दूर होगा आरक्षण सीलिंग का कांटा, 42 प्रतिशत बीसी रिजर्वेशन के लिए संशोधन बिल पारित

हैदराबाद, पिछड़ा वर्ग को 42 प्रतिशत आरक्षण देने को लेकर तेलंगाना सरकार द्वारा विधानसभा में पेश पंचायतराज अधिनियम व म्युनिसिपल एक्ट संशोधन बिल को सत्तापक्ष व विपक्ष की नोंक-झोंक के कारण संक्षिप्त चर्चा के बाद सभी दलों के समर्थन से पारित कर दिया गया। इससे आरक्षण के कार्यान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर कर आरक्षण पर 50 प्रतिशत की अधिकतम सीमा पर सीलिंग को हटाया जा सकेगा। बीसी वर्ग को 42 प्रतिशत आरक्षण देने का रास्ता साफ हो जाएगा।

विधानसभा में शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन रविवार को पंचायतराज मंत्री डी. अनुसूया (सीतक्का) ने पंचायतराज एक्ट संशोधन बिल तथा विधायी मामलों के मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने म्युनिसिपलिटीस (थर्ड एमेंड्मेंट) बिल, 2025 बिल पेश कर सभी दलों से समर्थन देने का आग्रह किया। अधिनियमों के विषयों को लेकर विपक्षियों ने कई तरह के संदेह जताए और कटाक्ष किए। आखिरकार संक्षिप्त चर्चा के बाद बिल को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। चर्चा के दौरान सदन में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी हुई ।

बीसी आरक्षण पर बीआरएस और भाजपा का पक्ष स्पष्ट

मंत्री डी.श्रीधर बाबू ने विपक्षी बीआरएस पर आरोप लगाते हुए कहा कि बीसी रिजर्वेशन का मुद्दा अगले 10 सालों तक लटका रहे, इसी उद्देश्य से 9वें शेड्यूल की बात बार-बार उठाई जा रही है। उन्होंने बीआरएस से बीसी आरक्षण पर अपना रूख स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को भी आरक्षण पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।

बीआरएस का पक्ष रखते हुए पूर्व मंत्री गंगुला कमलाकर ने कहा कि बीसी आरक्षण को तमिलनाडु की तर्ज पर 9वें शेड्यूल में जोड़ने पर ही बिल को सुरक्षा मिलेगी, वरना बिहार और मध्य प्रदेश की भांति विफलता ही हाथ लगेगी। उन्होंने मंत्री श्रीधर बाबू द्वारा आरक्षण को लेकर बीआरएस की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए जाने को गलत करार दिया और कहा कि दरअसल बीआरएस का सही मतलब बहुजन राष्ट्र समिति है। पार्टी हमेशा से पिछड़ा वर्ग के हित में खड़ी रही है।

बीसी वर्ग को 42 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा, तो खुश होने वालों की कतार में वे (गंगुला) सबसे आगे खड़े दिखाई देंगे। उन्होंने कहा कि न्यायिक समस्याएं न आएं, इसलिए सरकार को हर प्रकार से जागरूक होकर कदम बढ़ाना चाहिए । भाजपा विधायक दल के उप-नेता पायल शंकर ने कहा कि भाजपा पहले से ही बिल का समर्थन करती आई है। सरकार को भाजपा की आशंकाओं को दूर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के संबंध में अब तक स्पष्टता नहीं दी गई है।

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तेलंगाना में बीसी 42% आरक्षण पर विधायी चर्चा

इस पर पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने चतुराई से जबाव देते हुए कहा कि चिंता न करें, सरकार पिछड़ा वर्ग को ही पूरा 42 प्रतिशत आरक्षण देगी और यह स्पष्ट है। भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस सरकार बीसी वर्ग को आशाओं की पालकी में झुला रही है। बीसी वर्ग को देने के लिए जो सरकार के हाथ में है, वह भी नहीं दिया जा रहा है। सरकार ने आरटीआई कमीश्नर के 6 सदस्यों में बीसी वर्ग को स्थान नहीं दिया।

निधियों के अभाव में बीसी कार्पोरेशन के कार्यालय पर ताले लग चुके हैं। तेलंगाना के विश्वविद्यालयों में बीसी वर्ग को उचित स्थान नहीं दिया गया है। सरकार को चाहिए कि कानून बनाने से पहले न्यायालयों की ओर भी देखना चाहिए, ताकि कोई परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि बीसी आरक्षण को 9वें शेड्यूल में जोड़ने की बात कही जा रही है, परंतु सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोर्ट इसकी भी समीक्षा कर सकता है।

इस पर श्रीधर बाबू ने हस्तक्षेप करते हुए कांग्रेस जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी की याद दिलायी और कहा कि कांग्रेस पूरी तरह से कटिबद्ध है। अब केंद्र में जिनकी सरकार है, उनकी जिम्मेदारी है कि वह अपना रवैया स्पष्ट करें। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर पायल शंकर से प्रधानमंत्री का अपाईंटमेंट दिलाने की बात भी कही। विधायक जाफर हुसैन ने एमआईएम की ओर से संशोधन बिल को पूर्ण समर्थन देते हुए कहा कि अब पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने वाले राज्यों में तमिलनाडु के बाद तेलंगाना दूसरा राज्य होगा।

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