खिलाड़ियों की धरोहर के साथ खिलवाड़
हैदराबाद, क्या मुख्यमंत्री और तेलंगाना खेल प्राधिकरण अलग-अलग राह चल रहे हैं? वर्तमान स्थिति यही कह रही है कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की कोशिशों से प्राधिकरण का कोई लेना-देना नहीं है। यहाँ बात हो रही है शहर की हृदयस्थली में स्थित एल.बी. स्टेडियम की।
मुख्यमंत्री ने खेलों को बढ़ावा देने और युवाओं में खेलों के प्रति रुचि पैदा करने के लिए हाल ही में मशहूर फुटबाल खिलाड़ी लियोनेल मेस्सी को बुलाया था। इसके उलट प्राधिकरण एल.बी. स्टेडियम को गैर-खेल आयोजनों के लिए दे रहा है, जिसमें स्टेडियम में गंदगी ने साम्राज्य बना लिया है। खेलों के लिए बनाए गए स्टेडियम को गैर खेल आयोजनों के लिए देने के कारण खेल गतिविधियाँ बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए आधारभूत संरचना को अनिवार्य माना गया है। इसमें भी खेल के मैदान के बिना खेल का अस्तित्व नहीं रहता है। जब अस्तित्व के भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं, तब खेलों के प्रोत्साहन की स्थिति क्या हो सकती है, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। बिना मैदान के खेलों को प्रोत्साहन नहीं दिया जा सकता है। एक खेल के मैदान को तैयार करने के लिए क्या कुछ नहीं करना पड़ता है।
ऐतिहासिक एल.बी. स्टेडियम आज बदहाली का प्रतीक बना
एल.बी. स्टेडियम की बात की जाए, तो यह मैदान अपना एक अलग इतिहास रखता है। खेलों की गतिविधियों को संचालित करने के लिए गठित तेलंगाना खेल प्राधिकरण का यह मुख्य मैदान है। इस मैदान पर कई ऐतिहासिक क्रिकेट मैच खेले जा चुके हैं। यह स्टेडियम केवल क्रिकेट तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका उपयोग प्री-ओलम्पिक फुटबाल मैच व अन्य अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतिस्पर्धाओं के लिए किया गया। वर्तमान में एल.बी. स्टेडियम अपनी खस्ताहालत को देखकर आँसू बहा रहा है।

स्टेडियम की खस्ता हालत के लिए कोई और नहीं, बल्कि इसका संचालक खेल प्राधिकरण ही है। उप्पल में राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण के बाद से एल.बी. स्टेडियम के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। जिस उद्देश्य के साथ इस स्टेडियम का निर्माण किया गया था, उसे कचरे की कुंडी में डाल दिया गया। खेल प्रतिस्पर्धाओं को प्रोत्साहन देने के बजाय चंद रुपयों की खातिर प्राधिकरण इसका उपयोग पे एण्ड प्ले स्कीम के तहत गैर-खेल संबंधी कार्यक्रमों के लिए कर रहा है।
उखड़ी घास, कचरा और पत्थरों से स्टेडियम की बदहाल तस्वीर
गैर-खेल संबंधी कार्यक्रमों के चलते स्टेडियम की हालत दिन-प्रतिदिन बद से बदतर होती जा रही है, जिसका प्रभाव स्टेडियम में अभ्यास करने वाले खिलाड़ियों पर पड़ रहा है, क्योंकि खस्ताहाल स्थिति के कारण इस मैदान पर खेल की गतिविधियों की बात तो छोड़ो खिलाड़ियों को दैनिक व्यायाम (वार्मअप) करने का भी मौका नहीं मिल रहा है। खस्ताहाल मैदान के चलते वार्मअप करने वाले खिलाड़ी कई बार चोट का शिकार हो रहे हैं।

इस मैदान का उपयोग क्रिकेट से हटकर फुटबाल, एथलेटिक्स, कराटे व अन्य कुछ खेल प्रतिस्पर्धाओं के लिए किया जाता है। यह मैदान एक समय खिलाड़ियों से भरा रहता था, आज स्टेडियम में उखड़ी हुई घास, बिखरे हुए पत्थर, तितर-बितर बिखरा हुआ कचरा, दावतों के बाद फेंके गए अन्न और ऊबड़-खाबड़ परिसर इसकी दयनीय हालत को दर्शा रहे हैं। खिलाड़ियों और अभिभावकों ने कई बार प्राधिकरण से स्टेडियम की खराब हालत को देखते हुए इसमें सुधार लाने और गैर-खेल संबंधी कार्यक्रमों के लिए इसका उपयोग न करने का आग्रह करते हुए निवेदन किया, लेकिन प्राधिकरण के कान पर आज तक जूँ नहीं रेंगी।
चंद पैसों के लिए खेल विरासत से खिलवाड़ कर रहा प्राधिकरण
एक अभिभावक ने बताया कि उनका लड़का पे एण्ड प्ले स्कीम के तहत प्रतिमाह निर्धारित शुल्क का भुगतान कर रहा है, लेकिन माह में अधिकांश दिन उसे स्टेडियम में अभ्यास करने का मौका नहीं मिल रहा, क्योंकि मैदान में फिल्मों के ऑडियो रिलीज, सामाजिक कार्यक्रम, सरकारी संबंधी कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। कार्यक्रम से एक दिन पूर्व स्टेडियम को आयोजकों के हवाले कर दिया जाता है। इसके बाद कार्यक्रम के दिन और कार्यक्रम के बाद सप्ताह भर तक स्टेडियम की हालत अभ्यास करने लायक नहीं रहती।
प्राधिकरण के एक अधिकारी ने अपना नाम गोपनीय रखते हुए कहा कि सरकारी कार्यक्रमों को लेकर कुछ नहीं किया जा सकता है, क्योंकि वरिष्ठ अधिकारियों का और राजनीतिक नेताओं का दबाव रहता है। लेकिन अन्य निजी कार्यक्रमों पर अंकुश लगाया जा सकता है, किन्तु प्राधिकरण चंद रुपयों की खातिर खिलाड़ियों की इस धरोहर के साथ खिलवाड़ कर रहा है, जो भविष्य में उभरने वाले खिलाड़ियों के साथ घोर अन्याय है। एक पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी ने प्राधिकरण को सबक सिखाने के लिए इस मामले को लेकर अदालत की लड़ाई लड़ने का सुझाव दिया, क्योंकि जब प्राधिकरण किसी नहीं सुन रहा है, तो अंतिम रास्ता अदालत ही है। (सी. सुधाकर)
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