ग्रीन फील्ड रेडियल रोड के लिए भू अधिग्रहण पर स्टे कायम
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने रंगारेड्डी ज़िले के रविरायला में आउटर रिंग रोड एग्जिट 13 से ग्रीन फील्ड रेडियल रोड के निर्माण की राज्य सरकार की कोशिशों पर रोक लगा दी है। अदालत ने ग्रीन फील्ड रेडियल रोड के लिए याचिकाकर्ताओं की जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया पर यथास्थिति बनाए रखने के लिए अंतरिम आदेश जारी किए हैं। इसके संबंध में आज उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस एन.वी. श्रवण कुमार ने अंतरिम आदेश जारी किए। इसके साथ ही इस मामले पर पहले जारी किए गए यथास्थिति के आदेशों को विस्तार दिया गया। न्यायाधीश ने सरकार को इस मामले पर विस्तृत जानकारी के साथ प्रतियाचिका दायर करने के भी आदेश दिए।
राज्य सरकार ने अक्तूबर-2024 के दौरान ग्रीन फील्ड रेडियल रोड के निर्माण हेतु भू-अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी की थी। अधिसूचना को चुनौती देते हुए एन. मोनिका समेत 30 लोगों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। आज सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जे. रामचंदर राव ने दलील पेश की। उन्होंने कहा कि भू-अधिग्रहण अधिनियम के नियमों के खिलाफ यह अधिसूचना जारी की गई है। उन्होंने बताया कि सरकार ने ग्रीन फील्ड रेडियल रोड बनाने के लिए 447 एकड़ जमीन का अधिग्रहण करने का फैसला लिया, जिसमें याचिकाकर्ताओं की 36 एकड़ जमीन भी शामिल है।
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हाईकोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश, सुनवाई 29 दिसंबर
अधिवक्ता ने आगे कहा कि भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया कानून के नियमों के खिलाफ चल रही है, क्योंकि भू-अधिग्रहण के संबंध में याचिकाकर्ताओं को किसी प्रकार का कोई नोटिस जारी नहीं किया गया, जो सहज कानून के प्रावधानों का उल्लंघन है। उन्होंने नोटिस दिए बिना भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया पर रोक लगाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भू-अधिग्रहण को लेकर आपत्तियों का निपटारा किए जाने के बाद ही भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया को अमल में लाया जाना चाहिए, लेकिन सरकारी अधिकारी इस मामले में याचिकाकर्ताओं को कोई मौका दिए बिना भू-अधिग्रहण कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण पर प्रभाव का अध्ययन किए बिना सड़क के लिए सीधे भू-अधिग्रहण करना भी अमान्य है। उन्होंने कहा कि कानून के खिलाफ यह प्रक्रिया की जा रही है।
सरकार की ओर से महाधिवक्ता ए. सुदर्शन रेड्डी ने दलील देते हुए बताया कि ग्रीन फील्ड रेडियल रोड निर्माण हेतु कुल 447 एकड़ भू-अधिग्रहण किया जा रहा है और अधिकतर भू-मालिकों ने पहले ही मुआवजा ले लिया है। उन्होंने कहा कि लगभग 60 करोड़ रुपये का मुआवजा भी दिया जा चुका है। उन्होंने कहा कि कुछ याचिकाकर्ता भी इन लोगों में शामिल है, जिन्होंने मुआवजा ले लिया है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों द्वारा भू अधिग्रहण अधिनियम की धारा 15(1) के तहत की गई सुनवाई में इन लोगों ने भाग लिया था। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा दी गई आपत्ति संबंधी याचिका को सुनवाई के दौरान निपटा दिया गया।
दलील सुनने के पश्चात उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं की जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने के पिछले अंतरिम आदेश को विस्तार देने की घोषणा की। अदालत ने एक शर्त लगाई कि भू अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम निपटारे के अधीन होगी। सरकार को प्रतियाचिका दायर करने के आदेश के साथ मामले की सुनवाई 29 दिसंबर तक स्थगित कर दी गई।
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