दलबदल केस में दानम के खिलाफ सुनवाई स्थगित

हैदराबाद, खैरताबाद विधायक दानम नागेंदर के भविष्य पर अनिश्चितता बनी हुई है। विधानसभा अध्यक्ष गड्डम प्रसाद कुमार ने उनके खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर सुनवाई को 18 फरवरी तक स्थगित कर दिया। एक ओर जहाँ बीआरएस और भाजपा के विधायकों द्वारा दायर याचिकाओं में उन पर आरोप सिद्ध करने का भरसक प्रयास किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर दानम नागेंदर के सुर कुछ बदले-बदले दिखाई दे रहे हैं। दानम का कहना है कि उन्होंने बीआरएस नहीं छोड़ी है और ना ही उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया है।

दानम की अयोग्यता से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान बीआरएस विधायक कौशिक रेड्डी और दानम विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष पेश हुए, जबकि बीजेपी के विधायक महेश्वर रेड्डी ने नगरपालिका चुनाव की तैयारियों का हवाला देते हुए बाद में उपस्थित होने के लिए समय माँगा। स्पीकर ने मामले को 18 फरवरी तक स्थगित करने की घोषणा की। पिछले विधानसभा चुनावों में बीआरएस के टिकट पर चुने गए दानम ने 2024 लोकसभा चुनाव में सिकंदराबाद से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। इसके बाद बीआरएस और भाजपा नेताओं ने उनके खिल़ाफ अलग-अलग अयोग्यता याचिकाएँ दायर कीं। उनका तर्क है कि प्रतिद्वंद्वी पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ना, उसी पार्टी की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ने के बराबर है, जिसके टिकट पर वह चुने गए थे।

सूत्रों के अनुसार, आज सुनवाई के दौरान कौशिक रेड्डी ने आरोप लगाया कि दानम का कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ना उनकी अयोग्यता के लिए काफी है। बताया जाता है कि इस पर विस अध्यक्ष ने प्रमाण पूछे। उन्होंने जब अख़बारों की कटिंग पेश की, तो अध्यक्ष ने केवल अख़बारों के समाचार को प्रमाण मानने से इनकार कर दिया। कौशिक रेड्डी ने कहा कि वह अगली सुनवाई में लोकसभा चुनाव से संबंधित प्रमाण पेश करेंगे।

कांग्रेस में भाग लेना बीआरएस से संबंध तोड़ने का प्रमाण नहीं

दूसरी ओर खैरताबाद विधायक की कानूनी टीम का कहना है कि दानम ने न तो कभी औपचारिक रूप से बीआरएस से इस्तीफा दिया और न ही उन्हें पार्टी से निष्कासित किए जाने का कोई नोटिस मिला। स्पीकर को सौंपे गए हलफनामों में उन्होंने कहा कि कांग्रेस गतिविधियों में भाग लेना अपने आपमें बीआरएस से संबंध तोड़ने का प्रमाण नहीं है। लोकसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ने के मुद्दे पर उन्होंने तर्क दिया कि बाद के राजनीतिक घटनाक्रमों को पहले दायर की गई याचिका की सुनवाई में आधार नहीं बनाया जा सकता।

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हालाँकि राजनीतिक हलकों में यह चर्चा गर्म है कि दानम नागेंदर अयोग्यता का फैसला आने से पहले ही विधायक पद से इस्तीफा दे सकते हैं। दूसरी ओर यह भी कहा जा रहा है कि यदि स्पीकर दानम के खिलाफ फैसला देते हैं, तो उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त होगी और खैरताबाद में उपचुनाव हो सकते हैं। यदि फैसला उनके पक्ष में आता है, तो याचिकाकर्ता उसे अदालत में चुनौती दे सकते हैं, क्योंकि स्पीकर का निर्णय न्यायिक समीक्षा से परे नहीं है। स्पीकर का फैसला चाहे जो भी हो, ऐसा लगता है यह राजनीतिक और कानूनी लड़ाई अभी खत्म होने वाली नहीं है। दानम नागेंदर का कहना है कि वह इस्तीफा देने के लिए भी तैयार हैं। चुनाव लड़ना व जीतना उनके लिए कोई नई बात नहीं है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि नगरपालिका चुनावों के बाद मामले पर स्पष्टता आएगी।

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