ट्रंप और मस्क : पानी पर पानी लिखना!

डोनल्ड ट्रंप और एलन मस्क, समकालीन विश्व इतिहास की दो ऐसी शख्सियतें जिन्होंने अपनी-अपनी दुनिया में नियम तोड़े और इतिहास रचा। इनके स्वार्थपूर्ण रिश्ते की चलायमानता ने हाल के वर्षों में आबाल-वृद्ध नर-नारी का ध्यान आकर्षित किया है। 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में मस्क का ट्रंप के लिए खुला समर्थन एक नई विश्व व्यवस्था और सत्ता समीकरणों का प्रतीक था। लेकिन, 2025 में यह दोस्ती दरारों से भरी नजर आ रही है।

कहा जाता है, कुछ महान लोगों की दोस्ती सुबह की परछाई की तरह होती है – सिर पर धूप चढ़ते ही गायब! याद करें, दो बड़े व्यापारियों की इस दोस्ती की शुरूआत कैसे हुई थी! ट्रंप और मस्क का रिश्ता शुरूआत में परस्पर हितों पर आधारित रहा। 2024 के चुनाव में मस्क ने न केवल ट्रंप का समर्थन किया, बल्कि अपने सोशल मीडिया मंच एक्स का उपयोग कर उनके अभियान को बल दिया।

ट्रंप-मस्क विवाद: सत्ता, नीति और टकराव की जंग

जीतते ही ट्रंप ने ज़ोर-शोर से मस्क को डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी का नेतृत्व सौंपा। इससे मस्क को सरकारी खर्चों में कटौती का जिम्मा मिला। यह एक रणनीतिक गठजोड़ था। ट्रंप को मस्क की तकनीकी विशेषज्ञता और युवा मतदाताओं में लोकप्रियता का लाभ मिला, जबकि मस्क को सरकारी अनुबंधों और नीतिगत प्रभाव का अवसर। लेकिन यह दोस्ती रातोंरात दो एल्फा व्यक्तित्वों की टक्कर का शिकार हो गई। सयाने बोले, यह तो होना ही था!

वर्तमान में ट्रंप और मस्क के बीच तनाव चरम पर है। ट्रंप के वन बिग ब्यूटीफुल टैक्स और खर्च बिल की मस्क ने तीखी आलोचना की। विनाशकारी और पागलपन भरा करार दिया। मस्क ने दावा किया कि यह बिल अमेरिका की नौकरियों और भविष्य की इंडस्ट्रियों को नुकसान पहुँचाएगा। जवाब में, ट्रंप ने मस्क की कंपनियों – टेस्ला और स्पेसएक्स – को मिलने वाली सरकारी सब्सिडी खत्म करने की धमकी दी। मस्क ने ट्रंप को एपस्टीन फाइलों से जोड़कर सनसनीखेज आरोप लगाए, जिन्हें ट्रंप ने खारिज किया।

कहना न होगा कि इस विवाद का असर मस्क की कंपनियों पर पड़ा। टेस्ला के शेयरों में एक दिन में 9.53 प्रतिशत की गिरावट आई। इससे मस्क को एक झटके में करीब 3 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। स्टारलिंक द्वारा व्हाइट हाउस में बिना अनुमति वाई-फाई सेटअप जैसे विवादों ने मस्क की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। मस्क ने डीओजीई से इस्तीफा दे दिया। ट्रंप ने कहा कि वे मस्क से बात भी नहीं करेंगे। जगज़ाहिर है कि यह टकराव न केवल व्यक्तिगत अहंकार का परिणाम, बल्कि नीतिगत मतभेदों और सत्ता के खेल का भी प्रतीक है!

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ट्रंप-मस्क संबंध: दोस्ती या टकराव की दास्तां?

वैसे ये दोनों महान विभूतियाँ इतनी विचित्र और अस्थिर हैं कि यह टिप्पणी लिखते-लिखते भी इनका रिश्ता बदल जाए, तो अचरज नहीं! अभी जून 2025 में सुलह के संकेत मिले थे न! जब ट्रंप ने मस्क को माफ करने की बात कही थी और मस्क ने अपनी टिप्पणियों पर खेद जताया था! लेकिन दोनों का दीर्घकालिक मेलजोल बड़ी हद तक संदिग्ध ही लगता है। मस्क ने ट्रंप के बिल के पारित होने पर नई राजनैतिक पार्टी बनाने की बात कही है, जो ट्रंप के वोट बैंक – खासकर युवा और टेक-उद्यमियों – में सेंध लगा सकती है।

यदि मस्क ऐसा करते हैं, तो अमेरिकी राजनीति में नया उलटफेर आ सकता है और डेपोट्स को अप्रत्यक्ष लाभ हो सकता है। पर फिलहाल सब अनिश्चित है। बात सीधी सी है कि ट्रंप और मस्क का रिश्ता सत्ता, प्रभाव और अहंकार की कहानी है। भारत जैसे देशों के लिए, जहाँ तकनीक और वैश्विक अर्थव्यवस्था महत्वपूर्ण हैं, यह टकराव सबक देता है। मजबूत व्यक्तित्वों की दोस्ती अक्सर टकराव में बदल जाती है। यों भविष्य में यह रिश्ता या तो अमेरिकी नीतियों को नया आकार देगा; या एक स्थायी विभाजन की ओर ले जाएगा! जो होगा देखा जाएगा। अभी तो डॉ. कुँअर बेचैन के शब्दों में यही कि-

दिल पे मुश्किल है बहुत दिल की कहानी लिखना;
जैसे बहते हुए पानी पे हो पानी लिखना!

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