चिंताजनक है युवावस्था में स्ट्रोक के मामलों में वृद्धि
हैदराबाद, हैदराबाद में युवा वयस्कों में स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सात स्ट्रोक रोगियों में से एक की आयु 25-45 के बीच है। प्रारंभिक हस्तक्षेप और पुनर्वास कभी भी अधिक महत्वपूर्ण नहीं रहा है।
एचसीएएच ने भौतिक चिकित्सा और पुनर्वास (पीएमआर) टीम के साथ हैदराबाद में स्ट्रोक रिकवरी में प्रारंभिक पुनर्वास के महत्व पर विशेष गोलमेज चर्चा का आयोजन किया। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि प्रारंभिक पुनर्वास दीर्घकालिक दिव्यांगता को रोकने, स्वास्थ्य देखभाल की लागत को कम करने और बेहतर रोगी परिणामों के लिए रोबोटिक्स और एआई जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को एकीकृत करने के लिए महत्वपूर्ण है।
स्ट्रोक के इलाज और पुनर्वास में समय की अहमियत
युवा आबादी में धूम्रपान, शराब, उच्च तनाव, खराब आहार और शारीरिक गतिविधि की कमी जैसे जीवनशैली कारकों के कारण स्ट्रोक का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है। दूसरी ओर देश में केवल 25 फीसदी आबादी के पास स्ट्रोक के तत्काल बाद अस्पतालों तक पहुंच के साधन हैं। किम्स सनशाइन हॉस्पिटल्स के चीफ न्यूरोसर्जन डॉ. नवीन मेहरोत्रा और सोमाजीगुड़ा के यशोदा हॉस्पिटल्स के कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन डॉ. अनंत एगुर ने चर्चा गोष्ठी में भाग लिया।
उन्होंने कहा कि लोगों में जन जागरूकता और संरचित पुनर्वास की तत्काल आवश्यकता है। स्ट्रोक से बचना केवल पहला कदम है, जबकि स्ट्रोक से उबरना प्रारंभिक पुनर्वास पर निर्भर करता है। एचसीएएच हैदराबाद में न्यूरो रिहैबिलिटेशन एंड फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन विशेषज्ञ डॉ. आस्तिक भट्ट ने पुनर्वास सेवाओं के विस्तार पर जोर देते हुए कहा कि स्ट्रोक से उबरने के लिए समय पर पुनर्वास महत्वपूर्ण है।
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इसके लिए उन्होंने विशेष टीम बनायी है। एचसीएएच के सह-संस्थापक और सीओओ डॉ. गौरव ठुकराल का मानना है कि प्रारंभिक पुनर्वास विशेषाधिकार नहीं हो, बल्कि स्वास्थ्य सेवा में मानक अभ्यास होना चाहिए।
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