तेलंगाना – 80 वर्षीय बुजुर्ग ने जीवित रहते हुए बनवाई अपनी कब्र
हैदराबाद, आमतौर पर लोग मौत का नाम सुनते ही डर जाते हैं और अपने अंतिम समय की बात करने से भी कतराते हैं। लेकिन तेलंगाना के जगित्याल जिले में एक 80 वर्षीय बुजुर्ग ने ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। यहां 80 साल के नक्का इंद्रैया ने अपनी मौत का इंतजार किसी लाचारी में नहीं, बल्कि पूरी तैयारी और शान के साथ किया है। उन्होंने जीते-जी अपनी कब्र खुद खोद ली है और उसे किसी आलीशान घर की तरह तैयार करवाया है।
जगित्याल जिले के लक्ष्मीपुर गांव के रहने वाले इंद्रैया की दिनचर्या बेहद अनोखी है। हर सुबह वे उठते हैं और अपने घर से कुछ दूरी पर बनी अपनी कब्र तक जाते हैं। वहां लगे पौधों को पानी देते हैं, ग्रेनाइट के पत्थरों को साफ करते हैं और फिर कुछ देर शांति से अपनी ही कब्र के पास बैठते हैं। उनके लिए यह कोई डरावनी जगह नहीं, बल्कि उनका आने वाला घर है।
इंद्रैया कहते हैं, “यह मेरा घर है, जिसे मैंने खुद अपने लिए बनाया है। मेरी मौत के बाद मुझे यहीं लिटाया जाएगा, इसलिए मैंने इसे वैसा ही बनवाया है, जैसा मैं चाहता था।”
12 लाख रुपये का ‘ग्रेनाइट महल’
इंद्रैया ने अपनी अंतिम विश्राम स्थली को बनवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उन्होंने इसे अपनी पत्नी की कब्र के ठीक पास बनवाया है। उनका कहना है कि इस कब्र को तैयार करने में करीब 12 लाख रुपये खर्च हुए हैं। यह कब्र करीब 5 फीट गहरी और 6 फीट से अधिक लंबी है। पूरी कब्र ग्रेनाइट से बनी है, ताकि इसमें कभी टूट-फूट या सड़न न हो।
इसके निर्माण के लिए उन्होंने तमिलनाडु से एक विशेष राजमिस्त्री को बुलाया था। कब्र की डिजाइन भी खास है। इंद्रैया बताते हैं कि उनके निधन के बाद सिर्फ एक सब्बल से ऊपर का ग्रेनाइट हटाया जाएगा और दफनाने के बाद उसे दोबारा सील कर दिया जाएगा।
इंद्रैया का यह फैसला उनके जीवन के संघर्ष और स्वाभिमान से जुड़ा है। जब वे केवल 10 साल के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। बचपन से ही उन्होंने कड़ी मेहनत की और बाद में 45 साल तक दुबई के कंस्ट्रक्शन सेक्टर में काम किया। कुछ साल पहले उनकी पत्नी का भी देहांत हो गया।
दुबई से लौटने के बाद उनके पास जमा पूंजी तो थी, लेकिन साथ ही अकेलापन भी था। उनके चार बच्चे हैं, लेकिन इंद्रैया ने अपनी मौत की तैयारी के लिए उन पर निर्भर रहना उचित नहीं समझा।
किसी पर बोझ नहीं बनना चाहते
इंद्रैया कहते हैं, “मैं किसी पर बोझ नहीं बनना चाहता था। मौत से डरने की कोई जरूरत नहीं है। सबको मरना है, मुझे भी मरना है। कम से कम मुझे यह तो पता है कि मुझे कहां दफनाया जाएगा।” (भाषा)
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