तेलंगाना उच्च न्यायालय : मेट्रो रेल दूसरे चरण को लेकर रिपोर्ट तलब

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने मेट्रो रेलवे को हैदराबाद एमजीबीएस से फलकनुमा तक विस्तार देते हुए मेट्रो रेल के दूसरे चरण के तहत किए जा रहे कार्यों की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए। इसके पूर्व इस मामले की सुनवाई कर रहे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अपरेश कुमार सिंह और जस्टिस जी.एम. मोहियुद्दीन की खण्डपीठ ने पहले कोर्ट हॉल में दूसरे चरण के अलाइनमेंट से संबंधित पॉवर प्वाइंट प्रजेंटेशन देखा।

इसके बाद खण्डपीठ ने दूसरे चरण के निर्माण की अनुमति के लिए आवेदनों की वर्तमान स्थिति बताने के भी आदेश जारी किए। खण्डपीठ ने मेट्रो के दूसरे चरण में 7 किलोमीटर की दूरी के भीतर विरासती संरचनाओं और उन पर मेट्रो रेल मार्ग के प्रभाव का अध्ययन कर रिपोर्ट पेश करते हुए स्पष्टता दर्शाने के आदेश दिए। खण्डपीठ ने यह भी सवाल किया कि क्या विरासती धरोहरों और संरचनाओं के अध्ययन हेतु विरासत संरक्षण समिति गठित की गई है और यदि गठित की गई है, तो वह क्या कार्य कर रही है, इसके संबंध में भी रिपोर्ट पेश करने के आदेश देते हुए मामले की सुनवाई तीन मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई।

गौरतलब है कि एक्ट पब्लिक वेल्फेयर फाउंडेशन के अध्यक्ष मो. रहीम खान ने एमजीबीएस से शमशाबाद तक चौथे कॉरिडोर के निर्माण पर रोक लगाने की माँग करते हुए याचिका दायर की, जो विरासत संरचनाओं के लिए हानिकारक है। इसके अलावा एक अन्य व्यक्ति ने भी अलग से याचिका दायर की।

मार्ग पर 102 धार्मिक-विरासती संरचनाएँ, ट्रैक से दूरी

खण्डपीठ द्वारा सुनवाई के दौरान मेट्रो रेलवे की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता मो. इमरान खान ने दलील देते हुए बताया कि इस मार्ग पर मंदिरों, मस्जिदों, छिल्लाओं, दरगाहों और मकबरों सहित कुल 102 संरचनाएँ हैं और इनमें से कोई भी रेलवे ट्रैक को नहीं छूती है। उन्होंने कहा कि यहाँ तीन पुरानी संरचनाएँ हैं, जिनमें अजा खान जोहरा के सामने स्थित जीएचएमसी की पुरानी ईमारत, राजाराय देवड़ी (श्यामराज भवन) का घंटा घर (क्लॉक टॉवर) और क्षतिग्रस्त अलियाबाद सराय शामिल है। उन्होंने बताया कि इन निर्माणों के बीच पाँच मीटर की दूरी रखी जा रही है।

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याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रामाराव ने दलील देते हुए बताया कि संरक्षण समिति से अनुमति लिए बिना ही अधिकारियों ने कार्य प्रारंभ कर दिया है। एक और याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने दलील देते हुए बताया कि अलियाबाद सराय निजी संपत्ति नहीं है और यह वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। उन्होंने कहा कि मेट्रो ने उन लोगों से जमीन लीज पर ली है, जो खुद को इस सराय का मालिक बता रहे थे। दलील सुनने के पश्चात खण्डपीठ ने दूसरे चरण की वर्तमान स्थिति पर रिपोर्ट पेश करने के आदेश देते हुए मामले की सुनवाई 3 मार्च तक स्थगित कर दी।

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