सारी सृष्टि शिव और शक्ति का खेल : रमेशजी

हैदराबाद, सारी सृष्टि शिव और शक्ति का खेल है। हम भले ही अपने आप को अलग अस्तित्व मान लें, फिर भी हम शिव और शक्ति खेल के ही पात्र या संगम रहेंगे। उक्त उद्गार बंजारा हिल्स स्थित अवर पैलेस में आयोजित महाशिवरात्रि महोत्सव के समापन समारोह पर आयोजित सत्संग में रमेशजी ने व्यक्त किए। रमेशजी ने कहा कि शिव शक्ति का समन्वय ही पूरी सृष्टि है। इनके अलावा कोई तीसरा तत्व नहीं है। जब हमें यह पता चल जाता है कि हम शिव और शक्ति का ही अंश हैं, जीवन हर पल आनंदमय हो उठता है।

महाशिवरात्रि सत्संग में आध्यात्मिक प्रवचन देते संत

शिवपुराण में भी कहा गया कि जब तक जीव की सांस चलती है, शिव उसके भीतर होते हैं। सांसों के बंद होने के बाद जीव शिव में अवस्थित होता है। इस ज्ञान भर को आत्मसात कर आवागमन के चक्र से मुक्त हुआ जा सकता है। हमें सदैव शिवरूपी सत्य के साथ जुड़ाव रखना चाहिए। हमें जब भी किसी भी चीज के प्रति सत्य का ज्ञान हो जाता है, तो सभी प्रकार के भय तथा नकारात्मकताओं को नाश हो जाता है।

श्रद्धा और कृतज्ञता से जीवन में आनंद का संदेश

जो लोग सभी में श्रद्धा तथा कृतज्ञता का भान रखते हुए सदैव सत्य के साथ रहते हैं, उनके जीवन में सदैव आनंद रहता है। रमेशजी ने कहा कि हमारा लक्ष्य स्वयं के चेतन स्वरूप को पहचानते तथा उसमें स्थित रहते हुए जीवन जीना होना चाहिए। यही जीनव का असली आधार है।

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गुरु माँ ने महाशिवरात्रि के दौरान आयोजित विभिन्न गतिविधियों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिव तत्व ही सर्वव्यापक है। हर जगह उसका ही स्वरूप है, उसके अलावा और कुछ नहीं है। गुरु हमें साकार से निराकार तथा फिर निराकार से साकार के रहस्य से अवगत कराते हैं। उन्होंने कहा कि शिव एक ऐसी भाव स्थिति है, जहाँ अकेले होकर भी सब कुछ हमारा होता है। अगर यह ध्यान रख लें कि हम उसके ही अंश हैं, तो हम भी शिव हो जाएँगे।

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