वाणी की मिठास

संत आत्मदेव के पांच शिष्य थे। एक दिन गुरु आत्मदेव ने शिष्यों से कहा, जो परीक्षा में पास होगा। मैं उसे अपना योग्य शिष्य बनाऊंगा। पांचों शिष्यों ने कहा, गुरुजी, आप कभी भी हमारी परीक्षा ले सकते हैं। एक दिन संत आत्मदेव ने सभी को बुलाकर कहा, तुम लोगों की परीक्षा का समय आ गया है।
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तुम लोगों को दो घंटे के अंदर मेरे प्रश्न का उत्तर देना होगा। कहकर आत्मदेव ने आगे कहा, यह बताओ, सबसे मीठा क्या है?
सभी शिष्य प्रसन्न हुए। किसी ने ईख, किसी ने शक्कर, किसी ने गुड़ आदि को मीठा बताया, पर गुरु आत्मदेव इस उत्तर से संतुष्ट नहीं हुए। अंत में संत आत्मदेव बोले, यह सब पदार्थ तो केवल मुंह में मिठास घोलते हैं। इन सबसे बढ़कर वाणी की मिठास है। इससे आदमी पूजा जाता है।
सुरेन्द्र अग्निहोत्री
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