जन प्रतिनिधि न्यायालय में मामलों को स्थानांतरित करने पर निर्णय लेगी मुख्य न्यायाधीश की खण्डपीठ

हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने स्पष्ट करते हुए कहा कि मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खण्डपीठ को एमएलसी चिंतापंडु नवीन उर्फ तीनमार मल्लन्ना द्वारा दायर याचिका पर फैसला लेना है, जिसमें राज्य भर में दर्ज 100 से अधिक आपराधिक मामलों को नामपल्ली स्थित जन-प्रतिनिधि न्यायालय में स्थानांतरित करने की माँग की गई है। इसीलिए न्यायालय ने रजिस्ट्री को नवीन की याचिका को मुख्य न्यायाधीश की खण्डपीठ के समक्ष रखने का आदेश दिया है।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस एन. तुकारामजी ने मंगलवार को नवीन की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें राज्य भर में दर्ज मामलों को सांसद और विधायक न्यायालय में स्थानांतरित करने की माँग की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान याचिकाकर्ताओं के खिलाफ राज्य भर में 100 से अधिक मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने इन सभी मामलों को जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए गठित विशेष अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश देने का आग्रह किया।

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सरकारी अधिवक्ता ने दलील रखते हुए कहा कि सरकार ने अश्विनी कुमार उपाध्याय मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए एक विशेष अदालत गठित करने का आदेश जारी किया था और उस आदेश में केवल सांसदों और विधायकों का ही उल्लेख था। उन्होंने कहा कि एमएलसी का कोई जिक्र नहीं था। उन्होंने एमएलसी मामलों की जाँच शुरू करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय से स्पष्टता माँगी। दलीलों का जवाब देते हुए न्यायाधीश ने रजिस्ट्री को याचिका मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने का आदेश दिया। इसके साथ ही उन्होंने नवीन कुमार को कई आपराधिक मामलों में 8 सप्ताह के लिए पेश होने से छूट देने का अंतरिम आदेश जारी किया।

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