विशाखा को दिया गया पैसा क्रिकेट के विकास के लिए उपयोग किया जाना चाहिए : शिवलाल
हैदराबद, हैदराबाद क्रिकेट संघ (एचसीए) और विशाखा इंडस्ट्रीस प्राइवेट लिमिटेड के बीच चल रहे कानूनी विवाद के लिए किसे दोषी ठहराया जाए। इसके परिणाम स्वरूप एचसीए को 4.32 करोड़ रुपये के प्रायोजन सौदे के लिए विशाखा को 68 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करना पड़ा। एचसीए के एक वर्ग के साथ-साथ विशाखा इंडस्ट्रीस भी इसका दोष एचसीए के पूर्व अध्यक्ष व टेस्ट क्रिकेटर अरशद अयूब पर डाल रहे हैं।
वर्ष 2011 के दौरान तत्कालीन एचसीए अध्यक्ष अरशद अयूब ने विशाखा के साथ प्रायोजन समझौते को एकतरफा रूप से समाप्त कर दिया था, यह दावा करते हुए कि नामकरण अधिकार एचसीए को 100 करोड़ रुपये दिला सकते हैं। उन्होंने कार्यकारी समिति को सूचित किया कि उन्होंने एक कॉपीराइट इकाई के साथ बातचीत पूरी कर ली है, जो स्टेडियम के नामकरण अधिकार 100 रुपये में खरीदने को तैयार हैं, हालाँकि ऐसा कोई सौदा साकार नहीं हुआ, जिसका उल्लेख विशाखा इंडस्ट्रीस द्वारा मंगलवार को एक व्हॉट्सऐप ग्रुप में जारी वक्तव्य में किया गया है।
जिमखाना में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए एचसीए के वर्तमान अध्यक्ष अमरनाथ, संयुक्त सचिव बसवराज और पूर्व अध्यक्ष एन. शिवलाल यादव ने भी कुछ इसी तरह का इशारा किया। अधिकारियों ने सारा दोष अयूब पर डाल दिया। शिवलाल यादव ने कहा कि जो पैसा विशाखा को जारी किया गया, उसका उपयोग क्रिकेट के विकास के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि इस मामले को सुलझाने के लिए समय है और उनकी व्यक्तिगत राय के अनुसार एचसीए को विशाखा के साथ बातचीत कर चर्चा के माध्यम से इस समस्या को सुलझाना चाहिए।
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बातचीत से धनराशि वापसी की उम्मीद
चर्चा के माध्यम से सुलझाव का रास्ता तलाशने पर जारी की गई धनराशि में से बड़ा हिस्सा वापस मिल सकता है, जिसका उपयोग ज़िला स्तरीय क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। अमरनाथ ने कहा कि पैसा अभी पूरी तरह से विशाखा को जारी नहीं किया गया, बल्कि यह डीडी के रूप में अदालत में जमा किया गया है। इसीलिए इस मामले को लेकर अभी कई कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं। इसीलिए वह विधि विशेषज्ञों के साथ चर्चा कर इस समस्या को निपटाने का प्रयास कर रहे हैं।
एचसीए के रिकॉर्ड के अनुसार, अरशद अयूब ने वर्ष 2010 से 2012 और 2015 से 2016 के दौरान एचसीए का अध्यक्ष पद संभाला था, वहीं जी. विनोद वर्ष 2012 से 2014 के दौरान एचसीए के अध्यक्ष रहे। इसी प्रकार वर्ष 2012-14 के दौरान एम.वी. श्रीधर सचिव और वर्ष 2010 से 14 के दौरान शिवलाल यादव ने उपाध्यक्ष की भूमिका निभाई थी। एक क्लब के सचिव ने अपनी बात रखते हुए बताया कि वर्ष 2010 से 14 के दौरान अध्यक्ष से लेकर विभिन्न पदों पर इतने नामी गिरामी लोगों के रहते हुए इस समस्या के लिए केवल अरशद अयूब को ही दोषी कैसे ठहराया जा सकता है। (सी. सुधाकर)
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