भगवान महावीर के सिद्धांत अपनाए विश्व : रामचन्दर राव
हैदराबाद, श्री महावीर जैन सेवा संघ त्रयनगर तेलंगाना द्वारा सुकुतरत्नाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा, मुनिराज अभिनंदनसागरजी म.सा. आदि ठाणा-5 व सुयशनिधिजी, सुयोगनिधिजी के सान्निध्य में 2625वाँ भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव भव्यता से सिकंदराबाद स्थित इम्पीरियल गार्डन में मनाया गया। सर्वप्रथम ताड़बन स्थित हनुमान मंदिर के पास स्थित समकित गेस्ट हाउस में अल्पाहार के पश्चात भव्य शोभायात्रा गाजे बाजे व झाँकियों के साथ निकाली गई, जो विभिन्न मार्गों से होती हुई इम्पीरियल गार्डन पहुँचकर धर्म सभा में परिवर्तित हुई।





















































सुपार्श्वजी म.सा. ने कहा कि भगवान महावीर का जीवन कैसा था, यह सभी को विदित है। उन्होंने जो मार्ग बताया,उसका अनुसरण करने की आज आवश्यकता है। भगवान महावीर के बताये मार्ग पर चलकर ही जीवन में मोक्ष की प्राप्ति कर सकते हैं। वर्तमान में विश्व में जो घटित हो रहा है, उसके लिए भगवान महावीर के संदेश जियो और जीने दो, अहिंसा के मार्ग पर चलने से ही शांति को प्राप्त किया जा सकता है। जीवन में सभी दया, करुणा, एकता का भाव रखें और धर्म के मार्ग पर अग्रसर हों।
सुयशनिधिजी म.सा. ने कहा कि भगवान महावीर का जन्म कल्याणक मनाया जा रहा है। वर्तमान में जो परिस्थिति चल रही है, उसमें अहिंसा परमो धर्म को जीवंत करने और विश्व में महावीर के सिद्धांत का अनुसरण करने की नितांत आवश्यकता है। जीव भगवान महावीर की दुनिया से कनेक्ट तो हुए हैं, लेकिन आत्मा को उनकी आत्मा से कनेक्ट नहीं किया। उनकी आत्मा से कनेक्ट होने से ही आत्म कल्याण होगा।
प्रतिदिन 1% सुधार से साल में 365% बदलाव आएगा
म.सा. ने कहा कि यदि हम अपने दिल में सभी जीवों के प्रति दया का भाव रखेंगे, तो फिर हिंसा नहीं करेंगे। हिंसा केवल शरीर की नहीं, बल्कि मन, वचन से भी होती है। इसलिए किसी के प्रति बुरे विचार रखकर हिंसा न करें। विचारों से भी जैनत्व बनें। जीवन में प्रत्येक दिन अपने आप को 1 प्रतिशत ही बदलने का प्रयास करेंगे, तो साल में 365 प्रतिशत तक बदलाव आ जाएगा।
मुख्य अतिथि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एन. रामचन्दर राव ने सभी को महावीर जयंती की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि वर्तमान में विश्व में जिन देशों के बीच युद्ध हो रहे हैं, उन्हें रोकने के लिए भगवान महावीर द्वारा दिए गए अहिंसा परमो धर्म, जियो और जीने दो, अपरिग्रह के संदेश की नितांत आवश्यकता है। बिना संदेशों के विश्व में शांति बहाल नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि प्रभु महावीर ने अपने जीवन में सत्य, अहिंसा, अनेकांतवाद, अपरिग्रह का पालन करने की जो सीख दी थी, वह आज आज भी प्रासंगिक है। देश को आर्थिक पथ पर मजबूती से ले जाने के साथ जरूरी है कि हम जीवन मूल्यों को बनाए रखें।
भगवान महावीर के संदेशों को प्राकृत एवं पाली भाषा में लिखा गया था, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्लासिकल भाषा का दर्जा दिया है। भगवान महावीर ने जो सिद्धांत दिया, वह हर समय के लिए अनुकरणीय रहे हैं और आगे भी रहेंगे। प्रदेश भाजपा आयोजक सचिव चंद्रशेखर तिवारी ने सभी को महावीर जयंती की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि भगवान महावीर ने मुख्य रूप से तीन विषय दिये हैं। अगर सच्चा सुख चाहिए, तो यह केवल त्याग, समर्पण और संयम में मिलेगा।
अहिंसा परमो धर्म : धर्म को समझने का मार्ग
धर्म को समझना है, तो अहिंसा परमो धर्म के मार्ग पर चलना होगा। सेवा ही धर्म है और सेवा से ही इस मार्ग पर चला जा सकता है। हमें आत्म ज्ञान हो जाए, तो मोक्ष प्राप्त हो सकता है। लोगों को मार्ग से भटकने के लिए कई विकल्प हैं, लेकिन इनमें एक संकल्प धारण करने से जीवन के लक्ष्य तक पहुँच सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संकल्प है आजादी के 100वें वर्ष तक भारत को विकसित भारत बनाना है। उनके इस संकल्प के साथ सभी जुड़ें।
विकसित भारत का रास्ता आत्मनिर्भर भारत से होकर जाता है। एक दूसरा संकल्प है गुलामी के हर अंश से मुक्ति। हमारे देश में कई पुर्तगाली, अंग्रेज, मुगल आये उन्होंने देश को लूटा व नरेटिव को बदला, जिससे मुक्ति हासिल की नामों को बदला गया है। गुलामी की मानसिकता से हमें निकलना होगा। हमारी विरासत पर गर्व करना होगा। आज का भारत स्वर्णिम भारत है। दुनिया हमें देख रही है, क्योंकि जैन धर्म ने जो सिद्धांत दिये हैं, उसे दुनिया देख रही है। उन्होंने कहा कि परोपकार से बड़ा पुण्य नहीं। भगवान महावीर ने कहा है कि किसी एकेन्द्रिय की भी मृत्यु न हो, यानी अहिंसा का परम मार्ग दिया।
मल्काजगिरी के सांसद ईटेला राजेन्द्र ने कहा कि जैन समाज श्रद्धा भक्ति से महावीर जयंती उत्साह से मना रहा है। जियो और जीने दो के संदेश समाज को आने वाली पीढ़ी को देने के लिए कार्य कर रहा है। सभी मिलकर जियें। दुनिया के हालता देख रहे हैं, उनकी सोच है कि मैं मरता हूँ तो दूसरो को भी जिन्दा नहीं छोड़ूँगा। प्रधानमंत्री ने संदेश दिया कि भारत बुद्ध व महावीर का जन्म स्थान है, यह युद्ध का स्थान नहीं है। सारी दुनिया इस माने, तभी सुखी रहेंगे।
मर्री राजशेखर रेड्डी ने विविधता में एकता की महत्ता बताई
जैन समाज हर साल जयंती उत्सव मनाते हुए धर्म, परंपरा का अनुसरण कर समाज व आने वाले पीढ़ी को परंपरा से परिचित करवा रहा है। मल्काजगिरी के विधायक मर्री राजशेखर रेड्डी ने कहा कि देश की सबसे बड़ी विशेषता है कि कोस कोस पर पानी बदले, कोस कोस पर वाणी। यानी विविधता में एकता दिखाई देती है। देश की भाषा, वेशभूषा, खान-पान अलग हो सकता है, पर सभी मिलकर प्रगति कर सकते हैं। अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष सरदार जगमोहन सिंह ने कहा कि अवतारी पुरुष का जन्म नहीं होता, उनका अवतार या प्रकाश होता है।
भगवान महावीर ने जो अहिंसा परमो धर्म का संदेश दिया, उसे दुनिया को देखना चाहिए। अहिंसा केवल किसी को शरीर से कष्ट न पहुँचाना नहीं, बल्कि विचारो-शब्दों में भी यह झलकना चाहिए। जियो और जीनो दो का संदेश हमें यह अधिकार देता है कि अपना जीवन जियें और दूसरों को भी जीने का अधिकार दें। यह उत्सव नहीं, बल्कि उनके उपदेश-संदेशों को जीवन का संकल्प बनाने का पर्व है। इसलिए सभी संकल्प लेकर जाएँ।
जैन समाज व सिख समाज का रिश्ता 320 वर्ष पुराना है। 1706 में सिखों के दसवें गुरु गोविन्द सिंहजी के छोटे साहबजादे 7 और 9 साल के जोरावर सिंह और फतेह सिंह को मुगलों ने धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया। जब दोनों ने धर्म परिवर्तन के लिए मना कर दिया, तो उन्हें शहीद किया गया, दीवार में जीवित चुन दिया गया। जब उनकी देह की अंतिम क्रिया करने के लिए कोई नहीं आया, तो जैन वीर टोडरमल जैन आगे आये।
टोडरमल जैन ने 78,000 सोने की मोहरे देकर जमीन खरीदी
मुगलों ने शर्त रखी जितनी जमीन चाहिए, उतनी सोने की मोहरे देनी होंगी। तो टोडरमल जैन ने 78000 सोने की मोहरे देकर जमीन ली। इस कार्य के लिए सिख समाज जैन समाज को बड़े गर्व से याद करता है। प्रधानमंत्री ने 26 दिसंबर को शहादत के दिन को वीर बाल दिवस के रूप में मनाना शुरू किया। यह कार्यक्रम जब भी होता है, तो हर सिख टोडरमल जैन को याद करता है। यह याद दुनिया रहने तक रहेगी।
श्री महावीर जैन सेवा संघ कोर समिति के प्रदीप सुराणा ने बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों का स्वागत व आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज का यह दिन उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, श्रद्धा और महासंकल्प का पर्व है। भगवान महावीर स्वामी के जन्म कल्याणक को भव्यता और गरिमा के साथ मना रहे हैं। भगवान महावीर के सिद्धांत आज भी सभी के हृदय में जीवित हैं। कार्यक्रम में अतिथियों ने भव्यता और गरिमा प्रदान की है।
आज जब संसार विभिन्न चुनौतियों से और अशांति का सामना कर रहा है, तब भगवान महावीर के सिद्धांत शांति और मानवता की राह दिखाते हैं। यह कार्यक्रम नहीं बल्कि सामूहिक संकल्प है, जीवन में अहिंसा, सत्य, अनेकांतवाद, अपरिग्रह के सिद्धांतों को अपनाने का। आभार है कोर समिति, समर्पित कार्यकर्ता, युवा साथियों, जिनके प्रयास ने विराट आयोजन को भव्यता प्रदान की। सभी ने परिश्रम किया है, वह वास्तव में सराहनीय व प्रेरणादायक है। कार्यक्रम में सम्पतराज कोठारी को जैन समाज की बड़ी उपलब्धि जैन रत्न पद से अलंकृत किया गया। समिति के किशोर मुथा ने संपतराज कोठारी का जीवन परिचय दिया।
पारस रांका ने भगवान महावीर के जन्म कल्याणक का स्मरण कराया
पारस रांका ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि भगवान महावीर का जन्म कल्याणक उनके दिव्य जीवन, तप, त्याग और महान गाथा का स्मरण करवाता है। भगवान महावीर एक संपूर्ण जीवन आत्म विजय की यात्रा थी। राजसी सुख त्याग कर जीवन में कठोर तप साधना कर आत्म ज्ञान प्राप्त किया। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची विजय बाहरी संसार पर नहीं, बल्कि मन, इंद्रियों और इच्छा पर विजय से है।
अहिंसा को केवल कर्मों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि वाणी और विचारों में भी परिलक्षित किया। सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य जैसे सिद्धांत मानव जीवन को उच्च नैतिकता और आध्यात्मिकता की ओर ले जाते हैं। भगवान महावीर के संदेशों को सुनें नहीं, बल्कि जीवन के आचरण में लाकर उसे सार्थक करें। महावीर तातेड़ ने सभी का आभार व्यक्त कर मुख्य सहयोगी, प्रमुख सहयोगी, सहयोगी, कोर समिति व युवा कार्यकर्ताओं का धन्यवाद प्रकट किया।
सम्पतराज कोठारी ने श्री महावीर जैन सेवा संघ द्वारा जैन रत्न की पदवी से सम्मानित करने के लिए विशेष तौर पर आभार प्रकट किया। कार्यक्रम का संचालन निकेश जैन एवं ललित सुराणा ने किया। अवसर पर सुकन्या समृद्धि योजना के फार्म का वितरण किया गया। इस दौरान जेआरएफ द्वारा कैंप लगाया गया। इसके अतिरिक्त दांत, नेत्र, रक्तदान, कैंसर जाँच, अंगों की, सामान्य जाँच, श्री गुरु गणेश सेवा निधि द्वारा स्नैक्स, जीव दया, तरबूज, गन्ने का रस, छांछ, राजस्थानी स्नैक्स आदि के स्टॉल लगाये गए, जिनका सभी ने लाभ लिया। अवसर पर कंटोनमेंट बोर्ड की सदस्य नर्मदा मल्लिकार्जुन, गौतमचंद गुगलिया, मोतीलाल भलगट, योगेश खरगांधी, जगदीश प्रसाद मायछ सहित अन्य उपस्थित थे।
शोभायात्रा को झंडी मिलापचंद बोकाड़िया ने दिखाई
इससे पूर्व शोभायात्रा को झंडी लाभार्थी मिलापचंद बोकाड़िया ने दिखाई। झंडा वंदन का लाभ संघवी शांतिलाल धानमल, सज्जनराज विमल कुमार हेमंत भरत कुमार इलायचीवाले ने, दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण का लाभ सुशीला देवी सुभाषचंद, राजेश, नवीन, प्रवीण, सचिन मखाणा परिवार ने, बैक ड्रॉप स्टेज का लाभ कांतिलाल गौतम राहुल पोकरणा ने, स्वामी वात्सल्य का लाभ जवरीलाल विजयराज उत्तमचंद नाग सेठिया परिवार ने, प्रवेश द्वार का लाभ अमृत कुमार शैलेश, विशाल आंचलिया परिवार ने, गेट का लाभ मिश्रीमल नेमीचंद आनंद प्रियंका कटारिया एवं धरमचंद राज कुमार रूपेश कातरेला परिवार ने लिया।
कोर समिति के सदस्यों ने मुख्य, प्रमुख, सहयोगी एवं सह सहयोगी परिवार का स्वागत शॉल, माला और स्मृति चिह्न से किया।
कार्यक्रम में प्रमुख सहयोगी भेरूलाल जिनेन्द्र पारस रांका, पारसमल प्रदीप श्रेष्ठ सुराणा, जिनेंद्र महावीरचंद आदित्य तातेड़, किशोर कुमार प्रतीक प्रणय मुथा, माणकचंद ज्ञानचंद नेमीचंद मखाणा, किशनलाल सुरेश अनुराग बोहरा, बिरदीचंद कैलाशचंद प्रिया कमांडो, विजयादेवी-संपतराज सुजीत अजीत कोठारी, मंगलचंद पवन अभिषेक पांड्या, पारसमल धनराज घेवर कोठारी, भंवरलाल जयप्रकाश प्रभावती मखाणा, जीवराज विमल नाहर, उगमराज गौतमचंद अंकित कटारिया, जवरीलाल विजयराज उत्तमचंद नाग सेठिया, घेवरचंद गौतमचंद वरुण मुणोत, सुशीलाबाई सुभाषचंद राजेश नवीन प्रवीण सचिन मखाणा, कांतिलाल गौतमचंद राहुल पोकरणा, अन्नराज धनराज नवल बाफना, धरमचंद राजकुमार रूपेश कातरेला, नेमीचंद आनंद कटारिया, सुकन्याबाई मोतीलाल योगेश खरगांधी, अमृत कुमार शैलेश विशाल आंचलिया परिवार रहे।
कार्यक्रम में मुख्य सहयोगियों ने आयोजन की भव्यता सुनिश्चित की
मुख्य सहयोगी मिश्रीलाल गौतमचंद नवरतनमल गुगलिया, नेमीचंद सुशील सुनील अनिल बोहरा (जीतो-हैदराबाद), आनंदराज प्रवीण सोहन सुराणा, बिरदीचंद अनिल कोठारी, उगमराज विजय कुमार सुराणा, शिवराज लक्ष्मीचंद जैन ज्वेलर्स, मूलचंद मिलापचंद बोकाड़िया, बादलचंद निर्मलचंद ललवाणी, मोतीलाल सुशील भलगट, हीरचंद माणकचंद गौतमचंद चोरड़िया, शांतिलाल सुरेशचंद हर्षित सिसोदिया, शांतिलाल पारस नाबरिया, धनराज रमेश कुमार गौतमचंद गांधी, कमलाबाई रिखबचंद खिंवसरा, किशनलाल गौतमचंद अभय कुमार तातेड़, पन्नालाल विमलचंद अलिजार, माणकचंद महेन्द्र दिनेश गौतम आंचलिया, किशोरचंद महावीर गौरव सांखला, कानमल सुरेश कुमार पंकज संचेती, महावीर बैंक, रमनलाल छोगालाल हितेश श्रीश्रीमाल, फतेहचंद अनिल आशा कटारिया, केवलचंद धर्मेन्द्र जितेन्द्र समदरिया, शेरमल अशोक कुमार किशोर राजेन्द्र बोहरा, बाबूलाल नितिन आषि सिरोया, शांतिलाल अशोक धर्मेन्द्र गुगलिया, मेसर्स अनंतम ज्वेलर्स, हॉलीडे बाजार डॉट रहे।
सहयोगी शांतिलाल गौतमचंद विनोद श्रीश्रीमाल, पृथ्वीराज महावीरचंद बोहरा, रमेशचंद रोहित प्रियांश सुतलिया, उगमराज प्रणय चौधरी, दशरथचंद सुनील सिंघवी, जगदीश प्रसाद जयकुमार मायछ, बाबूलाल राजेन्द्र मुथा, सुभाषचंद रतनचंद राजेश नाहटा, विजयराज मनोज कुमार परमार, साहू पटेल, कन्हैयालाल सज्जनराज गांधी, चैनराज दिलीप कुमार मखाणा, पारसमल ताराचंद अलिजार, नेमीचंद मिठ्ठालाल डंक, संपतराज भंवरलाल भंडारी, पंकज चेतन बरलोटा, राजेश ऋषभ कटारिया, दीपराज मंगलचंद कटारिया, शांतिलाल नवीन अलिजार, पुखराज महीप सतीश पदावत, भंवरलाल अशोक कुमार रहण रहे।
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स्वास्थ्य, सेवा और स्नैक्स स्टॉल के माध्यम से उपस्थितियों को सुविधा
इसी तरह सह सहयोगी ताराचंद दिलीप झाबक, रिखबचंद शांतिलाल सुराणा, माणकचंद संजय खांटेड़, सोहनलाल रिखबचंद बोरा, मांगीलाल सुरेन्द्र मखाणा, भंवरलाल सोहनलाल समदरिया, प्रकाशचंद दिनेश पीरगल, सुरेश जतिन ढोलकिया, रविन्द्र हर्ष पिंचा, सुनील सहज पित्ती, कैलाशचंद मृदुल गुप्ता, मोहलाल आनंद बोहरा, दिनेश यश गोपी सेठी, सज्जनराज महेन्द्र कटारिया, कन्हैयालाल अरुण सांखला, शांतिलाल सिद्धार्थ बोहरा, भोपाल सिंह, नवीन कावड़िया, कमलाबाई पुखराज भंडारी, भंवरलाल जिनेन्द्र गोलेच्छा, पुखराज अनिल मखाणा, सोहनलाल सुनील बिश्नोई, मनीष ललित बोरा, निहालचंद राजेन्द्र मोदी, पूनमचंद विनोद गांधी, मदनलाल मांगीलाल मखाणा, सोहनलाल अशोक गांधी, हस्तीमल मोहन मुणोत, सुभाष विक्की सांखला समिति के पदाधिकारियों द्वारा किया गया।
इसी तरह कमलेश राकेश वोरा, सुभाष अजित तातेड़, भंवरलाल महावीर लोढ़ा, सरदारमल मनीष बढोतरिया, अमरचंद पवन बल्लावत, मुकेश दीपक नाहर, रूपचंद ज्ञानचंद सुरेन्द्र छाजेड़, सुगनचंद सुनील बाघमार, कुशलचंद नवीन सुराणा, अमोलकचंद रमेश दिनेश गांधी, सुगमचंद मनोज छाजेड़, भेरूराल उत्तमचंद कटारिया, सुभाषचंद अजित तातेड़, मोहनलाल राजकुमार मुणोत, प्रकाशचंद अजित श्रीश्रीमाल, मोहनलाल आनंद महावीर बोरा, भीकमचंद पारसमल सुखानी, सोहनलाल राजेश रूणवाल, भंवरलाल प्रफुल्ल मुणोत, जवरीबाई घीसूलाल कटारिया, भंवरीलाल दिलीप कविश लोढ़ा, कन्हैयालाल राजमल सज्जन गांधी, मदनलाल संतोष कुमार लुणावत, भंवरलाल रामकुमार कोठारी, कानमल रमेश संदीप संचेती, मिश्रीलाल ज्ञानचंद कटारिया रहे, जिनका स्वागत कोर समिति के पदाधिकारियों द्वारा किया गया।
श्री महावीर जैन सेवा संघ कोर समिति के प्रदीप सुराणा, पारस रांका, महावीर तातेड़, किशोर मुथा, जयप्रकाश मखाना, विजय सुराणा, नेमी मखाना, पवन पांड्या, सुरेश बोहरा, अशोक हरण, धर्मेन्द्र समदरिया, कैलाश मांडोत, अशोक नाहर, सुधीर स्येठिया, प्रवीण मखाणा, दिलीप डागा, घेवर कोठारी ने कार्यक्रम में सहयोग प्रदान किया।
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