मजबूत ईकोसिस्टम ही असली ताकत : श्रीधर बाबू
हैदराबाद, आईटी एवं उद्योग मंत्री दुद्धिल्ला श्रीधर बाबू ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अर्थव्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी में तेज़ी से बदलाव आ रहे हैं। व्यापार और उद्योग को सही आकार देने तथा प्रतिस्पर्धा में खड़े रहने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नवाचार चक्र व रणनीतिक निर्णयों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में मज़बूत ईकोसिस्टम किसी राज्य या शहर की असली ताकत बन सकता है।

फेडरेशन ऑफ तेलंगाना चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एफटीसीसीआई) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में उद्योग एवं व्यापार से जुड़े लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे। श्रीधर बाबू ने मंगलवार को जुबली हिल्स स्थित जेआरसी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ग्रोथएक्स सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ग्रोथएक्स शिखर सम्मेलन उद्योग और तकनीक के समन्वय में भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच है।
शहर नवाचार केंद्र, औद्योगिक गलियारों को इंजन, ग्रामीणों को जोड़ा
मंत्री ने कहा कि तेलंगाना 200 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर 2034 तक एक ट्रिलियन डॉलर और 2047 तक तीन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। इसके लिए राज्य ने क्योर, प्योर एवं रेयर ढाँचे को अपनाया है, जिसके तहत शहरों को नवाचार के केंद्र, औद्योगिक गलियारों को विकास के इंजन तथा ग्रामीण क्षेत्रों को समावेशी विकास से जोड़ा जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि आने वाले दशक में प्रतिस्पर्धा से ज़्यादा सहयोग, संख्या से ज़्यादा गुणवत्ता और व्यक्तिगत कंपनियों से अधिक ईकोसिस्टम की अहमियत होगी। उद्योग, स्टार्टअप्स, शिक्षण संस्थानों और नीति-निर्माताओं को सरकार के साथ साझेदारी की ओर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने बदलते वैश्विक आर्थिक परिवेश पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भू-राजनीति अब आर्थिक रणनीति को अधिकाधिक प्रभावित कर रही है।
ऐसे परिवेश में पारिस्थितिकी तंत्र की शक्ति निर्णायक प्रतिस्पर्धी लाभ बन गई है। वे शहर और क्षेत्र जो प्रतिभा, अवसंरचना व नीतिगत स्पष्टता का संयोजन करते हैं, अगले दशक में नेतृत्व की भूमिका में होंगे। इस बदलाव में भारत महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है और तेलंगाना भविष्य को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि यह संरचित पारिस्थितिकी तंत्र सुनिश्चित करता है कि राज्य केवल वैश्विक परिवर्तनों का विकल्प नहीं है, बल्कि उनका नेतृत्व कर रहा है।
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हैदराबाद में जीसीसी की स्थापना में प्रमुख केंद्र की भूमिका
मंत्री ने विकास के अगले चरण को आकार देने वाले प्रमुख परिवर्तनों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एआई अवसंरचना के मुख्य अंग के रूप में उभरा है। ऐसे में हैदराबाद में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) की स्थापना में प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि तेलंगाना की नीतिगत दिशा इन संरचनात्मक परिवर्तनों के अनुरूप है, जिससे राज्य को नवाचार-प्रेरित निवेश के लिए पसंदीदा गंतव्य के रूप में लोकप्रिय बना रही है।
अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एन. रामचंदर राव ने कहा कि तकनीकी जीवन कार्यशैली को तेज़ी से बदल रहा है। कृत्रिम मेधा अगली बड़ी लहर होगी, जिसका ज़िम्मेदारी से उपयोग ज़रूरी है। एफटीसीसीआई अध्यक्ष आर. रवि कुमार ने कहा कि उद्योग जगत सरकार द्वारा व्यापार को आसान बनाने के लिए सुधारों की सराहना करता है, लेकिन कारोबार की लागत बढ़ने का मुद्दा ध्यान देने योग्य है।
स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक पवन कुमार चंदाना ने कहा कि आने वाले दस वर्षों में अंतरिक्ष यात्रा हवाई जहाज़ के टिकट जैसी लागत पर संभव हो सकती है। भविष्य में भारतीय पर्यटकों का अंतरिक्ष में जाना वास्तविकता बन सकता है। एआईजी हॉस्पिटल्स के चेयरमैन डॉ. डी. नागेश्वर रेड्डी ने चिकित्सा अनुसंधान से जुड़े नियमों में सुधार की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में मानव अंगों के शोध उपयोग को लेकर क़ानूनी सीमाएँ हैं, जबकि अन्य देशों में नियंत्रित ढाँचे के तहत इसकी अनुमति है। उन्होंने सरकार से नैतिक मानकों के साथ शोध के अवसर बढ़ाने पर विचार करने का आग्रह किया। सम्मेलन के दौरान नियोवैंटेजएक्स नामक एक जर्नल का विमोचन किया गया। 100 से अधिक प्रदर्शक और लगभग हज़ार प्रतिनिधि उपस्थित थे।
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