कहीं मानवता के लिए अभिशाप न बन जाये, बढ़ती हथियारों की डील

आर्थिक दृष्टि से देखा जाये तो डोनल्ड ट्रंप का मध्यपूर्व के देशों का यह दौरा भले ही अब तक का सबसे सफल, महत्वपूर्ण और कारगर रहा है लेकिन इस दौरे में हुए सौदों पर गंभीरता से विश्लेषण करें तो मानवता के लिए भय लगता है! भय इसलिए कि मध्यपूर्व के इन तीनों देश सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात का अमेरिका के साथ हथियारों का अब तक के इतिहास का सबसे बड़ा 600 अरब डॉलर से भी ज्यादा का सौदा हुआ है ! अमेरिकी राष्ट्रपति की हथियारों की सबसे बड़ी डील को देख भय का प्रश्न इसलिए भी उभर कर आता है कि मध्यपूर्व के इन तीनों देशों से जिनकी गिनती दुनिया के सबसे अमीर देशें में की जाती है जिनकी भौगोलिक सीमाओं का क्षेत्रफल भारत के मध्यप्रदेश के बराबर भी नहीं है। और तो और इन तीनों ही देशें में न कोई आतंकवाद या नक्सलवाद जैसी समस्या है और न ही कोई दुनिया में इनका पाकिस्तान जैसा दुश्मन देश है जो इन्हें जन-धन की हानि पहुंचाये! तो फिर सवाल उठना वाजिब है कि ये देश हथियारों की इतनी बड़ी डील आखिर क्यों कर रहे हैं?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद अपनी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा मध्यपूर्व के देशों सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात तीनों अमीर देशों से करके न केवल अमेरिकी राष्ट्रपति के इतिहास की परंपराओं को तोड़ा है बल्कि अपनी इस पहली मिडिल ईस्ट के देशों की यात्रा में हथियारों का सबसे बड़ा सौदा करके भी सबको चौंका दिया है। इन सबके इतर डोनल्ड ट्रंप अमेरिका के ही नहीं विश्व के एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति बन गये जिन्हें विदेश यात्राओं के दौरान अब तक का सबसे महंगा उपहार मिला है!

मध्य पूर्व की विदेश यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति को कतर के शाही परिवार द्वारा उपहारस्वरूप चौंतीस सौ करोड़ रूपये यानि 400 मिलियन डॉलर का लग्झरी बोईंग विमान दिया गया जिसकी हथियारों की डील से ज्यादा चर्चा हो रही है! वैसे तो परंपरा के मुताबिक सभी देश अपने यहां आने वाले राष्ट्र प्रमुखों को अपनी हैसियत के अनुसार उपहार स्वरूप कुछ न कुछ देते हैं जिसकी कभी इतने बड़े रूप में चर्चा होती भी नहीं है किन्तु अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की दूसरे कार्यकाल की विदेश यात्रा की घोषणा के साथ ही दुनिया भर में ट्रंप के इस लीक से हटकर चले गये दांव की चर्चा गर्म थी।

ट्रंप का मिडिल ईस्ट हथियार सौदा और मानवता पर सवाल

यह अनुमान था कि मिडिल ईस्ट के देशों में अमेरिका का यह सबसे बड़ा सौदागर ( बिजनेसमैन ) राष्ट्रपति ट्रंप वहां कोई न कोई ऐसा बड़ा खेल जरुर करेंगे जो वर्षो तक याद रखा जायेगा! एक सफल बिजनेसमैन की तरह जैसा कि अनुमान था उससे कई गुना बड़ा काम डोनल्ड ट्रंप न केवल कर आये बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति के रूप में उपहार स्वरूप दुनिया का सबसे कीमती विमान भी अपने साथ ले आये!

मिडिल ईस्ट के यह देश ही दुनिया में सर्वाधिक तेल आपूर्ति करते हैं इस लिहाज से तेल बाजार में अपना-अपना प्रभाव जमाने के उद्देश्य से और जगह को लेकर भी आपस में इन देशों के बीच आपसी तनातनी चलती है किन्तु पाकिस्तान की तरह आतंकी साजिश का खेल एक-दूसरे के प्रति यहां कभी खेला नहीं जाता! तेल बाज़ार पर अपना आधिपत्य जमाने को लेकर इन देशों में आपसी संघर्ष होता आ रहा है लेकिन अब तक यहां कभी 26/11 या वर्ल्ड ट्रेड सेंटर जैसी आतंकी घटनायें नहीं हुई।

इसी वजह से यहां के देशों के अमीर शेख अपनी आन-बान और शान के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं तो फिर क्यों इन तीनों देशों को अमेरिका के साथ अरबें डॉलर के हथियारों का सबसे बड़ा सौदा करना पड़ा? दुनियाभर में शांति का मसीहा बनने का दंभ भरने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ऐसी क्या मज़बूरी थी कि उन्होंने दुनियाभर में अशांति व मानवता के विनाश करने वाले हथियारों का इतना बड़ा सौदा कर दिया? लेकिन इसे मानवता के लिए दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि दुनिया में शांति के दूत बनने वाले शक्ति संपन्न देश ही हथियारों के बड़े-बड़े सौदे करते देखे जाते हैं तो फिर मानवता को बचाने की इन देशों से उम्मीद रखना बेमानी ही लगती है!

मध्यपूर्व यात्रा के बाद ट्रंप का हथियार सौदा विवादित

मध्यपूर्व के तीन देशों की इस यात्रा की समाप्ति के बाद व्हाइट हॉउस ने आधिकारिक बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को दुनिया में अब तक के इतिहास का सबसे बड़ा हथियारों का सौदा करने वाला राष्ट्राध्यक्ष माना गया! यहां मध्यपूर्व के देशों का अमेरिका से हथियार खरीदने पर एतराज़ नहीं है न ही अमेरिका का इन देशों को हथियार बेचने पर कोई नाराजगी है !

सभी देशों को अपनी-अपनी भौगोलिक सीमाओं और राष्ट्र की सुरक्षा हेतु समय अनुसार अत्याधुनिक तकनीक वाले हथियारों से लैस होना वर्तमान की सबसे बड़ी प्राथमिकता भी है और आवश्यकता भी लेकिन चिंता का प्रश्न यह है कि वर्तमान में कई देश हथियारों का उपयोग मानवता को बचाने में कम अपितु मानवता को लीलने में ज्यादा कर रहे हैं जिन्हें रोका जाना न अमेरिका के बस में है न संयुक्त राष्ट्र के देशें के बस में!

ऐसे में जब अमेरिका का ही मोस्ट वांटेड एक करोड़ डॉलर का ईनामी आतंकी जो अमेरिका को आतंक के ऐसे गहरे जख्म दे गया था जिसे आज भी अमेरिकी महसूस करते हैं वही आतंकी यदि अपने देश सीरिया का अंतरिम राष्ट्रपति अल शेरा बनकर अमेरिका के ही राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से हाथ मिलाता है जो अमेरिका की सत्ता पर दोबारा काबिज़ ही आतंकवाद के विनाश करने के बल पर हुए हैं तो मन में कई तरह के विचार उठना लाजमी भी है?

अमेरिका की हथियार नीति और दोहरी राजनीतिक चाल

कई सालों से अमेरिका का मोस्ट वांटेड अपराधी रहा और आतंकी से राष्ट्रपति बना सीरिया के अल शेरा से इस यात्रा के दौरान न केवल राष्ट्रपति ट्रंप ने हाथ मिलाया बल्कि सौदे की चमक में उसके अपराधों को भुलाकर उसकी तारीफों के पुल बांध आये तो दुनिया भर में इस हथियारों की सबसे बड़ी डील पर संदेह होना वाजिफ लगता है! इस यात्रा से दुनिया ने आतंकवाद पर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप की स्वार्थ परख दोहरी नीति और नीयत दोनों को उजागर किया है !

सऊदी अरब के प्रिंस क्राउन की राष्ट्रभक्ति मानव प्रेम की निष्ठां व विश्व शांति पर किसी को भी दुनिया में शंका नही है और वह अपने देश में हथियारों का गलत इस्तेमाल किसी भी सूरत में कभी होने भी नहीं देंगे लेकिन अरब के खाड़ी देशों में तेल के इस खेल में अपना एकाधिकार जमाने के लिए अल शेरा और अमेरिका से यह उम्मीद नहां रख सकते कि वह भविष्य में हथियार कभी नहीं उठायेंगे ?

अमेरिका दुनिया की हर कीमती वस्तु या संपदा पर अपना आधिपत्य जमाने के लिए पहले से ही कुख्यात है और उसकी शुरू से ही दुनिया पर आधिपत्य जमाने की नीति रही है-मांग लो, खरीद लो या खत्म कर दो! हथियारों की सौदेबाज़ी करके अमेरिका कई देशों को आपस में लड़ाकर या कर्जदार बनाकर अपने कब्जे में ले चुका है! अमेरिका यदि किसी देश से गहरी दोस्ती करता है तो सबसे पहले वह दोस्त के दुश्मन से हाथ जरुर मिलाकर उसे उपकृत करता है!

आतंकवाद में हथियारों की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सवाल

वर्तमान में पाकिस्तान इसका सबसे बेहतर जीता जागता उदहारण भी है! यहां सोचने वाली बात यह है कि जिस पाकिस्तान के पास खुद के अवाम को खिलाने के लिए आटा तक नहीं है वह भला आतंकियों को चार दशक से कैसे पाल कर उन्हें अत्याधुनिक विदेशी हथियार उपलब्ध करा सकता है? आज अमेरिका सहित दुनिया के अमूमन सारे बड़े देश आतंक की जद के शिकार हो चुके हैं!

मानवता के दुश्मन बने इन आतंकवादियों के पास अत्याधुनिक तकनीक के बने विदेशी हथियार आखिर कहां से आते हैं और वह कौन से देश है जो अपनी सुरक्षा के लिए खरीदे गये हथियार आतंकियों को सप्लाई करता है? आतंकी गतिविधि के संचालन के लिए फंडिंग की व्यवस्था कौन करता है और कौन आतंकियों के पकड़े जाने पर उनके अदालतों के म़ुकदमे का भारी खर्च वहन कर उन्हें दुनिया की अदालतों से बरी करवाता है?

-अरविन्द रावल
-अरविन्द रावल

इस तरह के अनेकों यक्ष प्रश्न बने हुए हैं किन्तु दुनिया की कोई भी गुप्तचर संस्था अब तक इन सारे सवालों का कोई जवाब तक नहीं खोज पाई है तो ऐसे में दुनिया के देशों के मध्य हथियारों की बढती डील पर विश्व समुदाय के देशों को गहन मंथन करने की जरूरत है और हथियारों की होड़ पर अंकुश लगाने की भी! समय रहते यदि दुनिया में हथियारों की खरीद-फरोक्त पर लगाम नहीं लगाई गई तो यही हथियार मानवता के लिए अभिशाप बन जायेंगे!

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