2026 में सबसे खूबसूरत वंदे भारत रूट्स : यात्रा ही अनुभव हैं

भारतीय रेलवे ने 164 वंदे भारत सेवाओं के साथ इंटरसिटी यात्रा को पूरी तरह बदल दिया है। अब ट्रेन का सफर सिर्फ़ एक जगह से दूसरी जगह पहुँचने का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह अनुभव बन गया है। भारत की अद्भुत भू-भागीय विविधता को ट्रेन की खिड़की से निहारने का।

वंदे भारत एक्सप्रेस केवल आरामदायक नहीं है, बल्कि इसकी एयरलाइन-स्टाइल सीटें, ऑटोमेटिक दरवाजे, रोटेटेबल चेयर और बायो-वैक्यूम टॉयलेट इसे यात्रा का एक नया अनुभव बनाते हैं। लेकिन सबसे खास बात है। ये ट्रेनें गुजरते समय जितना खूबसूरत नज़ारा दिखाती हैं, वह काबिल-ए-तारीफ है। हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों से लेकर पश्चिमी घाट की हरियाली, कोस्टल क्षेत्रों की शांति से लेकर घाटियों की रमणीयता वंदे भारत हर दृश्य को शानदार बनाती है।

यदि आप यात्रा में ही आनंद खोजते हैं, तो ये पांच वंदे भारत रूट्स आपको जरूर ट्राई करने चाहिए।

1. कत्रा से श्रीनगर : हिमालय की अद्भुत झलक

वंदे भारत एक्सप्रेस से हिमालय और घाटियों के दृश्य

रूट : श्री माता वैष्णो देवी कत्रा – श्रीनगर
दूरी : लगभग 270 किमी
समय : 3-4 घंटे
खासियत : दुनिया का सबसे ऊँचा रेलवे ब्रिज और कश्मीर घाटी के दृश्य

2026 में शुरू हुआ कत्रा-श्रीनगर वंदे भारत रूट हिमालयी नज़ारों का शानदार अनुभव देता है। यह रूट चेनाब ब्रिज से गुजरता है, जो नदी की सतह से 359 मीटर ऊँचा है, ईफ़ेल टॉवर से भी ऊँचा।

यात्रा का अनुभव :
कत्रा से ट्रेन धीरे-धीरे पीर पांजल रेंज की ओर चढ़ती है। यह मार्ग 58 सुरंगों से होकर गुजरता है, जिसमें भारत की सबसे लंबी रेलवे सुरंग (11 किमी से अधिक) भी शामिल है। चेनाब ब्रिज पार करते समय नीचे बहती नदी और चारों ओर पहाड़ों का नज़ारा अद्भुत होता है।

सुझाव : दाईं ओर की सीट लें (कत्रा से श्रीनगर की दिशा में) ताकि ब्रिज का दृश्य बेहतर दिखे।
सर्वोत्तम समय : मार्च से अक्तूबर।

2. मुंबई सीएसएमटी से मदगांव : कोंकण रेलवे का जादू

वंदे भारत एक्सप्रेस से हिमालय और घाटियों के दृश्य

रूट : मुंबई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस – मदगांव (गोवा)
दूरी : लगभग 580 किमी
समय : 7 घंटे 45 मिनट
खासियत : पश्चिमी घाट, पुल, सुरंग और समुद्री दृश्य

कोंकण रेलवे की इस यात्रा में ट्रेन पश्चिमी घाट के हरे-भरे जंगलों, 84 पुलों और कई सुरंगों से गुजरती है। समुद्र तट के पास से गुजरने पर अरबी सागर का नज़ारा मन मोह लेता है।

मॉनसून का अनुभव : जून से सितंबर के बीच यह यात्रा और भी रोमांचक हो जाती है। झरने अचानक दिखाई देते हैं और हरियाली चारों ओर फैल जाती है।

सुझाव : मुंबई से गोवा जाते समय बाईं ओर बैठें ताकि समुद्री और झरनों के दृश्य अच्छे दिखें।
सर्वोत्तम समय : जून-सितंबर (मॉनसून) या अक्तूबर-फरवरी।

3. दिल्ली से देहरादून : हिमालय का प्रवेश द्वार

वंदे भारत एक्सप्रेस से हिमालय और घाटियों के दृश्य

रूट : आनंद विहार/नई दिल्ली – देहरादून
दूरी : लगभग 302 किमी
समय : 4 घंटे 45 मिनट
खासियत : शिवालिक की पहाड़ियाँ और मैदान से पर्वतों की यात्रा

दिल्ली-देहरादून वंदे भारत यात्रा में समतल मैदान धीरे-धीरे हिमालय की तलहटी में बदलते हैं। हरिद्वार और देहरादून के बीच जंगल, छोटे झरने और साफ़, ठंडी हवा यात्रा को यादगार बनाते हैं।

सुझाव : सुबह की ट्रेनें हिमालय की चोटियों का स्पष्ट दृश्य देती हैं।
सर्वोत्तम समय : मार्च-जून और सितंबर-नवंबर।

4. तिरुवनंतपुरम से एर्नाकुलम : केरल का कोस्टल आकर्षण

वंदे भारत एक्सप्रेस से हिमालय और घाटियों के दृश्य

रूट : तिरुवनंतपुरम सेंट्रल – एर्नाकुलम जंक्शन
दूरी : लगभग 220 किमी
समय : 3-4 घंटे
खासियत : नारियल के पेड़, बैकवॉटर, समुद्री दृश्य और मंदिर नगर

केरल के इस रूट पर ट्रेन नारियल के वृक्षों, बैकवॉटर और पारंपरिक गाँवों के बीच से गुजरती है। यह यात्रा शांति और हरियाली से भरपूर है।

सुझाव : दिन में यात्रा करें ताकि हरियाली और समुद्री दृश्य का पूरा आनंद लिया जा सके।
सर्वोत्तम समय : दिसंबर-मार्च।

5. मुंबई से कोल्हापुर : पश्चिमी घाट की भव्यता

वंदे भारत एक्सप्रेस से हिमालय और घाटियों के दृश्य

रूट : मुंबई सीएसएमटी – कोल्हापुर
दूरी : लगभग 500 किमी
समय : 8 घंटे 30 मिनट
खासियत : पश्चिमी घाट की गहरी घाटियाँ, हिल स्टेशन और कोहरे में लिपटी वादियाँ

यह रूट मुंबई से लेकर घाटियों और पहाड़ियों के बीच से गुजरता है। मौसम और ऊँचाई के अनुसार दृश्य बदलते हैं। मॉनसून में झरने और हरी वादियाँ, सर्दियों में कोहरा और शांति।

सुझाव : यह पूरा दिन लेने वाली यात्रा है, इसलिए किताबें, संगीत या काम साथ रखें।
सर्वोत्तम समय : जून-सितंबर (मॉनसून) और अक्तूबर-फरवरी।

164 वंदे भारत सेवाओं के साथ भारतीय रेलवे ने यात्रा को तेज़ और आरामदायक बनाकर, इसे दृश्यावलोकन का अनुभव भी बना दिया है। चाहे हिमालय की चोटियाँ हों या पश्चिमी घाट की हरियाली, केरल की कोस्टल सुंदरता हो या कश्मीर घाटियाँ वंदे भारत से यह सब नज़ारे एक सीट पर ही देखे जा सकते हैं।

अगली बार यात्रा की योजना बनाते समय, केवल गंतव्य पर न टिकें यात्रा खुद ही अनुभव है। खिड़की वाली सीट बुक करें और कैमरा तैयार रखें। क्योंकि कई बार सबसे यादगार हिस्सा गंतव्य नहीं, बल्कि सफर ही होता है।

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