जन्मजात नागरिकता मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में शामिल होंगे ट्रंप

वाशिंगटन: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट जन्मजात नागरिकता से जुड़े एक बहुचर्चित मामले में दलीलें सुनेगा, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के कुछ गैर-नागरिकों से पैदा हुए बच्चों के लिए स्वतः नागरिकता को प्रतिबंधित करने के प्रयास की परीक्षा लेगा और 14वें संशोधन और दशकों पुरानी कानूनी मिसालों के अर्थ को नया रूप दे सकता है।
यह मामला ट्रंप द्वारा जारी एक कार्यकारी आदेश पर केंद्रित है। इसमें संघीय एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि वे उन बच्चों को अमेरिकी नागरिकता देने से इनकार करें जिनके माता-पिता या तो अवैध रूप से देश में रह रहे हैं या अस्थायी वीजा पर हैं। निचली अदालतों ने इस आदेश पर रोक लगा दी है। इसके चलते देश की सर्वोच्च अदालत में कानूनी लड़ाई छिड़ गई है।
इस विवाद का मूल कारण 14वां संशोधन है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका में जन्मे और “उसके अधिकार क्षेत्र के अधीन” लोगों को नागरिकता प्रदान करता है। इस वाक्यांश को लंबे समय से जन्मजात नागरिकता सुनिश्चित करने के रूप में समझा जाता रहा है।
फैसले का अमेरिकी राजनीति पर बड़ा असर संभव
ट्रम्प ने अपनी नीति का बचाव किया है। उनका कहना है कि संविधान का उद्देश्य अमेरिका की धरती पर जन्मे सभी बच्चों पर लागू होना नहीं है। उनका तर्क है कि इसमें उन बच्चों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए जिनके माता-पिता के पास स्थायी कानूनी दर्जा नहीं है।
ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में, ट्रम्प ने मौजूदा व्यवस्था की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था विदेशी नागरिकों को “पैसे देकर” अपने बच्चों के लिए नागरिकता हासिल करने की अनुमति देती है। उन्होंने लिखा, “जन्मजात नागरिकता का मतलब चीन और बाकी दुनिया के उन अमीर लोगों से नहीं है, जो अपने बच्चों और लाखों अन्य लोगों को पैसे देकर हास्यास्पद रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका का नागरिक बनाना चाहते हैं।” उन्होंने आगे कहा: “यह गुलामों के बच्चों का मामला है! हम दुनिया के इकलौते देश हैं जो इस विषय पर चर्चा को भी महत्व देते हैं।”
ट्रंप ने न्यायपालिका पर भी हमला किया। उन्होंने कहा, “दुनिया हमारे देश को नागरिकता बेचकर अमीर हो रही है, जबकि साथ ही साथ हमारे अमेरिकी न्यायालय प्रणाली की मूर्खता पर हंस रही है।” “मूर्ख न्यायाधीशों और न्यायमूर्तियों से कोई महान देश नहीं बन सकता!”
कानूनी मिसालें जन्मजात नागरिकता का समर्थन
इस आदेश का विरोध करने वालों में नागरिक अधिकार समूह और कई राज्य शामिल हैं। उनका कहना है कि दीर्घकालिक कानूनी मिसालें जन्मजात नागरिकता का समर्थन करती हैं। उनका तर्क है कि कार्यपालिका संविधान का उल्लंघन नहीं कर सकती।
इस फैसले का असर आव्रजन नीति पर पड़ सकता है। इससे नागरिकता की कानूनी परिभाषा भी बदल सकती है। हर साल होने वाले हजारों जन्म इससे प्रभावित हो सकते हैं। (भाषा)
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