थैलीसीमिया की रोकथाम हेतु बुनियादी ढांचे को मजबूत करना आवश्यक- दामोदर राजानरसिम्हा

दो दिवसीय एटीसी 2026 का समापन

हैदराबाद, थैलीसीमिया एंड सिकल सेल सोसाइटी (टीएससीएस) तथा कमला हॉस्पिटल रिसर्च सेंटर, हैदराबाद की मेजबानी में आयोजित दो दिवसीय एशियन थैलीसीमिया कॉनक्लेव (एटीसी 2026) का आज समापन हुआ। नोवोटेल हैदराबाद एयरपोर्ट तथा राजेंद्र नगर स्थित टीएससीएस मणिराम रतन राठी ऑडिटोरियम में आयोजित सम्मेलन में थैलीसीमिया और संबंधित हीमोग्लोबिन विकारों से मुक्त भविष्य की दिशा में आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए वैश्विक विशेषज्ञों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं तथा स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने थैलीसीमिया मुक्त भारत से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। साथ ही इस स्वास्थ्य समस्या के बोझ को कम करने के लिए जागरूकता पर जोर दिया।

जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, तेलंगाना के स्वास्थ्य, चिकित्सा एवं परिवार कल्याण मंत्री दामोदर राजानरसिम्हा ने एटीसी 2026 में भाग लेते हुए राज्य में थैलीसीमिया की रोकथाम और रोगी कल्याण को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि हम सब एक साथ मिलकर तेलंगाना को देश का पहला ऐसा राज्य बनाएं जहां कोई थैलेसीमिया मरीज न हो। स्वास्थ्य मंत्री ने आगे कहा कि सरकार थैलीसीमिया के लिए आनुवंशिक और प्रसवपूर्व जाँच शुरू करने, रोगियों के लिए विकलांगता प्रमाण-पत्र की उपलब्धता बढ़ाने और प्रभावित बच्चों के लिए वित्तीय सहायता एवं पेंशन प्रदान करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

दामोदर राजानरसिम्हा ने नियमित रक्त आधान की आवश्यकता वाले रोगियों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु सभी जिलों में रक्त बैंक के बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने की योजनाओं पर विशेष रूप से बल दिया। दामोदर राजानरसिम्हा ने कहा कि आदिलाबाद, निज़ामाबाद, वारंगल और खम्मम में स्थित डे केयर सेंटर थैलेसीमिया रोगियों को चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। आसिफाबाद, मंचीरियाल और करीमनगर जिलों में जल्द ही अतिरिक्त केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

समय पर स्क्रीनिंग से रोके जा सकते हैं अधिकांश थैलीसीमिया मामले

डॉ. चंद्रकांत अग्रवाल ने कहा कि एशियन थैलीसीमिया कॉनक्लेव-2026 भारत की प्रतिक्रिया को आजीवन उपचार से रोकथाम-आधारित जन स्वास्थ्य कार्रवाई की ओर मोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। थैलीसीमिया उन कुछ आनुवंशिक विकारों में से एक है, जिनमें अधिकांश मामलों को समय पर क्रीनिंग, परामर्श और सूचित विकल्पों के माध्यम से रोका जा सकता है।

हैदराबाद में एशियन थैलीसीमिया कॉनक्लेव 2026 का समापन सत्र

कॉनक्लेव का उद्देश्य मिशन थैलीसीमिया मुक्त भारत-2035 के लक्ष्य को हासिल करने में योगदान प्रदान करना था। साथ ही सतत राष्ट्रीय कार्रवाई को उत्प्रेरित करते हुए रोकथाम आधारित रणनीतियों की दिशा में गति प्रदान करना तथा देशभर में थैलीसीमिया जन्मों में उल्लेखनीय कमी लाने पर विचार-विमर्श करना था। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में विश्व के विशेषज्ञों सहित भारी भागीदारी, 2035 तक थैलेसीमिया-मुक्त भारत के साझा लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एकीकृत राष्ट्रीय और क्षेत्रीय रणनीतियों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया गया।

अवसर पर रक्त आधान रणनीतियों, जीन थेरेपी और प्रणालीगत जटिलताओं पर वैज्ञानिक सत्रों के साथ रोकथाम, नीतिगत ढाँचों आदि पर परिचर्चा सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में वक्ताओं ने अपने क्षेत्रों से अंतर्दृष्टि साझा करते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि व्यवस्थित क्रीनिंग, आनुवंशिक परामर्श और सशक्त जन स्वास्थ्य एकीकरण जैसी रोकथाम-प्रथम रणनीतियाँ रोके जा सकने वाले थैलीसीमिया जन्मों को कम करने के लिए कितनी आवश्यक हैं।

थैलीसीमिया को लेकर सामूहिक कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता पर बल

थैलीसीमिया इंटरनेशनल फेडरेशन, साइप्रस तथा इंडियन सब-कांटीनेंट नेटवर्क फॉर हीमोग्लोबिन डिसॉर्ड्स के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में उपचार-आधारित दृष्टिकोण की सीमाओं और नीति, समुदाय और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली स्तरों पर साहसिक तथा समन्वित कदम उठाने की आवश्यकता को रेखांकित किया। अवसर पर कहा गया कि भारत में दुनिया में थैलीसीमिया का सबसे अधिक बोझ है। हर साल लगभग 15,000 बच्चे थैलीसीमिया की समस्या के साथ पैदा होते हैं। व्यवस्थित क्रीनिंग और जेनेटिक काउंसलिंग से रोके जा सकने वाले थैलीसीमिया जन्म को प्रभावी रूप से कम किया जा सकता है।

एटीसी 2026 में हुई चर्चाओं में रोकथाम-आधारित रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनमें विवाह पूर्व और प्रसव पूर्व जाँच, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों में थैलीसीमिया जाँच का एकीकरण, अनुवांशिक परामर्श सेवाओं को सुदृढ़ करना और स्वैच्छिक रक्तदान प्रणालियों के माध्यम से सुरक्षित और विश्वसनीय रक्त आपूर्ति सुनिश्चित करना शामिल है। सत्रों में उपचार और दीर्घकालिक देखभाल तक पहुँच में असमानताओं, विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों पर भी चर्चा की गई।

अवसर पर आरोग्यश्री के मुख्य कार्यकारी अधिकारी उदय कुमार, थैलीसीमिया इंटरनेशनल फेडरेशन के प्रो. एंटोनियो पिगा, ग्रुप ऑफ हास्पिटल्स, बेंगलुरू के उपाध्यक्ष डॉ. सुनील भट, जेएस अरोरा, शोभा तुली, विनीता श्रीवास्तव, डॉ. पिएत्रो सोडानी, विनोद के. अग्रवाल, शरत कुमार सहित विभिन्न देशों से विषय विशेषज्ञों ने इस स्वास्थ्य समस्या से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा करते हुए कहा कि यह सम्मेलन रोग के बोझ को कम करने के लिए रोकथाम रणनीतियों को मजबूत करेगा। साथ ही विश्व स्तर पर थैलीसीमिया के मामलों में तेजी से हो रही वृद्धि पर गहरी चिंता व्यक्त कर भारत, एशिया और विश्व से थैलीसीमिया को रोकने और अंतत समाप्त करने के लिए निर्णायक और सामूहिक कार्रवाई की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।

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हज़ारों रोगियों को दीर्घकालिक निशुल्क देखभाल दे रहा टीएससीएस

अवसर पर बताया गया कि एशियन थैलीसीमिया कॉनक्लेव की परिकल्पना टीएससीएस द्वारा रोगी देखभाल, रोकथाम और जागरूकता के क्षेत्र में 27 वर्षों से अधिक के कार्यों की पृष्ठभूमि में की गई। टीएससीएस वर्तमान में 4,588 से अधिक रोगियों को व्यापक, निशुल्क उपचार और दीर्घकालिक सहायता प्रदान कर रहा है। सोसाइटी की सार्वजनिक स्वास्थ्य सफलताओं में से एक तेलंगाना का महबूबनगर है, जो देश का पहला ऐसा जिला बन गया, जिसने गर्भवती महिलाओं की थैलीसीमिया के लिए शत-प्रतिशत प्रसव पूर्व जाँच हासिल की है।

एशियन थैलीसीमिया कॉनक्लेव-2026 का प्रमुख आकर्षण भारतीय थैलीसीमिया सोसाइटी संघ (बीएफटीएस) का शुभारंभ था, जो थैलीसीमिया संगठनों को एकजुट करने, जागरूकता बढ़ाने, सर्वोत्तम प्रथाओं को मानकीकृत करने और रोकथाम के एजेंडे को व्यापक बनाने के उद्देश्य से बनाया गया राष्ट्रीय मंच है।

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