उच्चतम न्यायालय ने दी समीर वानखेड़े को कॉर्डेलिया जांच में अंतरिम राहत
नयी दिल्ली, उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी समीर वानखेड़े को उस याचिका पर अंतरिम राहत प्रदान की, जिसमें उन्होंने 2021 के कॉर्डेलिया क्रूज मादक पदार्थ मामले की जांच के संबंध में उनके खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही को चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ वानखेड़े की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय के एक हालिया आदेश को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के उस आदेश को पलट दिया था, जिसमें 2025 में वानखेड़े के खिलाफ आरोप पत्र से उत्पन्न सभी अनुशासनात्मक कार्यवाही को रद्द कर दिया गया था। केंद्र सरकार ने 19 जनवरी के ‘कैट’ के आदेश को चुनौती देने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था।
वानखेड़े की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पी एस पटवालिया ने दलील दी कि अधिकारी के खिलाफ आरोप पत्र केवल उन्हें पदोन्नति से वंचित करने के प्रयास में जारी किया गया था और पूरी प्रक्रिया में प्रक्रियात्मक अनियमितताएं थीं। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस वी राजू ने दलील दी कि वानखेड़े ने निर्धारित समय के भीतर जवाब नहीं दिया और जांच अधिकारी की नियुक्ति उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप थी।
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न्यायालय ने आदेश दिया है कि याचिकाकर्ता को आज से एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने की अनुमति है। इसके बाद, प्रतिवादी को एक सप्ताह का समय दिया जाएगा। जांच अधिकारी की नियुक्ति के संबंध में निर्णय उसके दो सप्ताह बाद लिया जाएगा। पीठ ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। (भाषा)
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