घर की ताकत प्रेम और मोहब्बत : ललितप्रभजी
हैदराबाद, किसी भी घर की ताकत दौलत और शौहरत नहीं, प्रेम और मोहब्बत होती है। प्रेम के बिना धन और यश व्यर्थ है। जिस घर में प्रेम है, वहाँ धन और यश अपने आप आ जाता है। हैदराबाद में भव्य चातुर्मास संपन्न कर राष्ट्र संत ललितप्रभजी म.सा. ने नांदेड़ में यह विचार रखें।
आज यहां प्रदीप सुराणा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, नांदेड़ स्थित शंकरराव चव्हाण प्रेक्षागृह, गुरु गोबिंद सिंह जी स्टेडियम के पास जीने की कला विषय पर आयोजित तीन दिवसीय विराट सत्संग प्रवचन समारोह के दूसरे दिन सकल जैन एवं राजस्थानी समाज द्वारा घर को कैसे स्वर्ग बनाएं विषय पर प्रवचन देते हुए राष्ट्र संत श्री ललितप्रभजी म.सा. ने कहा कि अगर आप संत नहीं बन सकते हैं, तो सद् गृहस्थ बनिए और घर को पहले स्वर्ग बनाइए।
परिवार में प्रेम ही घर को मकान से मंदिर बनाता है
जो अपने घर-परिवार में प्रेम नहीं घोल पाया, वह भला समाज में क्या प्रेम रस घोल पाएगा? जो अपने सगे भाई का सहारा बनकर उसे ऊपर उठा न पाया, वह समाज को क्या ऊपर उठा पाएगा? मकान, घर और परिवार की नई व्याख्या देते हुए संत श्री ने कहा कि ईंट, चूने, पत्थर से मकान का निर्माण होता है, घर का नहीं। जहाँ केवल बीवी-बच्चे रहते हैं वह मकान घर है, पर जहाँ माता-पिता और भाई-बहन भी प्रेम और आदर भाव के साथ रहते हैं वही घर परिवार कहलाता है।
चुटकी लेते हुए संतश्री ने कहा कि लोग सातों वारों को धन्य करने के लिए व्रत करते हैं, अच्छा होगा वे आठवां वार परिवार को धन्य करें, सातों वार अपने आप सार्थक हो जाएंगे। राष्ट्र संत ने हर श्रद्धालु को पारिवारिक प्रेम के प्रति मोटिवेट करते हुए कहा कि अकेले हम बूँद हैं, मिल जाएँ तो सागर हैं। अकेले हम धागा हैं, मिल जाएँ तो चादर हैं।
अकेले हम कागज हैं, मिल जाएँ तो किताब हैं। अकेले हम अल्फाज हैं, मिल जाएँ तो जवाब हैं। अकेले हम पत्थर हैं, मिल जाएँ तो इमारत हैं। अकेले हम हाथ हैं, मिल जाएँ तो इबादत हैं। घर को मंदिर बनाने की प्रेरणा देते हुए संतश्री ने कहा कि जहां हम आधा-एक घंटा जाते हैं, उसे तो मंदिर मानते हैं, पर जहाँ 23 घंटे रहते हैं उस घर को मंदिर क्यों नहीं बनाते हैं। उन्होंने कहा कि घर का वातावरण ठीक नहीं होगा तो मंदिर में भी मन में शांति नहीं रहेगी पर हमने घर का वातावरण अच्छा बना लिया तो हमारा घर-परिवार ही मंदिर या तीर्थ बन जाएगा।
स्वभाव ही असली पहचान-मधुर व्यवहार से बनते हैं रिश्ते
अवसर पर डॉ. मुनि श्री शांतिप्रिय सागरजी ने कहा कि सरल स्वभाव वाले परायों के दिल में भी जगह बना लेते हैं और टेढ़े स्वभाव वाले घर वालों के दिल में भी जगह नहीं बना पाते हैं। अगर आपका स्वभाव अच्छा है तो पत्नी आपके घर आने पर खुश होगी अन्यथा आपके घर से जाने पर खुश होगी।
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कार्यक्रम में पूर्व विधायक ओमप्रकाश पोकरणा, मराठा सेवा संघ के कामजी पवार, अश्विन भाई शाह, विजय कुमार कासलीवाल, कैलाश चंद काला, चिरंजीवी लाल ढागडिया, मनोज श्री श्रीमाल, महेंद्र जैन, नवल पारख, महावीर हीरावत, हर्षद भाई शाह, संजय भंडारी आदि गणमान्य लोगों के साथ जैन समाज, अग्रवाल समाज, माहेश्वरी समाज, गुजराती समाज, वैश्य समाज और सकल समाज के श्रद्धालु उपस्थित थे। इससे पूर्व राष्ट्र संतों का स्वागत और अभिनंदन किया गया। रविवार 30 नवंबर को सुबह 9 से 11:15 बजे तक शंकरराव चव्हाण प्रेक्षागृह में बच्चों को कार से पहले दीजिए संस्कार, जीवन को कैसे बनाएं संस्कारवान विषय पर प्रवचन और सत्संग समारोह का आयोजन होगा।
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