अब 18 से 45 वर्ष की आयु के लगभग 20–30% शहरी मरीज शामिल हैं। निष्क्रिय जीवनशैली, तनाव, मोटापा और कोविड के बाद की जटिलताएँ इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। राज्य में विशेष पुनर्वास सेवाओं की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए, एचसीएएच रिकवरी की परिभाषा को फिर से गढ़ रहा है इसे मापने योग्य, डेटा-आधारित और रोगी-केंद्रित बना रहा है।
भारत में वर्तमान में 1.46 अरब की जनसंख्या के लिए केवल 1,251 स्ट्रोक रिहैबिलिटेशन सेंटर हैं, यानी प्रत्येक 11.7 लाख लोगों पर एक केंद्र। यह गंभीर कमी टेक्नोलॉजी-आधारित पुनर्वास की आवश्यकता को रेखांकित करती है। एचसीएएच इस अंतर को भरने के लिए तेलंगाना से शुरुआत करते हुए दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, मुंबई और कोलकाता तक अपने रोबोटिक्स एंड रिकवरी लैब का विस्तार कर रहा है।
हैदराबाद केंद्र में रिकवरी और तकनीक का संगम है। यहाँ विश्वस्तरीय रोबोटिक सिस्टम्स मौजूद हैं जो सुरक्षा, सटीकता और गति के साथ रोगियों को बेहतर रिकवरी में मदद करते हैं। इसमें रोबोटिक गेट ट्रेनिंग सिस्टम, रोबोटिक आर्म और हैंड रिहैब यूनिट्स, न्यूरोमस्क्युलर इलेक्ट्रिकल स्टिमुलेशन (NMES), गेमिफाइड बैलेंस बोर्ड्स और वर्चुअल रियलिटी (VR) न्यूरोथेरेपी जैसी तकनीकें शामिल हैं जो मरीजों को चलने, बोलने और संतुलन वापस पाने में मदद करती हैं।

भारत में रिकवरी की नई परिभाषा
अब मरीज एक्सोस्केलेटन-असिस्टेड गेट सिस्टम्स की मदद से केवल 30 मिनट में 1,000 नियंत्रित कदम उठा सकते हैं। “गेटर” नामक यह मेड इन इंडिया रोबोटिक गेट ट्रेनर भारत की उभरती मेडटेक क्षमता को दर्शाता है। आर्म और हैंड रिकवरी के लिए रोबोटिक असिस्टेड थेरेपी हर मूवमेंट को मापती है, जिससे मरीज की प्रगति को ट्रैक किया जा सकता है। NMES डिवाइस मरीजों की बोलने और निगलने की क्षमता को मजबूत करते हैं, जबकि VR और गेमिफाइड बैलेंस ट्रेनिंग पुनर्वास को अधिक आकर्षक और प्रभावी बनाते हैं।
एचसीएएच इंडिया के सह-संस्थापक और अध्यक्ष डॉ. गौरव ठुकराल ने कहा, “स्ट्रोक या बड़ी सर्जरी के बाद के पहले 90 दिन रिकवरी के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। हमारा लक्ष्य है सबसे तेज रिकवरी। रोबोटिक गेट सिस्टम्स मरीजों की गतिशीलता को जल्दी और सुरक्षित रूप से पुनर्निर्मित करते हैं, एआई-आधारित डैशबोर्ड हर प्रगति को ट्रैक करता है और थेरेपिस्ट उसी आधार पर सेशन को एडजस्ट करते हैं। हमने विज्ञान, डेटा और दया को एक साथ जोड़कर भारत में रिकवरी की नई परिभाषा तय की है।”
एचसीएएच के सह-संस्थापक अंकित गोयल ने कहा, “रिकवरी उतनी ही वैज्ञानिक होनी चाहिए जितना कि उपचार। रोबोटिक्स, एआई और हमारे विशेषज्ञ थेरेपिस्ट की मदद से हम रिकवरी को मापने योग्य, स्थिर और प्रेरक बना रहे हैं। अपोलो आयुर्वेद के साथ हमारी साझेदारी शरीर और मन, दोनों के उपचार को एक साथ जोड़ती है।”

वरिष्ठ न्यूरो और स्पाइन सर्जन डॉ. बीएसवी राजू ने कहा, “रोबोटिक असिस्टेड थेरेपी डॉक्टरों को हर सत्र में सैकड़ों परफेक्ट मूवमेंट्स गाइड करने में सक्षम बनाती है। यह मस्तिष्क को खोई हुई क्षमताओं को दोबारा सीखने में मदद करती है। वीआर, एनएमईएस और बैलेंस सिस्टम्स से मरीज स्वाभाविक रूप से अपनी गतिशीलता, बोलने की क्षमता और समन्वय को वापस पा सकते हैं।”
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