आतंकी साजिश का भंडाफोड़ – सात बांग्लादेशी नागरिकों समेत आठ संदिग्ध गिरफ्तार

नई दिल्ली, दिल्ली पुलिस ने तीन राज्यों में चलाए गए एक बड़े आतंकवाद रोधी अभियान के तहत आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के मॉड्यूल का पर्दाफाश करके इससे जुड़े आठ लोगों को गिरफ्तार किया है जिनमें से सात बांग्लादेशी नागरिक हैं। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।

अधिकारी ने बताया कि ये सातों बांग्लादेशी अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे और जाली पहचान पत्र बनवा लिए थे। ये गिरफ्तारियाँ पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में समन्वित छापेमारी के बाद हुईं। इसके पहले जाँचकर्ताओं ने दिल्ली में कई स्थानों पर मारे जा चुके आतंकवादी बुरहान वानी की तस्वीर दर्शाने वाले पाकिस्तान समर्थक और आतंकवाद समर्थक पोस्टर लगाने में एक समूह की संलिप्तता का पता लगाया था।

मॉड्यूल बांग्लादेश से शब्बीर अहमद लोन द्वारा संचालित

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (विशेष प्रकोष्ठ) प्रमोद सिंह कुशवाह ने बताया कि इस मॉड्यूल को बांग्लादेश से शब्बीर अहमद लोन उर्फ राजा उर्फ कश्मीरी द्वारा संचालित किया जा रहा था। शब्बीर जम्मू-कश्मीर का रहने वाला लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रशिक्षित आतंकवादी है। इसे पहले 2007 में दिल्ली पुलिस की विशेष प्रकोष्ठ ने हथियारों और गोला-बारूद, जिनमें एके-47 राइफल और ग्रेनेड शामिल थे, की बरामदगी से जुड़े एक मामले में शब्बीर को गिरफ्तार किया था। उन्होंने बताया कि श्रीनगर के कंगन का रहने वाला शब्बीर वर्ष 2018 में तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद बांग्लादेश भाग गया था।

इसके बाद से शब्बीर अपने आतंकी संगठन से जुड़े और भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी लोगों के स्लीपर सेल को सक्रिय करके लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी नेटवर्क को पुनर्जीवित करने का काम कर रहा था। कुशवाह ने कहा, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के शिफ्ट प्रभारी द्वारा आठ फरवरी को जनपथ मेट्रो स्टेशन पर चिपकाए गए पाकिस्तान समर्थक और आतंकवाद समर्थक पोस्टर के संबंध में सुप्रीम कोर्ट मेट्रो पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद जाँच शुरू हुई। बाद में दिल्ली में अन्य स्थानों पर भी इसी तरह के पोस्टर मिले।

पोस्टरों में जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के मारे गए आतंकवादी वानी की तस्वीरें थीं और उन पर भारत नरसंहार बंद करो और कश्मीर को आजाद करो जैसे संदेशों के साथ-साथ उर्दू में हम पाकिस्तानी हैं, पाकिस्तान हमारा है और कश्मीरी एकजुटता दिवस जैसे नारे भी लिखे गए थे। प्राथमिकी दर्ज करके विशेष प्रकोष्ठ ने आगे की जाँच शुरू की। शुरुआती छानबीन दिल्ली पुलिस की मेट्रो यूनिट की एक टीम ने की और बाद में जाँच विशेष प्रकोष्ठ को सौंप दी गई।

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विशेष प्रकोष्ठ ने लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े गतिविधियों पर नजर रखी

कुशवाह ने बताया कि बांग्लादेश में हाल के घटनाक्रमों के मद्देनजर विशेष प्रकोष्ठ पहले से ही बांग्लादेश से संबंध रखने वाले लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े लोगों की गतिविधियों पर नजर रहा था, इसलिए उसने खुफिया जानकारी और तकनीकी निगरानी को और तेज कर दिया। विश्लेषण के आधार पर, एक टीम ने दो संदिग्धों का पता कोलकाता के हटियारा गोटे स्थित मझरपारा में लगाया। इसके बाद 15 फरवरी को छापेमारी की गई और दो आरोपियों (पश्चिम बंगाल के मालदा निवासी 31 वर्षीय उमर फारूक और बांग्लादेश के मूल निवासी 31 वर्षीय रोबिउल इस्लाम) को गिरफ्तार किया गया।

अधिकारी ने कहा, तमिलनाडु के तिरुप्पुर में 21 फरवरी को एक साथ छापेमारी की गई, जिसके परिणामस्वरूप आतंकी संगन से जुड़े छह और लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनकी पहचान मोहम्मद मिजानुर रहमान (32), मोहम्मद सेफायत हुसैन (34), मोहम्मद जाहिदुल इस्लाम (40), मोहम्मद लिटन (40), मोहम्मद उज्जल (27) और उमर (32) के रूप में हुई है – ये सभी बांग्लादेश के बोगुरा जिले के मूल निवासी हैं। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक पूछताछ से पता चला है कि फारुक मार्च 2025 में शब्बीर के संपर्क में आया था और उसने उसे कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित किया था। आरोप है कि लोन ने फारुक को भारत में लश्कर-ए-तैयबा के अभियानों का नेतृत्व करने के लिए नियुक्त किया था, जिसमें भारतीय पहचान पत्र हासिल कर चुके बांग्लादेशी नागरिकों का उपयोग किया जाना था। (भाषा)

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