एशियाड 1951 की नींव पर खड़ी है भारत में खेलों की शानदार इमारत

जापान, फिलीपींस व चीन के विभिन्न शहरों में 1913 से 1938 तक छोटे पैमाने पर मल्टी-स्पोर्ट्स प्रतियोगिताएं आयोजित करायी जाती थीं, जिन्हें फॉर इस्टर्न गेम्स कहा जाता था। नौ सत्र तक यह गेम्स सफलतापूर्वक आयोजित कराए गए, लेकिन मार्के पोलो पुल घटना के बाद जापान ने सितंबर 1937 में चीन पर हमला किया, जो बाद में दूसरे विश्व युद्ध का हिस्सा बन गया। इस कारण 1938 में ओसाका में होने वाले गेम्स को रद्द करना पड़ा।

नतीजतन फॉर इस्टर्न गेम्स आयोजित होने बंद हो गए। वैसे 1930 के दशक के शुरुआत में पश्चिम एशिया के देशों को भी मल्टी-स्पोर्ट्स प्रतियोगिताओं में शामिल करने के प्रयास होने लगे, जिनसे ओरिएंट चैंपियनशिप गेम्स ने जन्म लिया, जो दिल्ली 1934 (इरविन एम्फीथिएटर) में अपने पहले आयोजन में वेस्टर्न एशियाटिक गेम्स कहलाए, जिसमें चार देशों- अफग़ानिस्तान, ब्रिटिश इंडिया, फिलिस्तीन मैंडेट व सीलोन ने हिस्सा लिया। तय यह किया गया कि हर चार साल के अंतराल पर दो निरंतर समर ओलंपिक के बीच में आयोजित किया जाएँ।

अगले गेम्स 1938 में तेल अवीव, फिलिस्तीन मैंडेट में होने थे, लेकिन दूसरे विश्व युद्ध ने गुड़-गोबर कर दिया। दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद भारत को भी ब्रिटेन की गुलामी से आज़ादी मिली, 1947 में। पंडित जवाहरलाल नेहरु आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बने, जिनका मानना था कि खेल नागरिकों को स्वस्थ रखने के साथ देश की प्रगति में भी भरपूर योगदान देते हैं और विभिन्न देशों के लिए मल्टी-स्पोर्ट्स प्रतियोगिताएं आयोजित करने से देश आपस में एक-दूसरे के करीब आते हैं।

पटियाला हाउस बैठक से एशियन गेम्स की औपचारिक शुरुआत

इसलिए उन्होंने फॉर इस्टर्न गेम्स व वेस्टर्न एशियाटिक गेम्स को मिलाकर जीवित करने की कल्पना की ताकि एशिया के लिए एक संयुक्त खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया जा सके। इस कल्पना को साकार करने के लिए 12 व 13 फरवरी, 1949 को दिल्ली के पटियाला हाउस में एक बैठक हुई, जिसमें सोवियत संघ (जो यूरोपीय ओलंपिक कमेटी का सदस्य था) व वियतनाम (उसकी राजनीतिक संरचना के कारण) को छोड़कर एशिया के उस समय आज़ाद सभी देश आमंत्रित थे।

इस बैठक का फ्रेमवर्क एक अन्य बैठक में तय किया गया था, जो 8 अगस्त, 1948 को दूसरे लंदन ओलंपिक के दौरान इंडियन ओलंपिक कमेटी के प्रतिनिधि गुरुदत्त सोंधी ने बुलायी थी। दिल्ली की बैठक में एशियन गेम्स फेडरेशन (एजीएफ) का गठन हुआ और ड्राट संविधान को स्वीकार किया गया। पटियाला के राजा यादविंद्र सिंह को फेडरेशन का अध्यक्ष व सोंधी को सचिव चुना गया। फेडरेशन के पांच चार्टर सदस्य थे- अफग़ानिस्तान, वर्मा, भारत, पाकिस्तान व फिलिपीन।

एशियन गेम्स की नींव और भारत के खेल महायुग की शुरुआत

तय हुआ कि हर चार साल के अंतराल पर एशियन गेम्स चैंपियनशिप्स का आयोजन कराया जाएगा। पहले एशियन गेम्स दिल्ली में फरवरी, 1950 में आयोजित होना तय हुए। एशिया के अनेक देशों को इनमें हिस्सा लेने के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजे गए। इस प्रकार भारत में खेलों की नींव रखी गई, जिस पर आज एक शानदार इमारत खड़ी हुई है। मिल्खा सिंह, कपिल देव, सचिन तेंदुलकर, मुहम्मद शाहिद, नीरज चोपड़ा, लीएंडर पेस, सानिया मिर्ज़ा, निखिल अडवाणी, विश्वनाथन आनंद, पीवी सिंधु, अभिनव बिंद्रा, मैरी कोम, पीटी उषा आदि इसी पहले प्रयास का नतीजा हैं, जो भारत की युवा पीढ़ी को खेलों के अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा बुलंद करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

बहरहाल, तैयारी पूरी न होने की वजह से पहले एशियन गेम्स फरवरी 1950 में आयोजित न हो सके और 4 से 11 मार्च, 1951 में दिल्ली के इरविन एम्फीथिएटर (नेशनल स्टेडियम) में आयोजित हुए। इन खेलों का उद्घाटन करते हुए भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा, पहले एशियन गेम्स सभी राष्ट्रों के बीच समझ व दोस्ती की समझ के एहसास को प्रोत्साहित करेंगे और समय गुज़रने के साथ ऐसी प्रक्रिया आरंभ करेंगे, जो एशिया के लोगों के बीच दोस्ताना संबंधों को मज़बूत करेंगे। प्रधानमंत्री नेहरू के भाषण में से आयोजकों ने खेलों का आधिकारिक मोटो- खेल को खेल की भावना से खेलें अपनाया।

1951 एशियन गेम्स : खेल, स्पर्धाएँ और महिलाओं की भागीदारी

आधिकारिक लोगो शांति की प्रतीक सफेद पृष्ठभूमि पर लाल रंग में 16 किरणों के साथ चमकता हुआ सूरज था, जिसके बीच में सफेद घेरा और 11 रिंग्स थे, खेलों में हिस्सा लेने वाले देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए यानी 11 देशों ने खेलों में हिस्सा लिया था, जिनमें फेडरेशन का चार्टर सदस्य होने के बावजूद पाकिस्तान शामिल नहीं था। पहले एशियन गेम्स में छ खेल रखे गए थे- एथलेटिक्स, एक्वेटिकस (डाइविंग, स्विमिंग व वाटर पोलो), बास्केटबॉल, साइकिलिंग (रोड व ट्रैक), फुटबॉल व वेटलिफ्टिंग। खेलों को 57 स्पर्धाओं में विभाजित किया गया।

एथलेटिक्स को छोड़कर महिलाओं ने किसी खेल में हिस्सा नहीं लिया। जापान (24 स्वर्ण, 21 रजत व 15 कांस्य) पहले स्थान पर रहा, मेज़बान भारत (15 स्वर्ण, 16 रजत व 20 कांस्य) दूसरे स्थान पर रहा और उसके कुल 51 पदकों में सर्वाधिक 20 कांस्य पदक थे। आठ देशों ने कम से कम 1 पदक अवश्य जीता, जबकि शेष तीन देश कोई पदक जीत नहीं सके। भारत ने अपने यहां दूसरी बार एशियन गेम्स इसके 31 साल बाद 1982 में दिल्ली में आयोजित किए।

-सारिम अन्ना

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