कर्ज के दलदल में फँसा राज्य : पायल शंकर

हैदराबाद, भाजपा विधायक पायल शंकर ने कहा कि तेलंगाना राज्य कर्ज के दलदल में डूबा हुआ है। कांग्रेस सरकार प्रति व्यक्ति आय का राग तो अलाप रही है, लेकिन यह नहीं बता रही है कि प्रति व्यक्ति ऋण कितना है। रंग-बिरंगी घोषणा-पत्र के जरिए कांग्रेस ने सत्ता तो हासिल कर ली, लेकिन घोषणा-पत्र में दी गयी 6 गारंटियों को अमल में लाने में विफल रही।

विधानसभा में अनुदान माँग पत्रों पर चर्चा करते हुए पायल शंकर ने कहा कि एक समय कहा जाता था कि आंध्र-प्रदेश से अलग होकर तेलंगाना विकास की गति को प्राप्त करेगा। इसके विपरीत राज्य की जनता आज यह सोच रही है कि संयुक्त आंध्र-प्रदेश ही ठीक था। उन्होंने संयुक्त आंध्र-प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायुडू की प्रशंसा करते हुए कहा कि उस समय संयुक्त आंध्र-प्रदेश की आर्थिक स्थिति काफी खराब थी।

नायुडू ने विधानसभा में राज्य की स्थिति का खुलासा किया और इसे सुधारने के लिए विपक्षी दलों से सुझाव माँगे। तत्कालीन विपक्षी दलों ने भी स्थिति को सुधारने के लिए सुझाव पेश किए। वर्तमान तेलंगाना की आर्थिक स्थिति भी कुछ इसी प्रकार की है, जिसे रेवंत रेड्डी स्वीकार तो कर रहे हैं, लेकिन इसे किस प्रकार से सुधारा जाएगा, इसका खुलासा नहीं कर रहे हैं। इतना ही नहीं, विपक्षी दल भी स्थिति को सुधारने का सुझाव देने के बजाय अपने कार्यकाल में किए गए कार्यों की प्रशंसा करते हुए वर्तमान सरकार की आलोचना कर रहे हैं।

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केंद्र पर निधियाँ जारी न करने का आरोप लगाया गया

इसके अलावा केंद्र सरकार पर निधियाँ जारी न करने का आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में राज्य पर 10,83,330 करोड़ रुपये का कर्ज है, जो जीएसडीपी का 57.5 प्रतिशत है। कर्ज यदि 20 प्रतिशत जीएसडीपी से बढ़ जाता है, तो उस राज्य की आर्थिक स्थिति संकट में आ जाती है। यहाँ तो 50 प्रतिशत का भी आँकड़ा पार हो चुका है। ऋण के अलावा सरकार दो लाख करोड़ रुपये ठेकेदारों व अन्य देनदारों के लिए बकाया है।

कुल मिलाकर तेलंगाना के अलग राज्य के रूप में उभरने के बाद 12 वर्षों में विकास तो दूर की बात है, लगभग 11 लाख करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ गया है। उन्होंने कहा कि चुनाव पूर्व कांग्रेस ने जो आश्वासनों की झड़ी लगाई है, उसे पूरा करने के लिए 50 वर्ष का शासन भी पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने राज्य सरकार से केंद्र की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को अमल में लाने की माँग की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने किसान ऋण माफी के नाम पर किसानों के साथ धोखा किया है।

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