साहित्य जगत के एक युग का अंत: विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर शोक

नई दिल्ली: हिंदी साहित्य के प्रख्यात विद्वान और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल का मंगलवार को रायपुर स्थित एम्स में इलाज के दौरान निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे। शुक्ला अपनी-अपनी प्रयोगात्मक लेकिन सरल लेखन शैली के लिए प्रसिद्ध थे। वह काफी समय से कई अंगों में संक्रमण से जूझ रहे थे, जिसके चलते उन्होंने शाम 4:48 बजे अंतिम सांस ली।

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में 1 जनवरी, 1937 को जन्मे शुक्ल ने अध्यापन को अपना पेशा चुना, लेकिन अपना जीवन साहित्य को समर्पित कर दिया। उनकी पहली कविता, ‘लगभग जयहिंद,’ 1971 में प्रकाशित हुई, जिसने हिंदी साहित्य में उनके उल्लेखनीय सफर की शुरुआत की। उनके उल्लेखनीय उपन्यासों में ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी,’ ‘नौकर की कमीज,’ और ‘खिलेगा तो देखेंगे’ शामिल हैं।

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित होने वाले 12वें हिंदी लेखक

2024 में उन्हें 59वें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिससे वे छत्तीसगढ़ के पहले लेखक बन गए जिन्हें यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुआ वे इस पुरस्कार से सम्मानित होने वाले 12वें हिंदी लेखक हैं। हिंदी साहित्य में विनोद कुमार शुक्ल का अद्वितीय योगदान, उनकी रचनात्मकता और उनकी विशिष्ट शैली साहित्यिक इतिहास में सुनहरे अक्षरों में अंकित रहेगी। उनका निधन एक युग का अंत है, लेकिन उनकी विरासत पाठकों और लेखकों की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। 

फिल्म निर्माता मणि कौल ने 1979 में ‘नौकर की कमीज’ के ऊपर बॉलीवुड फिल्म भी बनाई, जबकि ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। शुक्ल की लेखन शैली अपनी सहज सरलता और अनूठी शैली के लिए जानी जाती थी, जिसमें अक्सर रोजमर्रा की जिंदगी को गहन कथाओं में पिरोया जाता था। उनकी रचनाओं ने भारतीय साहित्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई और पाठकों में एक नई चेतना का संचार किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हिंदी साहित्य के प्रख्यात विद्वान और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर दुख जताया है. उन्होंने कहा कि विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन से साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति हुई है. इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने भी ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता विनोद कुमार शुक्ल को श्रद्धांजलि दी।

राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अपनी सहज और सशक्त रचनाओं से गद्य और पद्य को अत्यंत समृद्ध करने वाले रचनाकार विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन से साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति हुई है. पीछे छूट गए तथा हताश हो रहे समुदायों और व्यक्तियों के प्रति संवेदना एवं चिंता का भाव उनके लेखन को विशेष अर्थवत्ता प्रदान करता है. उनके परिवारजन और असंख्य प्रशंसकों के लिए मैं हार्दिक शोक संवेदना व्यक्त करती हूंI

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा कि ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात लेखक विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है. हिन्दी साहित्य जगत में अपने अमूल्य योगदान के लिए वे हमेशा स्मरणीय रहेंगे. शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं. ओम शांति।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्ल के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया. गृह मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार, भारतीय ज्ञानपीठ से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल जी का निधन साहित्य जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति है. सादगीपूर्ण लेखन और सरल व्यक्तित्व के लिए प्रसिद्ध विनोद कुमार शुक्ल जी अपनी विशिष्ट लेखन कला के लिए सदैव याद किए जाएँगे. मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों, प्रशंसकों और असंख्य पाठकों के साथ हैं. ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें. ॐ शांति शांति शांति।

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