मानव का परम लक्ष्य प्रभु दर्शन की प्राप्ति : आस्था भारतीजी
हैदराबाद, मानव तन में उस परमात्मा के दर्शन करना ही इस जीवन का मुख्य उद्देश्य है। इस अवसर का पूर्ण लाभ लें और ईश्वर दर्शन व भक्ति की ओर बढ़ें। उक्त उद्गार अत्तापुर स्थित श्री चिन्ना अनंतगिरि शिवालयम, दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा हैदराबाद में आयोजित श्रीकृष्ण कथा के द्वितीय दिवस कथा का रसपान करवाते हुए कथाव्यास साध्वी आस्था भारतीजी ने कहा कि महर्षि चाणक्य समझाते हैं कि पुष्प में गंध, तिल में तेल, काष्ठ में अग्नि, दूध में घी, गन्ने में गुड़ की तरह शरीर में रहने वाली आत्मा का विवेक द्वारा साक्षात्कार करो।
साध्वीजी ने समझाते हुए कहा कि मेहंदी के हरे पत्तों में लाल सुर्ख लाली छुपी होती है, लेकिन क्या केवल तोड़ देने से यह लाली प्रकट हो जाती है? उन पत्तियों को सिल्ली पर रगड़ना पड़ता है। फिर रगड़ी हुई पत्तियों का लेप हाथों पर धारण करते हैं, तब लाली आती है। दही से माखन निकलता है, लेकिन क्या सीधे-सीधे ऊँगली डालकर आप दही से माखन निकाल सकते हैं। दही को मथकर माखन प्राप्त होता है।
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मानव तन में ईश्वर दर्शन और प्रेम भक्ति का संदेश
ठीक यही युक्ति हमें भी अपनानी होगी। गुरु की शरण को प्राप्त कर उस सूक्ष्म युक्ति को पाना होगा, जो हमारे ही अंतर्घट में ईश्वर को प्रकट कर दे। मानव तन में उस परमात्मा के दर्शन करना ही इस जीवन का मुख्य उद्देश्य है। साध्वीजी ने द्वितीय दिवस की कथा का समापन करते हुए प्रेम भक्ति को ईश्वर दर्शन से दृढ़ कर आत्मा के सच्चे आनंद को पाने का सभी से आह्वान किया।
अवसर पर संस्थान की ओर से स्वामी प्रदीपानंद जी, साध्वी भावना भारती जी, साध्वी साक्षी भारती जी समेत अतिथिगण कौशल्या देवी बंग, सुरेश मोदी, लक्ष्मी निवास सारडा, जुगल पारिख, विमल खांडेलवाल, बाबूलाल जोशी, बजरंग लाल नालपुरिया, दीपाराम सीरवी, श्याम अग्रवाल, देवेंद्र चौधरी, छेला राम कुमावत, मोहन लाल कुमावत, गणेश चौधरी, वेना राम चौधरी, गौतम कुमावत उपस्थित व अन्य थे। आरती व प्रसाद वितरण का आयोजन भी किया गया।
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