स्पीकर ने दानम नागेंद्र, कडियम श्रीहरि पर अयोग्यता याचिका खारिज की

हैदराबाद: तेलंगाना विधानसभा के अध्यक्ष गड्डम प्रसाद ने बुधवार को खैरताबाद विधायक दानम नागेंद्र और स्टेशन घनपुर विधायक कडियम श्रीहरि के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं को खारिज कर दिया। अध्यक्ष ने जांच के बाद दोनों नेताओं को अब भी भारत राष्ट्र समिति (BRS) का विधायक मानते हुए उन्हें अयोग्य घोषित करने से इनकार कर दिया।

बीआरएस ने लगाया था दलबदल का आरोप

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने 2023 के विधानसभा चुनाव में पार्टी टिकट पर जीतने के बाद कांग्रेस में शामिल होने के आरोप में कुल 10 विधायकों के खिलाफ याचिका दायर की थी। इनमें दानम नागेंद्र और कडियम श्रीहरि भी शामिल थे।

हालांकि, स्पीकर के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान दोनों विधायकों ने कहा कि वे अभी भी बीआरएस के सदस्य हैं और उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने के आरोपों से इनकार किया।

सुनवाई के दौरान श्रीहरि और नागेंद्र ने यह भी कहा कि उन्हें बीआरएस की ओर से कोई व्हिप प्राप्त नहीं हुआ था। दानम नागेंद्र ने कहा कि वे हैदराबाद के विकास के लिए मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से एक दिन पहले फैसला

विधानसभा अध्यक्ष का यह फैसला ऐसे समय आया है जब इस मामले की सुनवाई गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2025 में स्पीकर को लंबित याचिकाओं पर निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था और देरी पर नाराजगी भी जताई थी।

इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने सुनवाई की प्रक्रिया दोबारा शुरू की। दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच स्पीकर ने आठ विधायकों के खिलाफ दायर याचिकाएं सबूतों के अभाव में खारिज कर दी थीं।

केटीआर ने फैसले को बताया लोकतंत्र पर हमला

इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (KTR) ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया।उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि जिस नेता ने किसी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता और बाद में दूसरी पार्टी के साथ खड़ा हो गया, उसे क्लीन चिट देना जनता के जनादेश का अपमान है।

केटीआर ने कहा, “दलबदल को बढ़ावा देने वाला यह फैसला लोकतांत्रिक इतिहास का काला दिन है। अगर जनता के वोट से जीती हुई सीटें निजी लाभ के लिए बदली जाती हैं और स्पीकर उसे मंजूरी दे देते हैं, तो लोकतांत्रिक मूल्यों का क्या होगा?”

मामले की पृष्ठभूमि

मार्च 2024 में दानम नागेंद्र के कांग्रेस में शामिल होने के बाद नौ अन्य विधायकों ने भी सत्तारूढ़ दल का समर्थन किया था। इसके बाद विधानसभा में कांग्रेस की संख्या बढ़कर 74 हो गई, जबकि बीआरएस की ताकत घटकर 29 रह गई।

बीआरएस ने इसके बाद स्पीकर से दलबदल करने वाले विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी। लेकिन लंबे समय तक फैसला न आने पर पार्टी ने पहले तेलंगाना हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

हालांकि अब स्पीकर ने सभी याचिकाओं को सबूतों के अभाव में खारिज कर दिया है। बावजूद इसके, दानम नागेंद्र और कडियम श्रीहरि के मामलों में दिए गए फैसले को लेकर राजनीतिक हलकों में आलोचना जारी है।(भाषा)

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