तेलंगाना हाईकोर्ट ने हैद्रा से पूछा बाड़ लगाने का आधार
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने हैद्रा से पूछा कि यह कैसे निर्धारित किया जाता है कि कोई भूमि या स्थान सरकार का है और किस आधार पर उस पर बाड़ लगाई जाएगी। यह कैसे तय किया जाएगा कि भूमि के अधिकार अदालत में विवादित है या नहीं। न्यायालय ने प्रश्न किया कि क्या शिकायत मिलने पर बिना किसी सबूत के ही बाड़ बना दी जाएगी। न्यायालय ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्णित बुल्डोजर न्याय हैद्रा पर लागू होता है, इस प्रकार हैद्रा को फटकार लगाते हुए अदालत ने सवाल किया कि क्या बाड़ के निर्माण के समर्थन में कोई सबूत नहीं लिया जाएगा।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बिना किसी सबूत के बाड़ नहीं लगाई जानी चाहिए और यदि लगाई जाती है, तो उसे हटाया जाना चाहिए। न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि भूमि का अधिग्रहण तभी किया जाना चाहिए, जब यह स्पष्ट सबूत हो कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। हैदराबाद के व्यापारी प्रसाद एन. तंजर्ला ने गुडीमल्कापुर, हैदराबाद के 1351 वर्ग गज भूखंड पर एक शेड गिराने और बाड़ निर्माण को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
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हैद्रा की कार्रवाई पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश जस्टिस एन.वी. श्रवण कुमार ने हैद्रा के दृष्टिकोण पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि हैद्रा के खिलाफ लगातार याचिकाएँ दायर की जा रही हैं और बाड़ लगाने से पहले उपलब्ध अधिकारों की पहचान की जानी चाहिए और उसके अनुसार ही सबूतों की जाँच भी की जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि हैद्रा क्या अपनी मर्जी से जमीनों पर बाड़ लगा रहा है। साथ ही यह भी सवाल किया कि वे अपनी जीवन भर की बचत से खरीदी गई जमीन पर बाड़ कैसे लगा रहे हैं।
यह कहते हुए कि वे सरकारी जमीन और पार्क की जमीन है। उन्होंने कहा कि हैद्रा शिकायत मिलते ही तुरन्त कार्रवाई कर रही है और इस संबंध में कानून के अनुसार प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पीड़ितों को नोटिस जारी करने और उनसे स्पष्टीकरण लेने के प्राकृतिक कानून के सिद्धांतों का पालन नहीं किया जा रहा है। अदालत ने यह जानना चाहा कि हैद्रा को बाड़ लगाने का क्या अधिकार है।
अदालत ने सवाल किया कि क्या हैद्रा ने अदालत के आदेशों के दायरे से बाहर जाकर कार्रवाई करने का फैसला किया है। जब उनसे पूछा गया कि हैद्रा के अधिकारी अपने कार्यालय में फोन क्यों जब्त कर रहे हैं, तो हैद्रा के अधिवक्ता ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें निराधार बताया और पूरी जानकारी के साथ प्रतियाचिका दायर करने के लिए अवसर देने का आग्रह किया। दलील सुनने के पश्चात न्यायाधीश ने आदेश दिया कि सबूत के बिना बाड़ नहीं लगाई जानी चाहिए। इसके साथ मामले की सुनवाई 3 मार्च तक स्थगित कर दी।
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