तेलंगाना : हाईकोर्ट ने खारिज किया बलात्कार का मामला
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने बलात्कार के मामले में पीड़िता द्वारा चारदिवारी के भीतर दिए गए बयान और बयान के संबंध में सबूत पेश न किए जाने के कारण दर्ज बलात्कार के मामले को न केवल खारिज कर दिया, बल्कि इस मामले को लेकर निचली अदालत द्वारा सुनाए गए 15 वर्ष कारावास की सजा को भी रद्द कर दिया।
किशनबाग निवासी मो. इरफान खान ने नामपल्ली अदालत द्वारा उसके खिलाफ सुनाई गई 15 साल जेल की सजा को चुनौती देते हुए तेलंगाना उच्च न्यायालय ने याचिका दायर की। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस जे. श्रीनिवास राव ने अपना फैसला सुनाया।
न्यायाधीश ने बताया कि दिए गए गवाह के बयान के संबंध में सबूत पेश किए जाने चाहिए, जबकि इस मामले में विश्वसनीय गवाही का हवाला तो दिया गया, लेकिन इस संबंध में सबूत पेश नहीं किए गए। इस कारण इरफान खान के खिलाफ दर्ज मामले को खारिज करने के अलावा उसके खिलाफ सुनाई गई जेल की सजा को भी रद्द करते हुए न्यायाधीश ने अपना फैसला दिया।
इरफान खान पर लगे आरोपों में सबूतों की कमी और बयान में विरोधाभास
सुनवाई के दौरान बताया गया कि अप्रैल-2009 के दौरान बहादुरपुरा पुलिस ने युवती की शिकायत पर इरफान के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया था। इरफान खान और शिकायतकर्ता युवती के बीच चार वर्ष तक प्रेम प्रसंग चला और इस दौरान युवती ने बताया कि नवंबर-2008 के दौरान माता-पिता की अनुपस्थिति के समय इरफान खान ने उसके घर आकर उसे डरा-धमकाकर उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए।
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इस घटना की उसने अप्रैल-2009 के दौरान पुलिस में शिकायत की। दलील सुनने के पश्चात न्यायाधीश ने कहा कि याचिकाकर्ता पर लगाए गए आरोप के संबंध में कोई सबूत पेश नहीं किए गए। लिखित रूप में की गई शिकायत और मौखिक रूप से दिए गए बयान में कोई संबंध नहीं है। दोनों के बीच जमीन-आसमान का अंतर है। शिकायत करने में देरी का भी खुलासा नहीं किया गया।
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