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हैदराबाद में द क़ॉफी कप की रोचक-यात्रा

यदि आप गर्मियों में सबसे बढ़िया फ्रैपेस का मज़ा लेना चाहते हैं, तो द क़ॉफी कप उत्तम विकल्प हो सकता है। हालाँकि, हैदराबाद शहर के कोम्पल्ली, जुब्ली हिल्स और सैनिकपुरी में स्थित द क़ॉफी कप की सभी शाखाएँ लोकप्रिय हैं। सैनिकपुरी वाला क़ैफे-रेस्टॉरटन इनकी मूल शाखा है। हमने द क़ॉफी कप के फाउंडर वरुण और पूजा शर्मा से एक खास मुलाकात की, जिसमें 2010 में शुरू हुए इस क़ैफे रेस्टोरेंट की रोचक यात्रा की चर्चा की गई।

एक जहाजी होते हुए वरुण का नौकरी छोड़कर रेस्टोरेंटर बनना बहुत असमंजस की बात नहीं थी, क्योंकि वह यात्राओं के दौरान विभिन्न देशों के क्यूज़ीन के श़ौकीन हो गए थे। क़ॉफी के बीज रूप को फिल्टर करके कप तक पहुँचाने की कला वरुण बखूबी समझते हैं। उनकी पत्नी पूजा भी फ़ैजी परिवार से संबंध रखती हैं। वह भी विभिन्नता को लेकर काफी उत्सुक रहती हैं। यूँ ही एक दिन टहलते हुए इस दंपत्ति ने सोचा कि क्यों न एक ऐसी जगह की शुरुआत करें, जहाँ लोग केवल क़ॉफी पीने ही नहीं, बल्कि किताबें पढ़ने, संगीत सुनने और मित्रों से चैन से बातचीत करने आ सकें। बस यहीं से द क़ॉफी कप की कहानी शुरू हुई।

लाइव म्यूजिक और स्टैंड-अप कॉमेडी का हब

क़ैफे के अंदर एक छोटी-सी लाईब्ररी है, जो इस बात का प्रमाण है कि पहले यह जगह सुकून से क़ॉफी पीने व पढ़ने के लिए बनाई गयी थी। किताबों को प्रकाशन कंपनियों एवं रीटेल से प्राप्त किया गया। देखते ही देखते न केवल जगह बड़ी होती गई, बल्कि स्टैंड-अप कॉमेडी, लाइव संगीत का भी चलन शुरू हो गया। हैदराबाद के पहले लाफ्टर क्लब ने भी यहीं जन्म लिया। कई जवान दिल यहाँ मिले, जो आगे जाकर शादी में पनप गए। और तो और, अक्सर उन यादगार पलों को फिर से जीने के लिए वे दंपत्ति यहाँ आते रहते हैं।

यहाँ युवाओं से लेकर छात्र, कॉर्पोरेट सेक्टर के लोग, परिवार व महिलाओं का दल भी सामाजिक मेल-जोल के लिए इकट्ठा होता है। अंदर कदम रखते ही धुंधले सुनहरी रौशनी से युक्त लट्ठे व काठ के फर्नीचर बागवानी का सुंदर माहौल बना देते हैं। क़ैफे की डिजाइनिंग वरुण ने ही की है। उनके विस्तृत मेन्यू के विभिन्न पकवानों का चयन, उनको बनाने की ट्रेनिंग वरुण स्वयं अपने शेफ को देते हैं। पूजा क़ैफे के मैनेजमेंट में वरुण का साथ देती हैं। कॉन्टिनेंटल से लेकर देसी पकवान की वैरायटी का आप यहाँ लुत्फ उठा सकते हैं। यहाँ के स्पाइसी चिकन बर्गर, मार्गरिटा पिज़्ज़ा, फिश एंड चिप्स और पास्ता बहुत लोकप्रिय हैं, पर वेजीटेरियन सूची में वेजटेबल्स एंड वाइट सॉस, एवाकोडो टोस्ट से लेकर छोले-भठूरे भी बहुत पसंद किये जाते हैं।

सुबह 6.30 से रात 11.30 तक: द कॉफ़ी कप का स्वादिष्ट अनुभव

ब्रेकफास्ट की डिमांड सबसे ज़्यादा होती है। सभी आइटम्स ज़ोमैटो और स्विग्गी पर भी उपलब्ध हैं। क्वालिटी कंट्रोल द क़ॉफी कप का एक आवश्यक पहलू है। इनकी सभी शाखाओं का इक्वीनोक्स लैबोरेट्रीज नामक कम्पनी द्वारा साप्ताहिक अंकेक्षण होता है। सभी खाद्य-पदार्थों की सोर्सिंग प्रीमियम पी केंद्रों से होती है। प्रीमियम क़ॉफी बीन्स खास चिकमंगलूर के एक ही पोता से सालों से लिया जा रहा है, जबकि गोचूजैंग सॉस जैसे पदार्थ आयात किए जाते हैं।

लोग अब खान-पान (गैस्ट्रोनॉमी) को लेकर काफी जागरुक हो गए हैं। हमारे माता-पिता एक या दो अंतरराष्ट्रीय व्यंजनों के बारे में जानते थे। लोगों का स्वाद अब काफी विकसित हो गया है। जागरुकता और मांग बढ़ने के कारण अब विभिन्न प्रकार की सामग्री भी आसानी से उपलब्ध हो रही है। ऐसा वरुण का मानना है। द क़ॉफी कप की चौथी शाखा सिकंदराबाद क्लब के सामने खुलने वाली है। द क़ॉफी कप का आनंद आप सुबह 6.30 से रात के 11.30 बजे तक ले सकते हैं।

-दिव्यता बी.

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