बाबा श्याम की कृपा के लिए करना होगा तन, मन से समर्पण : पवन गुरु

हैदराबाद, संसार में उसी भक्त को मनचाहा फल मिला है, जिसने पूर्ण रूप से अपने आपको तन और मन से बाबा के चरणों में समर्पित किया है। बाबा सभी भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने के लिए तैयार हैं, बस भक्त के समर्पण की देरी है। कलयुग में केवल बाबा का ही आश्रय व्यक्ति के जीवन को धन्य बनाता है।

श्री श्याम बाबा की दिव्य कथा में भक्तों की उपस्थिति

उक्त उद्गार श्री चिन्ना अनंतगिरी शिवालयम में श्री खाटू श्याम परिवार, अत्तापुर द्वारा आयोजित श्री श्याम बाबा की दिव्य कथा के प्रथम दिवस श्री श्याम कथा भूषण पवन गुरुजी ने कथा का महात्म्य बताते हुए व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि बाबा श्याम की कथा रहस्यमय है। बाबा श्याम का एकादशी के दिन कीर्तन गुणगान करते हैं, परंतु हम सभी गलती कर रहे हैं। बाबा ने शीश का दान द्वादशी के दिन किया था।

वेदों पुराणों में कहा भी गया है कि भगवान शिव के भजन करने से प्राप्ति नहीं होती, बल्कि शिव की प्राप्ति शिव पुराण कथा करवाने से होती है। कथा का श्रवण करने से करोड़ों जन्मों के पापों का नाश होता है। कीर्तन से हमारे पापों का नाश नहीं होता। रामजी के भजन गाने से रामजी की प्राप्ति नहीं होती।

रामजी की प्राप्ति की लिए श्रीरामजी की कथा करवानी चाहिए। पापों की निवृत्ति का मार्ग स्कंध पुरान से प्राप्त होता है। बाबा की कथा स्कंध 18 पुराण में से एक है। इसके रचयिता वेदव्यासजी हैं। स्कंध पुराण भगवान वेदव्यास ने लिखा, जिसमें बाबा श्याम की कथा का संपूर्ण रहस्य छिपा है। उन्होंने कहा कि हम सालों से बाबा श्याम की भक्ति करते हैं, नाम लेते हैं और बाबा सुन भी रहे हैं, लेकिन सुनता उन्हीं की है, जो मन से ध्याते हैं, वाणी से नहीं।

परिवार और बच्चों के सुख-शांति के लिए प्रयास और मेहनत जरूरी

पवन गुरु ने कहा कि भगवान कृष्ण ने अपना नाम किसी को दिया है, वह तो केवल बर्बरीकजी को व्यक्ति यदि किसी से प्रेम करता है, तो वह शरीर से करता है। वह अपने परिवार, बच्चों के लिए जीता है, बच्चों को सुख शांति से रखने का प्रयास कर मेहनत करता है। पवन गुरु ने कहा कि जब मन में कोई परेशानी बाधा है, तो प्रभु श्याम को साथ कर लें, इससे अकेले नहीं रहेंगे और जीवन में किसी भी तूफान से टकरा जाएँगे।

भगवान के नाम में अद्भुत शक्ति है, जिससे असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। दुनिया की ऐसी कोई समस्या नहीं, जिसका समाधान बाबा के पास न हो। बाबा को तो जीव का समर्पण चाहिए। जो समर्पित हो जाता है, फिर उसके जीवन का कल्याण हो जाता है। प्रभु भाव के भूखे हैं, जो भाव से भज लें, वह उसी के हो जाते हैं। संसार में जितने भी महान संत हुए हैं, उन सभी ने प्रभु को भाव से भजा, इसलिए वह इतिहास में अमर हो गये।

प्रभु सभी को स्वीकार करते हैं, बस समर्पित होने वाला चाहिए। प्रेम चाहिए पैसे नहीं। नोट हमारे काम आते हैं, बाबा तो भक्तों को प्रेम देखते हैं। जो प्रेम से पुकारता है, बाबा उसी के हो जाते हैं। आज के युग में जब तक बाबा को अपना नहीं मान लेते, तब तक कुछ नहीं होगा। भक्त प्रह्लाद और ध्रुव ने ऐसी प्रभु की भक्ति की है, जिसके चलते उनको परम पद मिला, यह साधारण व्यक्ति के लिए संभव नहीं है।

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भक्ति के लिए मन की जरूरत, पैसे नहीं : पवन गुरु

पवन गुरु ने कहा कि भक्ति के लिए पैसे की नहीं, मन की जरूरत है। अपने छोटे परिवार में ही अपने आपको न्यौछावर करें, तो बाबा मिल जाऍँगे। श्याम को अपना मानते नहीं और माँगने चले आते हैं। बाबा श्याम को परिवार का सदस्य बनाओ, माता-पिता की तरह बाबा श्याम से प्रेम करो। एक बार जो बाबा श्याम का हो गया, फिर किसी की आवश्यकता नहीं है। भक्ति का भाव चाहते हैं, तो इसमें मोल भाव न करें। जीवन में समृद्धि और सुख शांति चाहिए, तो बाबा का नाम प्रतिदिन जपें, फिर देखें बाबा की कृपा कैसे बरसती है। कथा से पूर्व अत्तापुर रामबाग स्थित श्री राम मंदिर से भव्य कलश एवं निशान यात्रा कथा स्थल तक निकाली गई। रात्रि में होली के भजन का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में सुरेश मोदी, श्रीगोपाल सारड़ा, रेखा-रमेश कुमार लद्दड़, अल्का-लक्ष्मीकांत व्यास, पायल-रोहित इन्नाणी, संतोष-रामदेव राठी, संगीता-रामप्रकाश दरक, स्मिता-श्याम अग्रवाल, प्रीति-चन्द्रप्रकाश बंग, ज्योति-नरसिंग सारड़ा, संगीता-गोपाल जाजू, रेणु-विनोद सारड़ा, आशा-दिनेश खंडेलवाल, नीता-महेश कुमार शर्मा, रीना-महेश अग्रवाल, जयश्री-मनमोहन काबरा, मनीषा-प्रीतेश मोदी, अर्चना-गोविन्द सारड़ा, मधुबाला पाराशर, पूनम-श्रीकांत पाराशर, गिरिराज करवा, सूर्यकांता-वेणुगोपाल करवा, गोरजा इन्नाणी, मनीषा- विनोद इन्नाणी, नीता-सुनील काबरा, बबिता-श्रीकांत मित्तल, सुमन-पवन व्यास, नेहा-रवि पचीसिया, प्रभा-विशाल जोशी, ललिता-त्रिंबकराव जाधव, सुधा-विजय कुमार व्यास, सारिका-ललित अग्रवाल, अनुराधा-पन्नालाल शर्मा, वैजयन्ती -रमेश हेडा, किरण-नरेश कुमार डोबा, कोमल-राजेंद्र बहिवाल, तारा-जुगल किशोर कलंत्री, शकुंतला-प्रह्लाद सारड़ा सहित अन्य ने योगदान दिया।

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