नुकसानदेय है लगातार बैठना

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लगातार कुर्सी पर बैठे रहना आज एक बड़े स्वास्थ्य दुश्मन के रूप में सामने आ रहा है। ऐसा नहीं है कि लगातार बैठे रहने को लेकर यह कोई नया खुलासा है। हम इस तथ्य को पहले से जानते हैं, फिर भी हर दिन बिना सोचे-समझे लगातार बैठे रहते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा लगातार बैठने को एक नया धूम्रपान घोषित किया है, इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं है। पूरी दुनिया में यह एक नया संकट है। प्रतिवर्ष लगातार बैठने से हर साल 32 लाख लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। यह संख्या धूम्रपान से होने वाली मौतों से भी ज्यादा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर साल पूरी दुनिया में 17.9 मिलियन लोग हृदय रोग के कारण अपनी जान गंवा बैठते हैं। लगातार बैठना यानी शारीरिक निपियता ही इसकी जड़ है। जागरूक रहकर हम सािढय जीवनशैली के द्वारा 80 प्रतिशत तक के हृदय रोगों को रोक सकते हैं। दरअसल, हम लगातार एक ही मुद्रा में कार्यस्थल पर या घर पर भी काम के कारण अपने शरीर को घंटों बिना हिला-डुलाये एक ही कुर्सी पर बैठे रहते हैं। भारत में लगभग 60 प्रतिशत वयस्क की यही जीवनशैली है।

लगातार बैठने से मोटापा, डायबिटीज और स्ट्रोक का खतरा

अमेरिका हार्ट एसोसिएशन द्वारा किये गये एक अध्ययन में पाया गया कि जो प्रतिदिन नौ घंटे से कम समय तक बैठे रहने वाली उम्रदराज महिलाओं दिल का दौरा या स्ट्रोक की संभावना 11-12 घंटे तक लगातार एक ही स्थान पर निपिय बैठी महिलाओं की तुलना में कम होता है। रहती हैं। इस प्रकार मूवमेंट न करने वाली यह लाइफस्टाइल व्यक्तिगत के साथ ही हमारी राष्ट्रीय प्रगति को भी नुकसान पहुंचा रही है। हममें से अधिकतर लोग अगर ऑफिस में भी काम न कर रहे हों, तो भी घंटों कार चलाने के दौरान, टीवी देखने के दौरान, काउच पर आराम करने के दौरान और तो और कुर्सी पर ही घंटों एक ही मुद्रा में बैठे रहते हैं, लगातार बैठे रहने से हमारी कमर पर लगातार दबाव बना रहता है।

घंटों एक ही मुद्रा में बैठने से या पीन पर देखने से हमारी गर्दन और कमर पर पड़ने वाला दबाव हमारी निद्रा के पैटर्न को भी बदल देता है। ऑफिस में कार्य करने के दौरान बिना ब्रेक लिए अगर हम 6 से 8 घंटे तक बैठे रहते हैं तो हम लगातार की इस निपियता के बुरे परिणामों से बच नहीं सकते। लगातार बैठने से डायबिटीज और मोटापा बढ़ता है। घंटों एक जगह पर एक ही मुद्रा में बिना ज्यादा मूवमेंट किए बैठने से हमारे शरीर की कंज्यूम की गई कैलोरीज़ की खपत नहीं होती, जिसके कारण मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और कॉर्डियोवैस्कुलर बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती हैं।

पर्याप्त नींद और सही डाइट है बेहतर सेहत की कुंजी

खराब पॉश्चर के कारण कमर दर्द, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, हाइपर टेंशन, एब्नॉर्मल ब्लड लिपिड प्रोफाइल और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। क्या आपको पता है कि भारत में 25 प्रतिशत वयस्क प्रतिदिन 8 घंटे से भी ज्यादा लगातार बैठकर काम करते हैं और इस दौरान वो 20 मिनट से भी कम का ब्रेक लेते हैं। कमोवेश हमारे देश में कॉरपोरेट जगत में ही नहीं बल्कि सेलिब्रिटीज और नेताओं का लाइफस्टाइल भी इस तरह का ही है।

अब समय है एक नई शुरुआत करने की और खुद को गति में लाने की। क्योंकि मानव शरीर चलने के लिए बना है, न कि घंटों बैठे रहने के लिए। एक-एक कदम करके भी आप अपने दिन को बेहतर बना सकते हैं। अपने हृदय के स्वास्थ्य के लिए उसे सही डाइट के साथ-साथ गति और ऊर्जा देना भी जरूरी है। अच्छी नींद आपके शरीर की सबसे बड़ी जरूरत है। क्योंकि जो लोग रात में 6 घंटे से भी कम सोते हैं, उनमें हृदय रोग का खतरा 48 प्रतिशत तक अधिक होता है। शरीर के लिए सही व्यायाम के साथ-साथ चेस्ट मैनेजमेंट भी जरूरी है। सिर्फ बात ही न करें बल्कि इन पर अमल भी करें। क्योंकि स्वस्थ हृदय का मतलब केवल लंबा जीवन जीना नहीं है बल्कि बेहतर जीवन जीना है।

  • कार्य करने के दौरान हर 30 मिनट बैठने के बाद बीच में ब्रेक लें। किसी भी बहाने से उठकर इदार-उधर घूमें, न भी जरूरत हों तो काम के बहाने एक-दूसरे के पास जाएं। 15 से 20 मिनट तक खड़े होकर काम करने का प्रयास करें।
  • बैठने के दौरान बीच में रुक-रुककर अपने पैरों और कंधों को स्ट्रैच करें, इससे आपको आराम मिलेगा।
  • अपनी डेस्क को इस तरह से ऑर्गनाइज करें कि कंधे, गर्दन, पीठ और आंखों पर काम का ज्यादा दबाव न महसूस हों।

-डॉ.माजिद अलीम

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