आज सिनेमाघरों में धमाका : 4 बड़ी फिल्में

आज सिनेमाघरों में टाइगर श्रॉफ की ‘बागी 4’, राजनीतिक ड्रामा ‘द बंगाल फाइल्स’, साइलेंट कॉमेडी ‘उफ्फ ये सियापा’ और सच्ची कहानी आधारित ‘इंस्पेक्टर ज़ेंडे’ रिलीज़ हो गई हैं, जो दर्शकों को एक्शन, ड्रामा और थ्रिल का मिश्रण पेश कर रही हैं।

बागी 4

निर्देशक – ए.हर्ष, निर्माता – साजिद नाडियाडवाला, कलाकार – टाइगर श्रॉफ, सोनम बाजवा, हरनाज संधू और संजय दत्त।
साल की मोस्ट अवेटेड मूवी बागी 4 आखिरकार आज थिएटर में रिलीज हो गई है। कुछ समय पहले ही फिल्म का ट्रेलर रिलीज हुआ था जिसे देखकर साफ पता चलता है कि फिल्म में टाइगर श्रॉफ और संजय दत्त, दोनों ही अभिनेताओं का खतरनाक ऐक्शन दिखने वाला है।

वैसे भी देखा जाए तो टाइगर श्रॉफ को उनके ऐक्शन के लिए ही पसंद किया जाता है मगर इस बार का ऐक्शन उनकी पिछली बागी फ्रेंचाइजी की फिल्मों से ज्यादा खतरनाक होने वाला है। फिल्म में टाइगर श्रॉफ के साथ हरनाज संधू और सोनम बाजवा भी लीड रोल निभा रही हैं। वहीं संजय दत्त खूंखार विलेन के किरदान में नजर आएंगे। कहा तो यह भी जा रहा है कि संजय दत्त की खलनायकी देखकर तो एक पल के लिए आपके रोंगटे ही खड़े हो जाएंगे।

वहीं हरनाज संधू और सोनम बाजवा भी फुल ऐक्शन मोड में दिखाई देंगी। फिल्म की कहानी की बात करें तो पता चला है कि इसमें एक आशिक अपनी प्रेमिका की तलाश में लोगों की जान लेता है। हालांकि, फिल्म में ये भी दिखाया गया है कि टाइगर जिस शख्स का किरदार निभा रहा है, वो एक लड़की की तलाश में है लेकिन, वहीं दूसरी ओर ये भी दिखाया गया है कि वो लड़की असल में कोई है ही नहीं। अब ये हैलुसिनेशन है या असल में धोखा, ये भी पता नहीं चल पाता। फिल्म की असल कहानी है क्या इसका पता तो फिल्म देखने के बाद ही लगाया जा सकेगा।

द बंगाल फाइल्स

निर्देशक – विवेक अग्निहोत्री, कलाकार – मिथुन पावर्ती, पल्लवी जोशी, दर्शन कुमार, सिमरत कौर, अनुपम खेर, सास्वता चटर्जी, नमाशी पावर्ती, राजेश खेरा, पुनीत इस्सर, प्रियांशु चटर्जी, दिब्येंदु भट्टाचार्य, सौरव दास और मोहन कपूर हैं ।
यह राजनीतिक ड्रामा फिल्म 1946 के महान कलकत्ता हत्याकांड और नोआखली दंगों पर पेंद्रित एक कहानी प्रस्तुत करती है, जिसमें हिंसा और उसके बाद के घटपाम को एक नरसंहार के रूप में दर्शाया गया है जिसे ग्रेट कलकत्ता किलिंग कहा जाता है और दावा किया गया है कि इतिहास के इन अध्यायों को जान-बूझकर दबाया गया या अनदेखा किया गया।

यह हिंसा चार दिनों तक चली थी उसके बाद इसका विस्तार देश के दूसरे राज्यों में भी हो गया और इसे देश के विभाजन के लिए जिम्मेदार कारणों में से एक माना जाता है। द बंगाल फाइल्स, विवेक अग्निहोत्री की आधुनिक भारतीय इतिहास पर आधारित द फाइल्स ट्रायोलॉजी की तीसरी और अंतिम किस्त है, जो द ताशकंद फाइल्स (2019) और द कश्मीर फाइल्स (2022) के बाद आई है। 204 मिनट की अवधि के साथ, यह सबसे लंबी भारतीय फिल्मों में से एक है और आज थिएटर में रिलीज होगई है।

यह फिल्म 16 अगस्त 1946 को प्रत्यक्ष कार्रवाई दिवस से जुड़ी दुखद घटनाओं को दर्शाती है। 1946 के महान कलकत्ता हत्याकांड के नाम से भी जानी जाने वाली यह हिंसा जल्द ही बंगाल प्रेसीडेंसी के आसपास के इलाकों में फैल गई, जिसमें 1946 के नोआखली दंगे और टिप्पेरा और कोमिला की घटनाएँ शामिल थीं, जिन्हें एक सिनेमाई कथा के माध्यम से दर्शाया गया है। सांप्रदायिक हिंसा की वास्तविक घटनाओं पर आधारित यह कहानी उन घटनाओं को उजागर करती है जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता और विभाजन के मार्ग को महत्वपूर्ण रूप से आकार दिया।

उफ्फ ये सियापा

निर्देशक – जी. अशोक, निर्माता – लव रंजन और अंकुर गर्ग, कलाकार – सोहम शाह, नुसरत भरूचा और नोरा फतेही। इस फिल्म की कहानी इसके टाइटल की तरह ही बिल्कुल अनोखी है। बिना किसी डायलॉग की इस फिल्म में ए.आर.रहमान की मीठी धुनें कहानी में इमोशंस और प्यार भर देती हैं। ऐसे में यह साफ है कि म्यूजिक ही इस फिल्म की जान है।

जी. अशोक द्वारा डायरेक्टेड उफ्फ ये सियापा एक साइलेंट कॉमेडी है। केसरीलाल (सोहम शाह) की अपनी पत्नी पुष्पा (नुसरत भरुचा) के साथ रहता है। उसके गुस्से में घर छोड़ कर जाने के बाद केसरीलाल आजादी महसूस करता है और सपने में अपनी पड़ोसन कामिनी (नोरा फतेही) की खूबसूरती की तरफ खिंचा चला जाता है।

उफ्फ ये सियापा आज थिएटर में रिलीज हो गई है। ये फिल्म गलतियों से भरी एक अनोखी, बिना डायलॉग्स की कॉमेडी है, जिसमें केसरी लाल सिंह एक शर्मीला आम आदमी है, जो खुद को एक मुश्किल में उलझा बैठता है। इससे पहले कि वह कुछ कर पाता, गलत तरीके से उसके पास एक ड्रग पार्सल पहुंचकर उसकी मुश्किल बढ़ा देता है।

इस तरह से उसकी मुश्किलों का सिलसिला शुरू हो जाता है, सबसे बुरी बात यह होती है कि उसके घर में एक लाश मिल जाती है। जैसे ही केसरी इस मुसीबत से बाहर निकलने की कोशिश करता है, एक और लाश मिल जाती है, जिससे उसका घर पूरी तरह से क्राइम सीन बन जाता है। इन सबके बीच, मुसीबत को और बढ़ाने के लिए, पुलिस इंस्पेक्टर हसमुख (ओमकार कपूर) अपने खास मकसद के साथ वहाँ आता है, जिससे और भी हंगामा मच जाता है।

इंस्पेक्टर ज़ेंडे

निर्देशक – चिन्मय मंडलेकर, निर्माता – जय शेपामणी और ओम राउत, कलाकार – मनोज बाजपेयी, जिम सर्भ कार्ल।
यह कॉमेडी थ्रिलर फिल्म है, जिसका निर्देशन और लेखन चिन्मय मंडलेकर ने किया है और इसका निर्माण जय शेपामणी और ओम राउत ने किया है । फिल्म में मनोज बाजपेयी इंस्पेक्टर मधुकर ज़ेंडे और जिम सर्भ कार्ल भोजराज की भूमिका में हैं, जो कुख्यात सीरियल किलर चार्ल्स शोभराज से प्रेरित एक किरदार है।

यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर आज रिलीज हो गई है। यह फिल्म मधुकर ज़ेंडे की सच्ची कहानी पर आधारित है, जो मुंबई के एक पुलिस अधिकारी थे, जिन्होंने चार्ल्स शोभराज को दो बार गिरफ्तार किया था; एक बार 1971 में और दूसरी बार 1986 में तिहाड़ जेल से भागने के बाद गोवा में।

70 और 80 के दशक की मुंबई की संकरी गलियों में, जब कुख्यात स्विमसूट किलर तिहाड़ जेल से फरार हो जाता है, तो एक जांबाज पुलिस अफसर उसे पकड़ने की ठान लेता है। सच्ची घटना से प्रेरित यह कहानी जज्बे और हिम्मत की है, जो एक रोमांचक बिल्ली-चूहे के खेल में बदल जाती है। इसके साथ ही फिल्म में भालचंद्र कदम, सचिन केदकर, गिरीजा ओक और हरीश दूधाडे भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।

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