हिन्दुओं की सुरक्षा करेगी नई बांग्ला सरकार
ढाका, बांग्लादेश की नई सरकार ने बुधवार को कहा कि भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा और अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले बढ़ने को ध्यान में रखते हुए भीड़ संस्कृति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की नवगठित सरकार में सबसे वरिष्ठ मंत्री मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा कि कानून व्यवस्था का मुद्दा तीन प्राथमिकताओं में से एक है और प्रशासन भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा पर नकेल कसने के लिए कदम उठाएगा।
उनसे जब संवाददाताओं ने पूछा कि क्या नया प्रशासन इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए उचित कदम उठाएगा, तो उन्होंने कहा कि बिल्कुल। आलमगीर बीएनपी महासचिव भी हैं और उन्हें स्थानीय शासन मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया है। उन्होंने कहा कि भीड़ द्वारा की जाने वाली हिंसा पर नकेल कसा जाएगा। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था की स्थिति चाहे कितनी भी बिगड़ गई हो, हमें उसमें सुधार लाने का प्रयास करना होगा।
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तारिक रहमान की 180 दिन की प्राथमिकता योजना तय
प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने बुधवार को अपने नवगठित मंत्रिमंडल की पहली बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने, कानून व्यवस्था बनाए रखने और आपूर्ति श्रृंखलाओं को स्थिर करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए 180 दिनों की प्राथमिकता योजना निर्धारित की गई। बैठक के बाद, गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने और निर्बाध बिजली व ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ कानून व्यवस्था बहाल करने को प्राथमिकता बताया। अहमद ने संवाददाताओं से कहा कि हिंसा को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बांग्लादेश में हाल के महीनों में भीड़ द्वारा पीटकर हत्या करने के कई मामले सामने आए हैं, जिनमें से अधिकांश में मोहम्मद यूनुस नीत अंतरिम सरकार के दौरान हिंदू समुदाय के सदस्यों को निशाना बनाया गया था। मानवाधिकार संगठन मानवाधिकार संस्कृति फाउंडेशन ने बताया कि जनवरी 2026 में भीड़ द्वारा पीट कर मार डाले जाने की 21 और पीटे जाने की 28 घटनाएँ हुई हैं। बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने 2025 में 522 सांप्रदायिक हमले होने का दावा किया है, जिनमें हत्या, बलात्कार और मंदिर में तोड़फोड़ की घटनाएँ शामिल हैं। जून 2025 से जनवरी 2026 के बीच अल्पसंख्यक समुदाय के 116 लोगों, जिनमें ज्यादातर हिंदू थे, की हत्या हुईं। वहीं, मीडिया निगरानी संस्थाओं का दावा है कि अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से पत्रकारों पर 640 से अधिक हमले हुए। -(भाषा)
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